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जीतन राम मांझी होंगे बिहार के अगले मुख्यमंत्री

जीतन राम मांझी होंगे बिहार के अगले मुख्यमंत्री

जीतनराम मांझी बिहार के 23वें मुख्यमंत्री होंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जदयू विधायक दल द्वारा खुद को नया नेता नामित करने के लिए अधिकृत किए जाने के बाद यह फैसला लिया। वह शाम 6. 30 बजे मांझी को लेकर राजभवन गए।

मांझी 2008 से लगातार नीतीश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हैं। महादलित समाज से आने वाले मांझी स्नातक (प्रतिष्ठा) हैं और संविधान के अच्छे ज्ञाता माने जाते हैं। उन्हें संसदीय राजनीति का भी लंबा अनुभव है। मांझी नीतीश कुमार के बेहद करीबी और भरोसेमंद माने जाते हैं। राजभवन से शाम सात बजे नीतीश कुमार राजभवन से बाहर निकले और पत्रकारों को बताया कि जदयू ने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। मांझी नई सरकार का नेतृत्व करेंगे। जदयू के 117 विधायकों की सूची के साथ राज्यपाल को सरकार बनाने का दावा सौंपा गया है।

गौरतलब है कि सोमवार की दोपहर जदयू विधायक दल की बैठक के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री आवास के बाहर समर्थकों को समझने गए। लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहने को उनका आह्वान किया। साथ ही समझाया कि वर्तमान परिस्थिति में क्यों उनका सीएम बने रहना उचित नहीं है। इसके बाद शाम 6. 30 बजे वह राजभवन गए। कार में उनके साथ सिर्फ जीतन राम मांझी थे। 68 वर्षीय मांझी लोकसभा चुनाव में गया से जदयू के प्रत्याशी भी थे। मांझी जहानाबाद जिले के मखदुमपुर से विधायक हैं।

जीतन राम मांझी  
विधायक : मखदुमपुर से
पिता : स्व. रामजीत राम मांझी (खेतिहर मजदूर)
जन्म : 06 अक्टूबर, 1944
पैतृक गांव- महकार (खिजरसराय, गया)  
शक्षणिक योग्यता : स्नातक (प्रतिष्ठा)
ववाहिक स्थिति : विवाहित
पत्नी : श्रीमती शांति देवी
संतान : दो पुत्र एवं पांच पुत्री
राजनीति में प्रवेश : 1980
राजनैतिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक सेवाएं : जाति में उपेक्षित (महादलित) समाज के लोगों के लिए विशेष कार्यक्रम चलना, महादलित आयोग के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका, महाविद्यालय का सृजन एवं विकास का कार्य करना, विश्वविद्यालय के अभिषद सदस्य के रूप में कार्य करना, मगही भाषा का प्रचार-प्रसार करना।
विधानसभा सदस्य : 1980 से 1990 तक तथा 1996 से अब तक
इन महत्वपूर्ण पदों पर रहे :     1983 से 1985 तक उपमंत्री (बिहार सरकार)
                 1985 से 1988 तक राज्यमंत्री
                1998 से 2000 तक राज्यमंत्री
                2008 से अब तक कैबिनेट मंत्री

शाम 4.25 बजे

इस्तीफे के बाद पहली बार बोलते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि मेरे फैसले को समझे। उन्होंने कहा कि मैंने भावना में आकर फैसला नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि सभी मानते हैं कि मैंने बिहार में काम किया है। बिहार में विकास हुआ है। मैंने विधायकों को अपनी बात बताई और वे मेरी बात को मान गए। सांप्रदायिक के आधार पर धुव्रीकरण हुआ और असाधारण स्थिति के कारण असाधारण फैसला लिया गया।

शाम 3.35 बजे
बिहार के नए मुख्यमंत्री का नाम तय करने की जिम्मेदारी जदयू विधायक दल ने नीतीश कुमार को दी है। नए नेता का नाम आज शाम तक घोषित किए जाने की उम्मीद है। इसके बाद राज्यपाल से शाम को जदयू के नेता मिलने जाएंगे। साथ ही बताया गया है कि 2015 का विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जाएगा और नीतीश कुमार सरकार का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

