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आओ किला फतह करें

आओ किला फतह करें

किलों के इतिहास में कहानियां छिपी हैं और कविताएं भी। आप किलों की खूबसूरती के भी दीवाने हो सकते हैं और इसके शिल्प के भी। उंगली थाम अतीत में ले जाने वाले वाले राजस्थान के बाहर के कुछ प्रमुख किलों पर एक रिपोर्ट।

आगरा का किला

आगरा के किले को लाल किला भी कहा जाता है, जो विश्व प्रसिद्ध ताजमहल से लगभग ढाई किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भारत के मुगल सम्राट अकबर, जहांगीर, शाहजहां और औरंगजेब यहां रहा करते थे। वे यहीं से पूरे देश पर राज करते थे। इन कारणों से इसे देश का सबसे महत्त्वपूर्ण किला भी माना जाता है। ‘दिल्ली सल्तनत’ के आखिरी शासकों में से एक सुल्तान सिकन्दर लोधी ने भी आगरा से ही देश पर राज किया और इसे देश की दूसरी राजधानी बनाया। बाद में मुगलों ने इस किले पर कब्जा कर लिया। इस किले में खास महल, मुसम्मन बुर्ज, शाही बुर्ज, रंग महल, शाहजहां महल, शीश महल, जहांगीरी महल, मीना बाजार, मोती मस्जिद, स्वर्ण मंडप, दीवान-ए-आम  आदि तो खास हैं ही, यहां से विश्वप्रसिद्ध ताजमहल भी खूबसूरत दिखता है।

झांसी का किला

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर उत्तर प्रदेश के झांसी में हैं यह किला। झांसी बुंदेलखंड इलाके का सबसे अहम जिला है। खैर, झांसी के किले की बात हो और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का जिक्र न हो, यह कैसे हो सकता है! अंग्रेजों से लोहा लेने वाली लक्ष्मीबाई की बहादुरी से प्रभावित होकर लेखिका-कवयित्री सुभद्राकुमारी चौहान ने ‘झांसी की रानी’ नामक कविता में उनके पूरे व्यक्तित्व का अद्भुत चित्रण किया था। 1857 में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों की गुलामी करना अस्वीकार कर दिया था और अंग्रेजों को ललकारा था। 1857 में झांसी के राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद तत्कालीन गर्वनर जनरल द्वारा झांसी पर नियंत्रण कर लिया गया था, जिसका लक्ष्मीबाई ने विरोध किया था। अंतत: लक्ष्मीबाई को युद्ध करना पड़ा। इस लड़ाई में सेना का नेतृत्व कर रही रानी लक्ष्मीबाई बहादुरी के साथ लड़ते हुए अपनी मिट्टी के लिए शहीद हो गईं। किले में 10 दरवाजे हैं और यह प्राचीन वैभव और पराक्रम का जीता-जागता दस्तावेज है।

फतेहपुर सीकरी का किला

यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल फतेहपुर सीकरी का किला आगरा से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कहते हैं कि मुगल बादशाह बाबर ने राणा सांगा को सीकरी नामक स्थान पर हराया था। उसके बाद अकबर ने इसे अपनी राजधानी बनाने का निर्णय लिया और अपनी निगरानी में फतेहपुर सीकरी का निर्माण कराया। पानी के अभाव में सिर्फ 15 सालों में ही उन्होंने राजधानी को पुन: आगरा में स्थानांतरित कर दिया। नि:संतान अकबर को यहीं संत शेख सलीम चिश्ती से प्रार्थना करने पर संतान सुख प्राप्त हुआ। फतेहपुर सीकरी हिन्दू और मुस्लिम वास्तुशिल्प का अद्भुत नमूना है।

इलाहाबाद किला

इलाहाबाद में गंगा-यमुना-सरस्वती के पवित्र संगम के पास ही स्थित है मुगल सम्राट अकबर द्वारा बनवाया गया यह किला। कहते हैं कि उत्तर प्रदेश और बिहार से अफगान विद्रोह को खत्म करने के लिए अकबर ने इसका निर्माण करवाया था। हालांकि इतिहासकारों में इस बात को लेकर मतभेद भी हैं। किले का जहांगीर महल यहां के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। आजकल किले के बड़े हिस्से में भारतीय सेना के जवान रहते हैं। इजाजत लेकर किले के इतिहास से मिल सकते हैं।

