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1 जून, 2020|2:03|IST

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सीतापुर में कर्ज के बोझ तले दबे किसान ने फांसी लगाकर जान दी

सूदखोरों के चंगुल में फंसे एक किसान ने रविवार को फांसी लगाकर जान दे दी। गांव से बाहर एक पेड़ पर उसकी लाश लटकी मिली। परिवार का कहना है कि उसने बैंक के अलावा सूदखोरों से भी कर्ज लिया था। आर्थिक तंगी के चलते घर के हालात बेहद खराब थे। आरोप है कि जमीन छीनने के लिए सूदखोर किसान को धमका रहे थे। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

हरगांव क्षेत्र के कबेलीथारा गांव निवासी शत्रोहन शनिवार की रात पालेशर पर जाने की बात कहकर घर से निकला था। रविवार सुबह काफी देर तक जब वह घर वापस नहीं लौटा तो परिजनों को चिंता हुई। खोजबीन करते हुए लोग जब परसेहरा-शरीफपुर मार्ग पर पहुंचे तो पालेशर के करीब ही एक यूकेलिप्टस के पेड़ पर 60 वर्षीय शत्रोहन की लाश लटकी मिली। इसकी सूचना ग्रामीणों ने पुलिस को दी। कुछ ही देर में पुलिस और प्रशासनिक अफसर मौके पर पहुंच गए।

एसओ योगेन्द्र सिंह को दिए गए बयान में परिजनों व ग्रामीणों ने बताया कि शत्रोहन पुत्र विश्नू ने बीते दस माह पहले पैंतीस हजार रुपए कर्ज लेकर पालेशर लगाया था। कुछ समय तक तो पालेशर ठीक चला, लेकिन फिर समस्या होने लगी। पालेशर न चलने और सूदखोरों का दबाव बढ़ने से घर के आर्थिक हालात बिगड़ते चले गए। दस महीने में किसान शत्रोहन पर कर्ज बढ़कर सत्तर हजार हो गया। परिजनों का कहना है कि सूदखोरों द्वारा जमीन को हथिया लिए जाने का भय सता रहा था। इसके लिए उसे परेशान किया जा रहा था। इसी कारण किसान ने अपने ही पालेशर के करीब रस्सी से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिवार के लोगों का बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। एसओ योगेन्द्र सिंह का कहना है कि पूरे मामले की जांच हो रही है। बताए गए सूदखोरों की भी तलाश की जा रही है।

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  • Web Title:the farmer died by hanging in sitapur