शाम 3.15 बजे
बिहार के नए मुख्यमंत्री के नाम का फैसला नीतीश कुमार करेंगे। उन्होंने जदयू के विधायकों के बार बार के आग्रह के बावजूद आज अपना इस्तीफा वापस लेने से इंकार कर दिया। जदयू विधायक दल की आज संपन्न बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि पार्टी नेतत्व ने एक असाधरण निर्णय लिया है। नीतीश पार्टी का नेतृत्व करते रहेंगे और पार्टी और राज्य सरकार के बीच तालमेल बनाए रखेंगे। सिंह ने बताया कि राज्यपाल डीवाई पाटिल से आज शाम का समय मांगा गया है और जदयू अध्यक्ष शरद यादव, कुमार तथा वह खुद राजभवन जाएंगे।

इस मामले को लेकर कल से अब तक हुई जद (यू) विधायक दल की इस दूसरी बैठक के बारे में उन्होंने कहा कि विधायकों ने कुमार के अपने इस्तीफ के फैसले पर अटल रहने के निर्णय को भारी मन से स्वीकार कर लिया है और उन्हें ही जद (यू) सरकार का मुख्यमंत्री चुनने का अधिकार दिया है। हालांकि उन्होंने अगले मुख्यमंत्री के रूप में किसी का नाम लेने से इंकार कर दिया और कहा कि कुमार को नया नेता चुनने का अधिकार दिया गया है।

3.00 बजे
विधयक दल की बैठक खत्म हुई।

2.30 बजे
जदयू के विधायक दल की बैठक शुरू हुई।

इससे पहले बिहार में जदयू विधायक दल ने रविवार को एक बार फिर नीतीश कुमार को सर्वसम्मति से अपना नेता चुना। पार्टी के तमाम विधायक किसी दूसरे नाम पर विचार करने को भी तैयार नहीं हुए। नीतीश ने अपने भाषण में जब मुख्यमंत्री पद पर बने रहने से इनकार कर दिया तो तमाम जदयू विधायक एक नेता एक निशान का नारा लगाते हुए वहीं धरना पर बैठ गए।

विधायक दल नीतीश कुमार को नेता चुनने के फैसले पर अड़ा रहा। तमाम विधायक मुख्यमंत्री आवास में ही धरना पर बैठ गए। इसके बाद नए मुख्यमंत्री पर फैसला सोमवार तक के लिए टाल दिया गया। खुद नीतीश कुमार ने विधायक दल के निर्णय पर विचार करने के लिए कल तक के लिए समय मांगा। इसके बाद तमाम विधायक शांत हुए। अब नेता के चुनाव पर फैसला सोमवार को होगा।

विधान पार्षद और पार्टी के प्रवक्ता संजय सिंह शाम 6:50 बजे मुख्यमंत्री आवास के बाहर निकले और पत्रकारों को बताया कि विधायक दल ने सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को दुबारा अपना नेता चुना है और उनसे मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का अनुरोध किया है।

नीतीश कुमार ने इनकार किया तो सभी विधायक अनशन पर बैठ गए। विधायकों ने कहा कि नीतीश कुमार विकास पुरुष हैं और वहीं जदयू के नेता रहेंगे। विधायकों का अपने फैसले पर अड़ा देख मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कल तक का समय मांगा है।

लोकसभा चुनावों में पार्टी की करारी पराजय की नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए नीतीश कुमार ने शनिवार को मुख्यमंत्री पद से अपना और अपनी मंत्रिपरिषद का इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया था। इसके बाद रविवार को नया नेता चुनने के लिए जदयू विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी।

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने कहा था कि विधायक दल की बैठक में नए नेता का चुनाव किया जाएगा। लेकिन रविवार को शरद को मुख्यमंत्री आवास के बाहर उमड़े जदयू कार्यकर्ताओं और विधायक दल की बैठक में विधायकों के विरोध का भी सामना करना पड़ा।

