DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

विश्व पुस्तक मेला 2010

विश्व पुस्तक मेला 2010

पुस्तक मेले में डॉ. नीलेश के लिए मेडिकल साइंस की एक से बढ़ कर एक विदेशी किताबें होंगी, साहित्य के रसिक राधेश्याम त्रिपाठी के लिए देशी-विदेशी साहित्यिक किताबें और नन्हीं शिवांगी जैन के लिए तो किताबों के अलावा एक पूरा का पूरा हॉल ही होगा, जिसमें वह तरह-तरह की गतिविधियों में हिस्सा ले सकेगी। हर रोज कई-कई घंटे हॉकी की प्रेक्टिस करने वाले किशोर हितेश त्यागी तो इस मेले में एक नहीं, बल्कि कई दिन बिता सकते हैं, क्योंकि इस मेले का थीम ही राजधानी में अक्टूबर में होने जा रहे कॉमनवेल्थ गेम्स को बनाया गया है। और हां, पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू के प्रशंसक ही नहीं, उन्हें जानने की उत्सुकता रखने वाले हर उम्र के पाठकों के लिए भी यहां एक विशेष हॉल उनके नाम पर समर्पित किया जा रहा है। जी हां, ये सारी बातें हम कल से शुरू हो रहे विश्व पुस्तक मेले के बारे में कर रहे हैं। प्रगति मैदान के एक दजर्न से अधिक हॉल और खुले में टेंट में लाखों पुस्तकों का प्रदर्शन किया जाएगा।

नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) द्वारा एक वर्ष के अंतराल पर आयोजित किए जाने वाले इस 19वें मेले को इस वर्ष कॉमनवेल्थ गेम्स को समर्पित किया गया है यानी कॉमनवेल्थ गेम्स के नाम एक पूरा पवेलियन होगा, जिसमें खेल से जुड़ी दुनियाभर की किताबें होंगी। इसके लिए  कैटलॉग भी बनाया गया है, ताकि बाद में भी उन पुस्तकों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सके और उसका लाभ उठाया जा सके।

देश के पहले प्रधानमंत्री और बच्चों के चाचा पं. नेहरू पर अलग से पुस्तकें प्रदर्शित करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत नेहरू पर लिखी दुनियाभर की तमाम किताबों को शामिल किया जा रहा है। इतना ही नहीं, मेले में चिल्ड्रन पवेलियन भी होगा, जिसमें अनेक एनजीओज द्वारा बच्चों की रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने वाली गतिविधियां होंगी।

एनबीटी की निदेशक नुज़हत हसन ने बताया कि इस बार कई विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।  विशेष पवेलियन में विशेष पुस्तकों से रू-ब-रू हुआ जा सकेगा। वहीं युवा और बच्चों की विभिन्न गतिविधियों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। कई एनजीओज और स्कूलों के सहयोग से सुबह के समय बच्चों के लिए तरह-तरह के कार्यक्रम होंगे। वहीं अपराह्न् 3 से 5 बजे के बीच युवाओं के लिए कार्यक्रम होंगे। इस दौरान खेल की मशहूर हस्तियां आएंगी और युवाओं को प्रोत्साहित करेंगी। उन्होंने बताया कि प्रकाशकों के लिए पुस्तक संबंधी कार्यक्रमों के आयोजन के लिए तीन मंच तैयार किए गए हैं। ये तीनों मंच भूतल में होंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग शामिल हो सकें। उन्होंने बताया कि 30 जनवरी को केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल इस प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। पिछली बार से अधिक स्टॉल वाले मेले के लिए इस बार हॉल नंबर 1 से लेकर 12ए तक और 14 व 18 के अलावा काफी स्पेस हॉल के बाहर भी तैयार की गई है। मेले में लगभग 90 प्रतिशत अंग्रेजी की किताबें होंगी। हिंदी और भारतीय भाषाओं के प्रकाशक हॉल नम्बर 12ए में ग्राहकों का स्वागत करेंगे। अनेक देशों की भारत स्थित शाखाओं ने तो मेले में अपने लिए जगह सुरक्षित कराई ही है, 15 अन्य देशों ने मेले में पाठकों के लिए पुस्तकों को प्रदर्शित करने का निर्णय लिया है।

