DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दरिंदगी के 11 घंटे बाद भी बेखबर रहा केजीएमयू प्रशासन

लखनऊ। कार्यालय संवाददाता

...केजीएमयू में गैंगरेप के बाद जब महिला ने शोर मचाना शुरू किया तो दोनों गार्ड व लिफ्टमैंन ने पीड़िता को धमकाना शुरू कर दिया। महिला को जान से मारने की धमकी दी। जब महिला शांत नहीं हुई। चीख-पुकार सुन गेस्ट्रो विभाग के लोग जुटने लगे तो तीनों ठेका कर्मचारियों ने महिला को 50 हजार रुपये का लालच दिया। आरोपियों ने कहा कि 50 हजार रुपये ले लो लेकिन मुंह खोला तो ठीक नहीं होगा। धमकी से महिला सहम गई। जब केजीएमयू के सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय कुमार, प्रवक्ता डॉ. नरसिंह वर्मा समेत दूसरे अफसर सुबह नौ बजे कोतवाली पहुंते तब महिला का मनोबल बढ़ा। उसने आपबीती सुनाई।

दरिंदगी के 11 घंटे बाद भी बेखबर रहा केजीएमयू प्रशासन

इलाज और जांच में ही केजीएमयू के अफसर बेपरवाह नहीं है बल्कि गैंगरेप जैसी घटना को भी उन्होंने हल्के में लिया। यही वजह है कि दरिंदगी के 11 घंटे बाद अफसर मौके पर पहुंचे। चार अफसर पीड़ित के पास चौक कोतवाली गए। बाकी अफसर शताब्दी अस्पताल पहुंचे।

रीढ़ की हड्डी में परेशानी के बाद हरदोई निवासी मरीज को केजीएमयू में इलाज के लिए लाया गया था। करीब आठ महीने से मरीज का इलाज चल रहा था। न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. क्षितिज श्रीवास्तव की देखरेख में इलाज चल रहा था। डॉ. क्षितिज की टीम ने ऑपरेशन किया। जिसके बाद मरीज की हालत में सुधार था। मंगलवार को पत्नी मरीज को लेकर आई थीं। पर, डॉ. क्षितिज की ओपीडी गुरुवार को होती है। इस लिहाज से मरीज व उनकी पत्नी शताब्दी में ही रूक गए। बीती रात करीब साढ़े 10 बजे शताब्दी फेज 1 में घटना हुई।

रात दो बजे तक चलता रहा हंगामा, सोते रहे डॉक्टर-कर्मचारी

घटना के बाद रात करीब दो बजे तक शताब्दी अस्पताल में हंगामा चलता रहा। पीड़िता चीख-चीख कर अपने साथ हुई दरिंदगी को बता रही थी। पर, उसकी सुनने वाला कोई नहीं था। शताब्दी में तीन विभागों का संचालन हो रहा है। इनमें गेस्ट्रो, नेफ्रोलॉजी, आर्गेन ट्रांसप्लांट यूनिट और सोशल आउटरीच प्रोग्राम समेत दूसरे विभागों का संचालन हो रहा है। दरिंदगी की शिकार महिला घटना के बाद चीखती हुई तीसरे तल पर पहुंची। मरीज व उनके तीमारदारों ने पीड़िता की चीख-पुकार सुनी। घबराई पीड़ित महिला ने डॉक्टर व कर्मचारियों के कमरे बाहर पहुंची। दरवाजा बंद था। जिसे काफी देर उसने दरवाजा पीटा लेकिन डॉक्टर व कर्मचारी सोते रहे। नतीजतन पीड़िता की पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है।

अफसरों की फौज, फिर भी बदइंतजामी

केजीएमयू में अफसरों की लंबी-चौड़ी फौज है। इन पर केजीएमयू के जो व्यवस्था को चाक चौबंद रखने का जिम्मा है। इसके बावजूद हालात बदतर हैं। करीब 30 से ज्यादा अफसर तैनात हैं। इनमें प्रमुख पद में सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय कुमार, प्रॉक्टर डॉ. आरएएस कुशवाहा, सभी बड़े विभागों में चिकित्सा अधीक्षक, प्रवक्ता डॉ. नरसिंह वर्मा, डॉ. विभा सिंह, 40 से ज्यादा पीआरओ व सोशल वर्कर तैनात हैं। इसके बावजूद केजीएमयू में आए दिन घटनाएं हो रही हैं। इन पर पाबंदी लगाने की बात तो दूर समय पर अफसरों को सूचना तक नहीं मिल पा रही है। बदइंतजामी का खामियाजा इलाज कराने आए लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:kgmu