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28 अक्तूबर, 2020|8:10|IST

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मोबाइल रिपेयरिंग, कम पूंजी में बड़ी कमाई का जरिया

मोबाइल रिपेयरिंग, कम पूंजी में बड़ी कमाई का जरिया

कुछ लोग पढ़ने में अच्छे होते हैं और उसी के बल पर अपनी मंजिल हासिल कर लेते हैं तो कुछ पढ़ने में भले ही औसत दर्जे के हों, पर हाथ के हुनर के बल पर सफलता की सीढ़ियां चढ़ते चले जाते हैं। मोबाइल रिपेयरिंग एक ऐसा ही हुनर है, जिसे सीख कर चाहें तो कहीं नौकरी कर लें या फिर स्वरोजगार शुरू कर दूसरों को नौकरी दें। कैसे, बता रहे हैं पं. प्रेम बरेलवी

जन संचार का माध्यम होने के कारण करीब सत्तर से अस्सी प्रतिशत लोगों की जरूरत बन चुका मोबाइल अब रोजगार के नए-नए अवसरों का जरिया भी बन गया है। मोबाइल रिपेयरिंग भी इन्हीं में से एक है। आप मोबाइल रिपेयरिंग को सफल स्वरोजगार के रूप में अपना सकते हैं। वैसे तो आप इस काम को मोबाइल मैकेनिक रख कर भी कर सकते हैं, मगर सफल स्वरोजगार के लिए आप स्वयं प्रशिक्षण लें तो बेहतर होगा।
दिल्ली और बड़े महानगरों में ही नहीं, अब देश के हर शहर और कस्बे में मोबाइल मैकेनिक की जरूरत है। साथ ही मोबाइल रिपेयरिंग के इंस्टीटय़ूट भी देश में काफी संख्या में मौजूद हैं, जहां से कोर्स करके आप आसानी से इस क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं। 1994 से मोबाइल रिपेयरिंग का प्रशिक्षण दे रहे आईटीआई ट्रेनिंग सेंटर के संस्थापक चिन्मय गोयल कहते हैं कि मोबाइल से संबंधित यूं तो बहुत से काम हैं, जिनमें आप करियर बना सकते हैं, लेकिन मोबाइल रिपेयरिंग एक ऐसा काम है, जो कम से कम खर्चे पर स्वरोजगार स्थापित करने में मदद तो करता ही है, साथ ही अच्छी कमाई का भी जरिया बन जाता है। इस स्वरोजगार को कैसे अंजाम दिया जा सकता है, यहां इस बारे में विस्तार से बताया जा रहा है-

कोर्स
मोबाइल मैकेनिक या इंजीनियर बनने के लिए आपको सबसे पहले किसी अच्छे संस्थान से कोर्स करना पड़ेगा। इसके लिए आप सरकारी या प्राइवेट संस्थान का चुनाव कर सकते हैं। वैसे तो मोबाइल रिपेयरिंग में अभी तक कोई डिग्री कोर्स नहीं है, लेकिन आप किसी भी संस्थान से डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स आसानी से कर सकते हैं। सरकारी संस्थानों में अभी मोबाइल रिपेयरिंग के प्रशिक्षण की कमी है। अधिकतर संस्थानों में सर्टिफिकेट कोर्स की अवधि एक से तीन या छह महीने और डिप्लोमा कोर्स की अवधि एक वर्ष है।

प्रवेश और योग्यता
मोबाइल रिपेयरिंग का कोर्स करने के लिए आठवीं या दसवीं पास इच्छुक अभ्यर्थी कोर्स कर सकते हैं। इसके अलावा आपको हिन्दी पढ़नी-लिखनी आनी चाहिए। अंग्रेजी का ज्ञान है तो बेहतर होगा। कुछ संस्थानों में बारहवीं पास अभ्यर्थियों को ही प्रवेश दिया जाता है। कोर्स करने के लिए आप अपनी इच्छानुसार किसी भी संस्थान में जाकर दाखिला ले सकते हैं।