जदयू के विधायक किसी दूसरे नाम पर विचार करने को कतई तैयार नहीं हैं। लोकसभा चुनावों के दौरान विद्रोही तेवर दिखाने वाले कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह ने भी विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद पर बने रहने पर जोर दिया। इससे पहले श्री सिंह ने सुबह कहा था कि उनके भाजपा के साथ जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता है। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने रहेंगे। वह विधायक दल की बैठक में इसका प्रस्ताव रखेंगे।

वहीं नीतीश ने विधायकों से कहा कि मेरे मुख्यमंत्री बने रहने से पार्टी को नुकसान होगा। मैं विधायकों की भावना का सम्मान करता हूं। मैं पद से मुक्त रहूंगा तो पार्टी के लिए ज्यादा वक्त दे पाऊंगा। अगले चुनाव में पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलेगा।

मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के बाद रविवार की दोपहर बुलाई गई बैठक में जदयू विधायक नीतीश के नाम पर अड़ गए। पीटीआई के मुताबिक नीतीश के अड़ जाने के बावजूद जदयू विधायकों ने उन्हें सर्वसम्मति से नेता चुना। विधायकों और समर्थकों के भारी दबाव के बीच नीतीश ने समर्थकों से अपने निर्णय पर पुनर्विचार के लिए एक दिन का वक्त मांगा है।

नीतीश कुमार के घर के बाहर जदयू कार्यकर्ताओं ने किया शरद यादव का विरोध और नीतीश को मुख्‍यमंत्री बनाए रखने के लिए किया प्रदर्शन। लोकसभा चुनाव में बिहार की 40 सीटों में से दो सीट पाने के बाद नीतीश कुमार ने हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से कल अपना इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद से यहां सियासी गहमागहमी काफी बढ़ गई है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की खबर से उत्तेजित जदयू के हजारों कार्यकर्ता रविवार की सुबह से ही मुख्यमंत्री आवास 1 अण्णे मार्ग के बाहर इकट्ठे हो गए। वे नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनें की मांग कर रहे थे।

कार्यकर्ता नारा लगा रहे थे- बिहार का विकास अधूरा है, नीतीश कुमार जरूरी है। इसके लिए कार्यकर्ताओं ने विधायकों पर भी दबाव बनाया। सीएम आवास जाने वाली विधायकों की तमाम गाड़ियां को रोक कार्यकर्ताओं ने दबाव बनाया कि नीतीश कुमार को फिर से नेता चुने।

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव को देख कार्यकर्ता उग्र हो गए और उनकी गाड़ी बाहर ही रोक ली। शरद यादव वापस जाओ और मुर्दाबाद के नारे लगाए। सीएम आवास के सुरक्षाकर्मी अपने घेरे में लेकर शरद यादव को अंदर ले गए।

पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी को भी कार्यकर्ताओं ने अंदर जाने से रोका। जैसे-तैसे वे भी अंदर जा सके। गुस्सा इतना अधिक था कि विधायक श्याम बहादुर की कार का शीशा भी तोड़ दिया। कई विधायकों की गाड़ी पर कार्यकर्ता चढ़ गए थे।
 
नीतीश कुमार के इस्तीफे की खबर मिलने के साथ ही प्रदेश के हर हिस्से से पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं का हुजूम रविवार सुबह से ही मुख्यमंत्री आवास के पास उमड़ने लगा था। दोपहर तक यह तादाद हजारों में पहुंच गई। कार्यकर्ता इतने आक्रोशित थे कि वहां पहुंचने वाले विधायकों के वाहनों पर अपने गुस्से का इजहार मुक्के के प्रहार से करते रहे थे।

