DA Image
30 मार्च, 2020|3:47|IST

अगली स्टोरी

जलियांवाला बाग की यादगार

चार दिन बाद यानी 13 अप्रैल को बैसाखी का पर्व है। वैशाख महीने के इस पहले दिन को पंजाब में गेहूं जैसी फसलों के पकने की खुशी में काफी उल्लास के साथ मनाया जाता है। इसी दिन गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना भी की थी। लेकिन इसी दिन एक ऐसी घटना भी हुई थी, जो हमारे देश के इतिहास और खासकर हमारी आजादी की लड़ाई में काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। तुम ने शायद अपनी किताबों में जलियांवाला बाग हत्याकांड के बारे में पढ़ा हो। यह वही घटना है, जो सन् 1919 में 13 अप्रैल के दिन हुई थी।

हाल में जलियांवाला बाग खबरों में आया, जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने जलियांवाला बाग में हुई घटना पर खेद व्यक्त किया था। यह बाग पंजाब के अमृतसर शहर में पवित्र स्वर्ण मंदिर के पास है। 1919 में यह चारों तरफ मकानों से घिरी एक खाली जमीन थी, जिसमें 13 अप्रैल की शाम एक पब्लिक मीटिंग आयोजित की गई थी। हजारों की तादाद में बच्चे, बूढ़े, आदमी और औरतें यहां जमा थे कि तभी अंग्रेजी हुकूमत के अफसर जनरल डायर अपने सिपाहियों के साथ यहां आ गया और बिना किसी चेतावनी के उसने लोगों पर गोलियां चलाने का हुक्म दे डाला। इस जगह से निकलने का सिर्फ एक रास्ता था और वह भी काफी संकरा, लेकिन उस तरफ अंग्रेज सिपाही मौजूद थे। गोलियों से बचने के लिए लोगों में भगदड़ मच गई और कइयों ने बचने के लिए वहां स्थित एक कुएं में कूदना सही समझा। लेकिन इतने सारे लोग कुएं में कूदे कि वे दम घुटने से ही मर गए। करीब दो हजार लोग इस दिन शहीद हुए और हजारों घायल हुए। इस दुखद घटना की याद को सहेजने के लिए चंदा इकट्ठा करके इस जमीन के मालिकों से करीब 5 लाख 65 हजार रुपए में इसे खरीदा गया था।

आज यहां पर शहीदी स्मारक है, एक अमर ज्योति भी है, जो हर समय जलती रहती है। यहां की दीवारों पर उस दिन लगी गोलियों के निशान भी देखे जा सकते हैं। वह शहीदी कुआं भी है, जिसमें लोगों ने छलांग लगाई थी। एक शहीदी चित्रशाला है, जिसमें उस दिन की घटना के साथ हमारे स्वाधीनता संग्राम के बारे में जानकारी देते चित्र प्रदर्शित हैं। रोजाना बड़ी संख्या में लोग यहां आते हैं और उन निहत्थे बेकसूर लोगों को नमन करते हैं, जो अंग्रेजों के हाथों जान गंवा बैठे। कभी अमृतसर जाना हो तो इस जगह को देखना भूल मत जाना।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:जलियांवाला बाग की यादगार