फीस
अलग-अलग संस्थानों में फीस अलग-अलग है, लेकिन एक एवरेज फीस दस से पंद्रह हजार है, जिसमें कुछ संस्थान टूल किट भी उपलब्ध कराते हैं। सरकारी संस्थानों में फीस कम है। स्वरोजगार समिति में एक हजार रुपए फीस है। यह सरकारी संस्थान है, जो एक महीने का सर्टिफिकेट कोर्स कराता है। इसके लिए आपको कम से कम दो साल का दिल्ली का रेजिडेंस प्रूफ देना पड़ेगा।

स्वरोजगार के लिए जरूरी तथ्य

स्वरोजगार स्थापित करने से पहले आपको कुछ जरूरी बातें ध्यान में रखनी चाहिए-

यह काफी बारीकी वाला काम है, इसलिए बहुत ध्यान से काम करने की जरूरत होती है।
पार्ट्स की जानकारी के साथ आपको कंप्यूटर की जितनी अच्छी नॉलेज होगी, आप उतने ही सफल मैकेनिक होंगे।
मार्केट में आने वाले हर मोबाइल की जानकारी के साथ उसकी कार्य प्रणाली की जानकारी से जितने अपडेट होंगे, आप उतनी ही तरक्की कर सकेंगे।
जगह का चुनाव जितनी समझदारी से करेंगे, उतना बेहतर होगा।
ग्राहकों का विश्वास जीतने के लिए मुनासिब दामों में बेहतर सर्विस भी आपके व्यवसाय की तरक्की का कारण बनेगी।
यह विद्युत संबंधी काम है, अत: आपको हमेशा सचेत रहना होगा।

फायदे

यदि आप अच्छे से किसी बात को कैच करते हैं और जल्द ही किसी चीज को या पुर्जो की बारीकियों को समझ जाते हैं तो-

यह काम कम समय की मेहनत में बेहतर परिणाम देने वाला साबित हो सकता है।
आप बड़ी शॉप खोल कर मोबाइल रिपेयर पार्ट्स भी बेच सकते हैं।
खाली समय में पुराने खराब मोबाइल ठीक करके बेचने में भी अच्छी कमाई कर सकते हैं।
मोबाइल्स की मैन्युफैक्चरिंग कर सकते हैं। एजेंसी लेकर मोबाइल का व्यापार कर सकते हैं।
मोबाइल एजेंसियों से कॉन्टेक्ट करके उनकी बिक्री के साथ खुद की वारंटी पर उन्हें बाजार में उतार सकते हैं।

फैक्ट फाइल
संस्थान

स्वरोजगार समिति, झंडेवालान, नई दिल्ली
जीआरएएस एकेडमी, (देश भर में अनेक सेंटर) वेबसाइटwww.grasacademy.in
इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन, दिल्ली, वेबसाइट: www.iite.co.in
एनएसआईसी, ओखला इंडस्ट्रियल एरिया, नई दिल्ली वेबसाइट- www.nsic.co.in
आईटीआई़, करोल बाग, नई दिल्ली वेबसाइट- www.itidelhi.com
नेशनल इंस्टीटय़ूट फॉर इंटरप्रियोनरशिप एंड स्मॉल बिजनेस डेवलपमेंट, सेक्टर-62, नोएडा
वेबसाइट
- www.niesbud.nic.in
इंदिरा गांधी प्रशिक्षण संस्थान
वेबसाइट
: www.indiragandhimobileinstitute.com
एआईसीएस इंस्टीटय़ूट, रोहिणी, नई दिल्ली वेबसाइट- www.aicsdelhi.com
अल्फा इंस्टीटय़ूट, कुरला (वेस्ट), मुंबई वेबसाइट- www.alfainstitute.net

जगह का चुनाव
मोबाइल रिपेयरिंग का काम शुरू करने के लिए सबसे पहली प्राथमिकता है जगह का चुनाव, क्योंकि जितनी भीड़भाड़ वाली जगह यानी घनी मार्केट होगी, आपका काम उतना ही अच्छा चलेगा। इसके साथ ही लाइट की व्यवस्था और ग्राहकों के आने-जाने में आसानी वाली जगह का ही चुनाव करना चाहिए।

