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भारतीय एथलीट खजाने में अनमोल हैं: अंजू

भारत के खिलाड़ियों की फेहरिस्त काफी लंबी है और सब अपनी धुन और लगन के पक्के हैं। ऐसी ही एक एथलीट हैं केरल की अंजू बॉबी जॉर्ज, जिसने पेरिस में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज जीतकर भारत का नाम ऊंचा किया।

मलयाली गर्ल अंजू बॉबी जॉर्ज का जन्म 19 अप्रैल 1977 में केरल में हुआ। उनके पिता ने उन्हें शुरू से ही स्पोर्ट्स में जाने को प्रेरित किया। उनकी स्कूलिंग सीकेएम कोरुथोड स्कूल से और ग्रेजुएशन विमला कॉलेज से हुई। अंजू ने कालीकट यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट किया। अंजू का विवाह रॉबर्ट बॉबी जॉर्ज से हुआ, जो ट्रिपल जंप में पूर्व राष्ट्रीय चैंपियन हैं और उनके कोच भी हैं।

उनके इस टेलेंट की पहचान स्कूल में ही हो गई थी और वहीं के एक प्रशिक्षक ने अंजू को उनमें मौजूद इस खूबी से परिचय करवाया। फिर तो अंजू अपनी इसी खूबी को निखारने में जुट गईं। हालांकि उन्होंने अपनी शुरुआत हेप्टाथलान के साथ की थी, लेकिन बाद में उन्होंने कूद की प्रतियोगिताओं पर ध्यान देना शुरू किया और 1996 में दिल्ली जूनियर एशियन चैंपियनशिप में लंबी कूद का खिताब जीता। 1999 में अंजू ने बैंगलोर फेडरेशन कप में ट्रिपल जंप में नेशनल रिकॉर्ड बनाया।

विश्व एथलेटिक्स के 28 वर्षो के लंबे इतिहास में भारत अब तक सिर्फ एक ही पदक जीत पाया है और यह पदक लॉन्ग जंपर अंजू बॉबी जॉर्ज ने फ्रांस में 2003 में हुई नौवीं विश्व चैंपियनशिप में दिलाया था। उन्होंने इसमें 6.70 मीटर की छलांग लगाकर कांस्य पदक जीता था और नये इतिहास का निर्माण किया। लेकिन उसके बाद कोई भी भारतीय एथलीट फिर विजयी मंच पर नहीं पहुंच पाया। इसके बाद वर्ष 2004 में एथेंस ओलंपिक में अंजू ने बेहतरीन प्रदर्शन दिखाते हुए 6.83 मीटर की लॉन्ग जंप लगाई थी। उन्होंने 2005 में आईएएफ वर्ल्ड एथलेटिक्स फाइनल में रजत पदक जीता। इस प्रदर्शन का लोहा तो खुद अंजू भी मानती हैं।

भारत सरकार द्वारा खेल के प्रख्यात व्यक्तियों को दिए जाने वाले प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से भी अंजू ने अपनी झोली को भर लिया तथा विश्व एथलेटिक मीट में उनकी सफलता के बाद उन्हें खेल के सर्वोच्च पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न से भी नवाजा गया है। साल 2004 में भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मश्री से भी अंजू को सम्मानित किया गया। विश्व चैंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता अंजू बॉबी जॉर्ज की नजर अगले वर्ष होने वाले लंदन ओलंपिक पर लगी हुई है और इसी लक्ष्य को साधने में वो जी-जान से जुटी हैं। वे कहती हैं कि इस प्रतियोगिता में भी सफल होकर ही आगे ही योजना बनाएंगी।

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