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मियां-बीवी के झगड़े ने रखी एएच व्हीलर की नींव

कहते हैं हर सफल इंसान के पीछे कोई न कोई महिला होती है, लेकिन कई बार आपसी लड़ाईयां भी सफलता के रास्ते खोल देती हैं। ऐसे ही एक झगड़े ने देश के सबसे बड़े बुकस्टोर चेन ‘एएच व्हीलर’ की नींव रख दी।

इस समय देश के 258 रेलवे स्टेशनों पर कंपनी के 378 स्टोर चल रहे हैं। इलाहाबाद रेलवे स्टेशन से शुरू हुई इस कंपनी ने इस साल अपनी स्थापना के 135 साल पूरे कर लिए हैं। इसकी शुरुआत एक फ्रांसीसी लेखक एमिली एडवर्ड मोरे ने अपने दोस्त टीके बनर्जी के साथ 1877 में की थी। मोरे को किताबों का बहुत शौक था। घर में किताबें इधर-उधर बिखरी रहती थीं। एक दिन उनकी पत्नी ने गुस्से में आकर चेतावनी दे दी की किताबें नहीं हटाई तो उन्हें बाहर फेंक दूंगी।

बीवी की चेतावनी से परेशान मोरे ने अपने दोस्त टीके बनर्जी के सहयोग से रेलवे अधिकारियों से अनुमति ली और इलाहाबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर एक चादर बिछाकर अपनी पुरानी किताबों को भारी छूट पर बेचना शुरू कर दिया। पहले ही दिन थोड़ी देर में सारी किताबें बिक गईं। ये सिलसिला पांच दिनों तक चलता रहा और इस प्रकार मोरे व बनर्जी किताब बेचने वाले बन गए।

कुछ दिनों बाद उन्होंने एक कंपनी बना ली। बाद में उन्होंने कंपनी का एक प्रतिशत शेयर देकर लंदन की कंपनी एएच व्हीलर का ब्रांड नेम खरीद लिया। उसी साल दोनों दोस्तों ने इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर अपना पहला स्टोर खोल दिया। इसमें 59 प्रतिशत हिस्सा मोरे, 40 प्रतिशत टीके बनर्जी और एक प्रतिशत हिस्सा आर्थ हेनरी व्हीलर (एएच व्हीलर) के दामाद मार्टिन ब्रांड का था।

टीके बनर्जी को कंपनी का पार्टनर होने के साथ कंपनी के एकाउंटेंट की भूमिका भी निभानी पड़ती थी। कंपनी का दूसरा स्टोर हावड़ा रेलवे स्टेशन और तीसरा नागपुर स्टेशन पर खोला गया। धीरे-धीरे कंपनी का नेटवर्क बढ़ता गया। 1930 में टीके बनर्जी 100 प्रतिशत शेयर लेकर कंपनी के मालिक हो गए। टीके बनर्जी के परपोते और वर्तमान में कंपनी के निदेशक अमित बनर्जी ने बताया कि विभाजन से पहले पाकिस्तान में भी इस कंपनी के कई स्टोर थे लेकिन बाद में वहां की सारी दुकानें बंद कर दी गईं।

दस हजार लोगों को दी है नौकरी
एएच व्हीलर एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने 10 हजार से अधिक लोगों को नौकरी दे रखी है। कंपनी की 78 फीसदी कमाई न्यूजपेपर और मैगजीन से होती है। 20 प्रतिशत कमाई किताबों और दो फीसदी का कमाई का जरिया सरकारी प्रकाशन और टाइम टेबल से होती है।

रुडयार्ड किपलिंग को दी पहचान
एएच व्हीलर ने अंग्रेजी के जाने-माने लेखक रुडयार्ड किपलिंग को भी पहचान बनाने में काफी मदद की। अमित बनर्जी बताते हैं कि कंपनी ने 1888 में किपलिंग की पहली किताब का प्रकाशन किया। उस वक्त किपलिंग को लेखक के रूप में पहचान नहीं मिल सकी थी।

ज्ञान का प्रकाश फैलाना मकसद
कंपनी का मकसद चारों ओर ज्ञान का प्रकाश फैलाना है। यही कारण है दूरदराज के इलाकों के 30 फीसदी स्टोर घाटे में होने के बावजूद हम उन्हें चला रहे हैं।

अमित बनर्जी, निदेशक एएच व्हीलर एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड

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