आवश्यक औजार
मोबाइल रिपेयरिंग करने के लिए आपको एमएसडी, पेचकस सैट, सोल्डरिंग आयरन, डिजिटल मीटर और कंप्यूटर की जरूरत होगी। यह सामान आपको दिल्ली की गफ्फार मार्केट व लाजपत नगर के अलावा मुंबई, चेन्नई, भोपाल व अन्य कई शहरों में आसानी से उपलब्ध हो जाएगा।

लागत
यह काम शुरू करने के लिए तो आप पच्चीस से तीस हजार रुपए में भी काम चला सकते हैं, लेकिन मीडियम लेवल पर ठीक-ठाक काम करने के लिए आपको पचास हजार से एक लाख तक खर्च करने पड़ सकते हैं। यह लागत जगह के खर्चे को छोड़ कर है।

लोन
मोबाइल रिपेयरिंग का काम शुरू करने के लिए आप लोन भी ले सकते हैं। इसके लिए यदि आपने प्राइवेट कोर्स किया है तो सर्टिफिकेट पर जगह के आधार पर अपने नजदीक के बैंक से संपर्क करें। आप प्रधानमंत्री रोजगार योजना के अंतर्गत भी लोन ले सकते हैं। इसके अलावा यदि आपने सरकारी संस्थान से कोर्स किया है तो भी आप लोन ले सकते हैं। लोन की सीमा 25 हजार से दो लाख तक है। यदि आप दिल्ली सरकार द्वारा संचालित स्वरोजगार समिति से मोबाइल रिपेयरिंग का कोर्स करते हैं तो आप पच्चीस हजार से पांच लाख तक का लोन ले सकते हैं। इसमें आपको 25 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी।

आमदनी
मोबाइल रिपेयरिंग के काम में आप दस से पचास हजार रुपए प्रतिमाह तक कमा सकते हैं। यह आपके काम, जगह के चुनाव और ग्राहकों की तादाद पर निर्भर करेगा।

सक्सेस स्टोरी
अपना काम ही सबसे बेहतर है
मनोज कुमार, मोबाइल मैकेनिक

आपने मोबाइल रिपेयरिंग का क्षेत्र ही क्यों चुना?
इसके पीछे किसी की प्रेरणा या नया काम होना नहीं था, बल्कि इसका कोर्स कम समय में हो रहा था, दूसरा फीस भी अधिक नहीं थी, बस यही सोच लेकर मैंने मोबाइल रिपेयरिंग करने का विचार बना लिया।

रोजगार करने का विचार कैसे आया?
रिपेयरिंग का कोर्स करने के बाद मैंने नौकरी शुरू की। जब मुझे चार-पांच महीने नौकरी करते बीते तो एक दिन मैंने विचार किया कि जितना पैसा मैं अपने मालिक को कमा कर देता हूं, अगर यह पैसा खुद अपने लिए कमाऊं तो कितना बेहतर रहेगा। बस इसी विचार ने मुझे अपना काम करने के लिए प्रेरित किया और मैंने अपना काम स्थापित किया।

कितना पैसा कमा लेते हैं?
शुरुआत में जब मैंने अपना काम शुरू किया, तब तो दस-पंद्रह हजार रुपए महीने तक ही कमा पाता था, लेकिन अब पच्चीस-तीस हजार रुपए तक कमा लेता हूं।

नौकरी करके क्या पाते थे?
नौकरी एक-डेढ़ साल पहले करता था। कुछ खास तो नहीं मिलता था, बस खर्च चल जाता था। नौकरी से रोजी-रोटी तो चल रही थी, लेकिन तरक्की नहीं हो रही थी।

आगे बढ़ने की उम्मीद है?
हां, मैंने हाल ही में नई शॉप खोली है, जिसमें बहुत अच्छा काम चल रहा है। आगे भी अच्छा रहने की उम्मीद है। इसके अलावा मैं इस काम का और भी विस्तार देने की सोच रहा हूं। उम्मीद है कि कुछ ही समय में दो से तीन गुना कमाई कर सकूंगा।

