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सर पोचखानवाला ने सेंट्रल बैंक को दिया नया मुकाम

मुजफ्फरपुर। कार्यालय संवाददाता। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के संस्थापक सर सोराबजी पोचखानवाला ने अपने जीवन में भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के कई प्रयास किए। बैंकिंग क्षेत्र में उनकी भूमिका आज भी मिसाल है। अपनी कर्मठता के बल पर उन्होंने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को कई योजनाओं को शुरू करने वाला अग्रणी बैंक बना दिया। यह जानकारी सेंट्रल बैंक मुजफ्फपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक पीके राय ने बुधवार को श्री पोचखानवाला के जन्म दविस की पूर्व संध्या पर दी। उन्होंने बताया कि आज बैंक चार हजार से अधिक शाखाओं के साथ अखिल भारतीय नेटवर्क वाला भारत का तीसरा सबसे बड़ा राष्ट्रीयकृत बैंक है।

101 वें वर्ष में बैंक ने 3.51 लाख करोड़ के कुल व्यवसाय की सीमा को पार कर लिया है। बताया कि सर पोचखानवाला 20 रुपये प्रतिमाह के वेतन पर चार्टेड बैंक में लिपिक पद पर नियुक्त हुए। इसके साथ ही उन्होंने लंदन चैम्बर ऑफ कॉमर्स बुक कीपिंग परीक्षा उतीर्ण की। लंदन स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकर्स सर्टिफाइड एसोसिएट होने वाले वे पहले भारतीय थे। उन्होंने कहा कि श्री पोचखानवाला ने 28 वर्ष की उम्र में बैंक शुरू किया। सच्ची लगन, औद्योगिक दूरदर्शिता व जुझारुपन ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को मात्र 12 वर्ष के अंदर सबसे बड़ा बैंक बना दिया।

1911 को उन्होंने प्रबंधक पद संभाला व 24 फरवरी 1920 को प्रबंधक निदेशक की जिम्मेवारी ली।

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