दोपहर दो बजे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव की कार जैसे ही सीएम आवास के पास पहुंची कार्यकर्ताओं ने उसे घेर लिया। कार्यकर्ता किसी भी सूरत में शरद यादव को अंदर नहीं जाने देना चाह रहे थे। लगातार उनके खिलाफ नारेबाजी करते रहे। कार के अंदर बैठे शरद यादव कार्यकर्ताओं का यह गुस्सा देख हक्का बक्का रह गए। पांच मिनट तक उनकी कार मौके पर जड़वत रही। शरद यादव को घिरा देख सुरक्षाकर्मी दौड़कर मौके पर पहुंचे। उन्हें अपने सुरक्षा घेरे में लेकर अंदर पहुंचे।

शाम पौने पांच बजे विधायक राजकिशोर कुशवाहा सीएम आवास से बाहर निकले तो कार्यकर्ता उनकी कार की तरफ दौड़े। धक्का देकर उनकी कार को फिर से सीएम आवास परिसर में जाने को मजबूर कर दिया। कार्यकर्ताओं की शरद विरोधी नारेबाजी और नीतीश कुमार जिंदाबाद के नारे देर शाम तक गूंजते रहे। कार्यकर्ता देर शाम तक डटे रहे। कार्यकर्ता सिर्फ यह जानना चाहते थे कि नीतीश कुमार ने सीएम बने रहने के लिए हां कर दी या नहीं।

कल किस समय क्या हुआः

7.00 बजे शाम

विधायकों और समर्थकों के भारी दबाव के बीच नीतीश ने समर्थकों से अपने निर्णय पर पुनर्विचार के लिए एक दिन का वक्त मांगा है।

6.30 बजे शाम
नीतीश के अड़ जाने के बावजूद जदयू विधायकों ने उन्हें सर्वसम्मति से नेता चुना।

5.45 बजे शाम
नीतीश ने किया दोबारा मुख्यमंत्री बनने से इंकार।

5.30 बजे शाम
जदयू विधायक दल की बैठक जारी, नीतीश को फिर मुख्यमंत्री बनाने पर अड़े हुए हैं जदयू विधायक

5.00 बजे शाम
जदयू को समर्थन देने के मामले में लालू प्रसाद यादव ने नहीं खोले पत्ते

4.00 बजे
जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव के खिलाफ पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने लगाए नारे।

4.00 बजे
इस्तीफा देने वाले राजद के तीनों विधायकों के बारे में जानकारी: सम्राट चौधरी खगड़िया जिले के परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से विधायक  हैं, रामलखन राम रमन मधुबनी जिले में राजनगर से विधायक हैं और जावेद इकबाल बांका से विधायक हैं।

3.14 बजे
नीतीश मिश्र के घर बैठक
नीतीश सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री नीतीश मिश्र के आवास पर खाद्य आपूर्ति मंत्री श्याम रजक, विधायक मंजीत सिंह, सतीश साह समेत अन्य की बैठक हुई। एक स्वर में सभी ने कहा कि नीतीश कुमार ही हमारे नेता हैं। दूसरा कोई मान्य नहीं है।

3.14 बजे
नीतीश के समर्थन में धरना–प्रदर्शन
मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के इस्तीफे को लेकर जदयू कार्यकर्ताओं-नेताओं में भारी रोष है। राज्य के कई जिलों से धरना प्रदर्शन की खबर है। लोग सड़क पर उतर आए हैं। उनका कहना है कि बेहतर बिहार के लिए नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री बने रहना जरूरी है। वे नारा लगा रहे थे- बिहार की मजबूरी है, नीतीश सरकार जरूरी है।

3.03 बजे
कांग्रेस विधायकों की आपात बैठक
कांग्रेस विधायकों की आपात बैठक बुलाई गई है। सदानंद सिंह के आवास पर यह बैठक शाम को होगी। ताजा राजनीतिक घटनाक्रम के मद्देनजर यह बैठक महत्वपूर्ण है। जदयू सरकार को कांग्रेस विधायकों का समर्थन प्राप्त था। कांग्रेस के 4 विधायक हैं।