दुनियाभर के प्रकाशक सैकड़ों नई किताबें तो लेकर आ ही रहे हैं, काफी संख्या में नई किताबों का विमोचन भी होगा। किताब घर प्रकाशन के प्रमुख सत्यव्रत ने बताया कि वे कम से कम 35 ऐसी किताबें लेकर आ रहे हैं, जिनका विमोचन मेले के दौरान होना है। इनमें साहित्यिक पुस्तकें तो होंगी ही, ज्ञान-विज्ञान से संबंधित किताबें भी कम नहीं होंगी। प्रभात प्रकाशन और ओशियन बुक्स के निदेशक डॉ. पीयूष कुमार भी हिन्दी और अंग्रेजी में सौ से अधिक नई पुस्तकें ला रहे हैं, जिनमें हिंदी पुस्तकों की अधिकता होगी। जान-माने प्रकाशक रॉली बुक्स और डायमंड बुक्स भी कई नई किताबें ला रहे हैं।

मेले में जाने से पहले
विश्व पुस्तक मेला 2010
पार्किग की सुविधा इंडिया गेट पर की गई है, जहां से प्रगति मैदान तक के लिए विशेष बस सेवा उपलब्ध होगी। भैरव मार्ग पर भी पार्किग की थोड़ी व्यवस्था है।

यूनिफॉर्म में अपने शिक्षक के साथ आने वाले बच्चों को मेले में नि:शुल्क प्रवेश की इजाजत होगी।

टिकट का चार्ज बड़ों के लिए 20 रुपए और बच्चों के लिए 10 रुपए रखा गया है, जो आईटीपीओ का न्यूनतम रेट है।

दिल्ली विश्व पुस्तक मेला यानी दुनिया भर के नामी-गिरामी प्रकाशकों की पुस्तकों का मेला। इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स के थीम पर आधारित यह मेला खेल की हजारों किताबों से भी पाठकों को परिचित कराएगा और देश के पहले प्रधानमंत्री पं.जवाहर लाल नेहरू पर आधारित दुनियाभर की किताबों से भी।

मेले में जाने से पहले
पुस्तक मेले में जाने से पहले अगर आप कुछ सावधानियां बरतें तो पुस्तकों का चयन करना भी आसान हो जाएगा और आप मेले का भरपूर लाभ भी उठा पाएंगे।
1. स्कूल के शिक्षक या छात्र अपना परिचय पत्र अपने साथ जरूर ले जाएं, ताकि कुछ अतिरिक्त कमीशन का लाभ उठा पाएं।
2. मेले की डायरेक्टरी आईटीपीओ के दफ्तर से पहले ही प्राप्त कर लें, ताकि मेले के दौरान भटकने से बच जाएं।
3. मेले में जाएं तो सबसे पहले अपनी रुचि के अनुरूप प्रकाशकों के कैटलॉग संग्रह कर कहीं बैठ जाएं और उनमें पसंद की पुस्तकों का चयन कर लें, फिर खरीदने जाएं।
4. मेले में क्रेडिट कार्ड चलेगा तो लेकिन  कैश रखना भी जरूरी होगा। खासकर हिंदी और भारतीय भाषाओं की किताबों की खरीदारी के समय आपको नकद राशि की जरूरत पड़ेगी, इसलिए क्रेडिट कार्ड के साथ नकदी भी साथ ले जाएं।
5. पुस्तक मेले में वीकएंड के दिनों में काफी भीड़ होती है। ऐसे में भीड़ से बचने के लिए संभव हो सके तो वीकएंड में जाने से बचें।
6. अगर आप घूमने के उद्देश्य से जा रहे हैं तो ठीक है, लेकिन अगर पुस्तकें खरीदने जा रहे हैं तो अकेले जाना ज्यादा सुविधाजनक होगा। बच्चों के लिए पुस्तकें लेने जा रहे हैं तो उन्हें अपने साथ जरूर ले जाएं, ताकि वे अपनी पसंद की पुस्तकें चुन सकें।
7. इसके अलावा आप प्रकाशकों के स्टॉल पर रेट को लेकर मोल-भाव जरूर करें, क्योंकि कई प्रशासक 5 से 15 प्रतिशत छूट ऑफर करते हैं, लेकिन मोलभाव करने पर वे 30 प्रतिशत से ज्यादा की भी छूट दे सकते हैं।
8. राजधानी में इन दिनों कई इलाकों में राष्ट्रमंडल खेलों के लिए चल रहे निर्माणाधीन कार्यो की वजह से ट्रैफिक जाम लगना आम बात है। ऐसे में जाम से बचने के लिए संभव हो सके तो सार्वजनिक परिवहन के साधनों जैसे मेट्रो, बसों का इस्तेमाल करें।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:विश्व पुस्तक मेला 2010