मतलब अपने काम से संतुष्ट हैं?
आगे बढ़ने की इच्छा तो अभी बहुत है, लेकिन नौकरी से ज्यादा संतुष्ट हूं। अपना काम अपना ही होता है।


मोबाइल कभी न खत्म होने वाली जरूरत
एक्सपर्ट व्यू/ सुरेश पाराशर
सेंटर इंचार्ज, स्वरोजगार समिति, झंडेवालान, नई दिल्ली

मोबाइल रिपेयरिंग में करियर कैसा है?
हमारे देश में आज हर आदमी के हाथ में मोबाइल दिखने लगा है। जब मोबाइल है तो खराब भी होगा और खराब होगा तो उसे संभालने के लिए मैकेनिक भी चाहिए। ऐसे में मोबाइल रिपेयरिंग आय का एक अच्छा जरिया बनता जा रहा है, जो आगे बढ़ता ही जाएगा।

स्वरोजगार की दृष्टि से इस क्षेत्र में कितनी संभावनाएं हैं?
स्वरोजगार की दृष्टि से तो मोबाइल रिपेयरिंग का काम बहुत ही अच्छा है। जब कोई मोबाइल मैकेनिक कहीं नौकरी करता है तो एक लिमिट तक ही उसे वेतन मिलेगा, लेकिन जब वह अपना काम करेगा तो अनलिमिटेड कमा सकता है। यही नहीं, इसमें एक फायदा यह है कि कोई भी व्यक्ति जो कम पढ़ा-लिखा यानी केवल आठवीं पास हो, इस काम को कर सकता है। इसके अलावा कम पूंजी लगा कर इस काम को किया जा सकता है।

हर रोज नए-नए और सस्ते मोबाइल मार्केट में आ रहे हैं, ऐसे में रिपेयरिंग का काम तो धीरे-धीरे ठप हो जाएगा?
यह बात सही है कि आज हर रोज बाजार में नए-नए मॉडल और वो भी बहुत सस्ते दामों में उतारे जा रहे हैं। ऐसे में एक रिक्शे वाला भी आसानी से मोबाइल खरीद सकता है। लेकिन अगर वह एक बार एक हजार रुपए खर्च करके मोबाइल खरीदता है और वह खराब हो जाता है तो सौ-दो सौ रुपए लगा कर उसे ठीक भी कराता है, एकदम दूसरा नया सेट नहीं लेता। ऐसे में हर आम आदमी सेट को पहले ठीक ही कराएगा, जब तक कि वह बिल्कुल खराब नहीं हो जाता।

क्या ग्रामीण क्षेत्र में भी मोबाइल रिपेयरिंग का काम चल सकता है?
हां, क्यों नहीं चल सकता। मगर अब भी बहुत से गांव हैं, जहां बिजली है ही नहीं और अगर है तो उसकी आपूर्ति बहुत कम होती है। ऐसे में स्वरोजगार स्थापित करते समय इस बात का ध्यान रखना पड़ेगा कि जहां आप व्यवसाय करने जा रहे हैं, ऐसी कोई दिक्कत तो नहीं है।

एक मोबाइल मैकेनिक और क्या-क्या कर सकता है?
एक मोबाइल मैकेनिक मोबाइल रिपेयरिंग के अलावा नए मोबाइल्स की बिक्री कर सकता है। किसी कंपनी की एजेंसी ले सकता है। रिचार्ज कूपन बेच सकता है। मोबाइल का सामान बेच सकता है। किसी कंपनी का डिस्ट्रिब्यूटर बन सकता है। इसके अतिरिक्त डाउनलोडिंग, फ्लेशिंग, अपलोडिंग, चाइनीज फोन्स की लॉकिंग कर सकता है। कुछ अतिरिक्त पैसा लेकर ग्राहक को अतिरिक्त वारंटी दे सकता है।

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