2.28 बजे
राज्यपाल से मिलेगा भाजपा का प्रतिनिधिमंडल
सुशील कुमार मोदी के आवास पर हुई भाजपा की शीर्ष बैठक में निर्णय लिया गया कि 5 बजे शाम को पार्टी का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल डॉ. डी वाई से मिलेगा। नेतृत्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मंगल पांडेय करेंगे।

2.10 बजे
राजद के तीन विधायकों ने इस्तीफा दिया
राजद के तीन विधायकों ने आज रविवार को अपना इस्तीफा दे दिया है। इनके नाम हैं रामलखन, सम्राट चौधरी और जावेद इकबाल। तीनों विधायकों ने विधानसभा अध्‍यक्ष को इस्‍तीफा सौंपा है।

1.34 बजे
लालू प्रसाद यादव ने जदयू सरकार को समर्थन देने की बात से इनकार किया। कहा कि राजद को डैमेज करने के लिए ऐसा किया जा रहा है।

1.20 बजे
शरद यादव कल पटना से दिल्ली गए और आज सुबह ही पटना पहुंच चुके हैं। सूत्रों के अनुसार नीतीश कुमार के नेता बने रहने पर भी रह सकता है विधायकों का जोर। पर इतना तय है कि नीतीश कुमार दुबारा सीएम नहीं बनना चाहते। क्योंकि उन्होंने नए आवास के लिए आवेदन दे दिया है।

1.00 बजे
नरेंद्र यादव हो सकते हैं नए नेता
माना जा रहा है कि विधि मंत्री नरेंद्र यादव हो सकते हैं नए नेता। सवाल यह उठता है कि जदयू को किन परिस्थितियों में नया नेता चुनना पड़ा। कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि कौन-कौन होंगे संभावित मंत्रिमंडल में। पर यह सब अभी हवा में है, जब तक कि जजयू विधायक दल की बैठक नहीं हो जाती है।

12.50 बजे
सुशील मोदी के घर पर मंथन
दूसरी तरफ सुशील मोदी के घर हो रही बैठक चल रही है। भाजपा में वैकल्पिक सरकार देने पर मंथन हो रहा है। जदयू के नाराज विधायकों को टटोला जा रहा। भाजपा के 90 विधायक हैं। इनमें चार विधायक सांसद चुने जा चुके हैं। अब संख्या बचती है 86। सरकार बनाने के लिए 122 का बहुमत चाहिए।

12.40 बजे
11 स्ट्रैंड रोड में रहेंगे नीतीश
उधर, नीतीश कुमार ने नए आवास के लिए आवेदन दे दिया है। वे कल मुख्यमंत्री आवास एक अणे मार्ग खाली कर देंगे। अब वे 11 स्ट्रैंड रोड में जाएंगे। उनके नए आवास की साफ-सफाई तेजी से हो रही है।

12.28 बजे
राजद की कोर कमेटी की बैठक कल
तीसरी ओर राजद सरकार को लेकर अपना पत्ता नहीं खोल रहा। राजद की कोर कमेटी ही करेगी अंतिम फैसला। अब लालू अकेले कोई फैसला नहीं लेना चाहते। ऐसा पहली बार होगा कि राजद की कोर कमेटी में किसी अहम बिन्दु पर चर्चा हो। सूत्रों की मानें तो संकट आने पर जदयू की सरकार बचाने पर राजद में है सहमति। पर सरकार में शामिल होने पर राजद में मतभेद बना हुआ है।

12.20 बजे
कांग्रेस की पैनी नजर
चौथी तरफ कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि सरकार को समर्थन जारी रहेगा। दिल्ली आलाकमान को प्रदेश अध्यक्ष देंगे सारी ताजा जानकारी। तमाम राजनीतिक घटनाक्रम पर पार्टी की पैनी नजर है। कांग्रेस का मानना है कि सही समय पर सही फैसला लिया जाएगा। पर कांग्रेस बगैर आलाकमान यानी मैडम की इजाजत के बगैर कोई निर्णय नहीं लेगी।

 

 

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