ग्वालियर का किला

ग्वालियर के गोपांचल पर्वत पर स्थित इस किले को हम ग्वालियर के किले के रूप में जानते हैं। लाल बलुआ पत्थर से बने इस किले की खूबसूरती दूर से ही पर्यटकों का मन मोह लेती है। ऊंची चढ़ाई वाली पतली सड़क की सहायता से यहां पहुंचने में थोड़ी थकान तो होती है, लेकिन किले की खूबसूरती को देख कर तन-मन दोनों की थकान पल भर में खत्म हो जाती है। किले के भीतरी हिस्से में शानदार मध्यकालीन स्थापत्य कला से रूबरू हुआ जा सकता है। 15वीं शताब्दी में निर्मित गूजरी महल की खूबसूरती भी इस बात को स्थापित करती है, जो राजा मानसिंह और गूजरी रानी मृगनयनी के गहन प्रेम का प्रतीक है। 

चंदेरी दुर्ग

मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले में स्थित है चंदेरी दुर्ग। आज चंदेरी भले ही कशीदाकारी के काम व साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन इस किले की कहानी इतिहास में तनिक भी रुचि लेने वालों के मन में बसी रहती है।

आप अपने देश के किलों से मुलाकात करना चाहते हैं तो थोड़ी तैयारी कर लें। सबसे पहले तो उस किले के बारे में थोड़ी जानकारी हासिल कर लें, जिससे मुलाकात करने जा रहे हैं। इससे आप उस किले को अच्छी तरह समझ पाएंगे और आपका आनन्द बढ़ जाएगा। अगर एएसआई के स्टाफ वहां मिलते हैं तो उनसे जानकारी ले लें, अन्यता जो भी स्थानीय व्यवस्था है, उसका लाभ उठाएं। अगर जंगल में या किसी दुर्गम स्थल में स्थित किले में जा रहे हैं तो जाने-आने और किलों को देखने में लगने वाले समय का अंदाजा लगा लें, ताकि समय रहते आप वहां से लौट पाएं। और हां, खाने-पीने का सामान साथ में रख लें।
डॉ. बी. आर. मणि, संयुक्त महानिदेशक, एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण)

कैसे पहुंचें

आगरा

हवाई मार्ग: यहां घरेलू हवाई अड्डा है, जो शहर के केंद्र से 7 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां देश के सभी प्रमुख शहरों से फ्लाइट्स आती हैं। दिल्ली से यहां के लिए रोजाना फ्लाइट है।

रेल मार्ग: आगरा देश के प्रमुख शहरों से रेल मार्ग से जुड़ा है। यहां का मुख्य स्टेशन आगरा कैंट है। दिल्ली से आगरा के लिए प्रतिदिन कई ट्रेनें चलती हैं। यहां शाही रेलगाड़ी ‘पैलेस ऑन व्हील’ से भी पहुंचा जा सकता है।

सड़क मार्ग: दिल्ली से आगरा सड़क मार्ग के जरिए बड़ी सुगमता से पहुंचा जा सकता है। दिल्ली और आगरा के बीच बेहतरीन नेशनल हाइवे है, जिसकी बदौलत करीब 205 किलोमीटर की दूरी लग्जरी टैक्सी, लग्जरी बसों द्वारा केवल चार घंटे में तय की जा सकती है। दिल्ली से आगरा के लिए बहुत अच्छी बस सर्विस है।

ग्वालियर

हवाई मार्ग: यहां घरेलू हवाई अड्डा है, जो शहर के केंद्र से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां दिल्ली, आगरा, इंदौर, भोपाल, मुंबई, जयपुर और वाराणसी से फ्लाइट्स हैं। विदेशी पयर्टकों के लिए निकटतम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दिल्ली है, जो 321 किलोमीटर की दूरी पर है।

रेल मार्ग: ग्वालियर रेल मार्ग से देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है। यह दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-चेन्नई मार्ग पर स्थित एक बड़ा स्टेशन है। दिल्ली से हर दिन ग्वालियर के लिए कई ट्रेनें हैं, जो करीब साढ़े चार घंटे में यहां पहुंचा देती हैं।

