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भीषण संघर्ष करके मादाओं को हासिल करते हैं गोह

भीषण संघर्ष करके मादाओं को हासिल करते हैं गोह

सरीसृप वर्ग के जीव गोह में जंगल के राजा बाघ की तरह अपना इलाका निर्धारित करने तथा अधिक से अधिक मादाओं को अपने नियंत्रण क्षेत्र में रखने की प्रवृति पाई जाती है।

मादाओं पर आधिपत्य ज़माने के लिए बाघों की ही तरह नर गोहों के बीच भी ज़बरदस्त जंग होती है। जंग में जो जीत हासिल करता है, उसी नर गोह की इलाके में हुकूमत चलती है। पन्ना टाइगर रिज़र्व के सहायक संचालक एमपी ताम्रकार ने बताया कि गोह को मैनईटर लिज़ार्ड भी कहा जाता है।

करीब ढाई से तीन फीट लंबा यह वन्य जीव बारिश के मौसम में ज्यादा नज़र आता है। बरसात का मौसम शुरू होते ही नर गोह मादा की तरफ आकर्षित होता है। इस दौरान नर गोह के इलाके में रहने वाली मादा गोहों की तरफ दूसरे नर गोह के आने पर दोनों नरों के बीच भीषण जंग होती है।

ताम्रकर ने बताया कि गोह के पंजे अत्यधिक शक्तिशाली होते है तथा पेड़ या दीवार में चिपक जाने पर इसे निकालना मुश्किल होता है। इस मांसाहारी जीव की जीभ काफी लंबी और सांप की तरह दो भागों में बंटी होती है।

पुराने जमाने में सैनिक गोह का उपयोग ऊचे स्थानों व किलों पर चढ़ने के लिए करते थे। उन्होंने बताया कि पन्ना टाइगर रिजर्व के जंगल में गोह प्रचुर संख्या में हैं। बारिश के इस मौसम में इनके बीच होने वाली जंग के दुर्लभ नजारे यदाकदा दिखाई दे जाते है।

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