सड़क मार्ग: ग्वालियर के लिए दिल्ली (321 किलोमीटर), इंदौर  (486 किमी), आगरा (118 किमी) और जयपुर (350 किमी) से बहुत अच्छी बस सर्विस है। टूरिस्ट एयरकंडीशंड बसों का किराया 3 से 4 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से होता है।

झांसी

हवाई मार्ग: झांसी से निकटतम हवाई अड्डा ग्वालियर है, जो 103 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

रेल मार्ग: झांसी देश के प्रमुख शहरों से रेलमार्ग से जुड़ा हुआ है। यह दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर स्थित एक महत्त्वपूर्ण जंक्शन है।

सड़क मार्ग: राज्य परिवहन की बसें झांसी को उसके आसपास के शहरों से जोड़ती हैं। झांसी के लिए ग्वालियर (103 किमी) और खजुराहो (175 किमी) से नियमित बस सेवा है।

चंदेरी

हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा भोपाल और ग्वालियर हैं। यहां से भोपाल एयरपोर्ट 258 किमी और ग्वालियर एयरपोर्ट 259 किमी है।

रेल मार्ग: चंदेरी शहर ललितपुर से 38 किमी की दूरी पर है और ललितपुर झांसी से 90 किमी की दूरी पर। झांसी, दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर स्थित एक महत्त्वपूर्ण जंक्शन है और देश के प्रमुख शहरों से रेलमार्ग से जुड़ा है।

सड़क मार्ग: चंदेरी के लिए ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, झांसी, शिवपुरी, सांची, ललितपुर और विदिशा से नियमित बस सेवा उपलब्ध है।

जो दुर्ग हुए बुजुर्ग

कभी मुसम्मन बुर्ज से देखिए ताजमहल

आपने ताजमहल तो कई बार देखा होगा, लेकिन क्या उस नजर से कभी ताजमहल की खूबसूरती को निहारा है, जिस नजर से अपनी बेगम की याद में इसका निर्माण करवाने वाले बादशाह शाहजहां इसे निहारा करते थे। अगर नहीं, तो एक बार यहां के लाल किले के मुसम्मन बुर्ज से ताजमहल को निहार कर देखिए। यहां से ताजमहल इतना खूबसूरत दिखता है कि आप उसे निहारते रह जाएंगे जनाब। तभी तो अपने जीवन के अंतिम सात वर्षो में शाहजहां इसी बुर्ज से ताजमहल को निहारते थे, जब उनके बेटे औरंगजेब ने उन्हें यहां कैद कर दिया था। कहते हैं शाहजहां की मृत्यु इस बुर्ज से ताजमहल को देखते हुए ही हुई थी।

सैनिक की पत्नियों ने भी जान दे दी थी

चंदेरी दुर्ग की खातिर यहां के राजपूत सैनिकों की पत्नियां सामूहिक रूप से विशाल चिता में कूद गई थीं। बाबर ने तत्कालीन राजपूत राजा से यह किला मांगा तो राजा ने किला देने से इंकार कर दिया था। बाबर को किसी भी तरह यह किला चाहिए था तो किले को जीतने का निर्णय ले लिया और प्राकृतिक रूप से बेहद सुरक्षित इस किले तक पहुंचने के लिए एक ही रात में पहाड़ को काट कर रास्ता बना लिया था। जब सारे राजपूत सैनिकों को मार कर मुगल सेना ने किले पर कब्जा कर लिया तो सैनिकों की विधवाओं ने सामूहिक रूप से खुद को एक विशाल चिता के हवाले कर दिया था।

रानी ने अंग्रेजों से लिया था लोहा

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की चर्चा के बगैर झांसी के किले की बात भला कैसे पूरी हो सकती है। 1857 में अपने पति राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद अंग्रेजों से लोहा लेने वाली लक्ष्मीबाई को लोग ‘झांसी की रानी’ के रूप में जानते हैं। तभी तो साहित्यकार सुभद्राकुमारी चौहान ने ‘झांसी की रानी’ कविता लिखी थी और इस किले और खासकर झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीर गाथा लिखी थी। 10 दरवाजों वाला यह किला आज भी प्राचीन वैभव और पराक्रम का जीता-जागता दस्तावेज है।  पर्यटकों के लिए किले में अनेक आकर्षण हैं।

कुछ प्रमुख वेबसाइट्स
www.up-tourism.com
www.mptourism.com
hptdc.nic.in
www.punjabtourism.in

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