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पांच सौ साल पुराना है टूथब्रश का इतिहास

पांच सौ साल पुराना है टूथब्रश का इतिहास

अपने दांतों को चमकाने के लिए आज हम जिस ब्रश का प्रयोग करते हैं उसका इतिहास दरअसल सैकड़ों साल पुराना है। पहले इंसान नीम या बबूल की टहनी को ही दांतों की सफाई के लिए इस्तेमाल किया करता था, लेकिन आज से 512 साल पहले 26 जून 1498 को चीन में एक व्यक्ति ने एक ऐसा ब्रश तैयार किया जिससे दांतों की सफाई दातुन के मुकाबले ज्यादा अच्छी तरह की जा सकती थी।
   
छब्बीस जून को अविष्कार होने के कारण ही दुनियाभर में 26 जून को टूथब्रश डे मनाया जाता है। शुरुआती टूथब्रश का हैंडल हड्डी या बांस की लकड़ी का बना होता था और दांतों को रगड़ने के लिए उसमें जानवरों के बाल लगे होते थे। धीरे-धीरे टूथब्रश का इतिहास बदलता गया और इसे अविष्कारकों ने अपनी अपनी तरह से आधुनिक रूप देने की कोशिश की।
   
चीन में टूथब्रश के अविष्कार के बाद 1780 में इंग्लैंड में विलियम एडिस नाम के व्यक्ति ने थोड़ा और आधुनिक टूथब्रश बनाया, लेकिन पेटेंट के मामले में अमेरिका बाज़ी मार ले गया। सात नवम्बर 1857 को अमेरिका के एचएन वासवर्थ ने टूथब्रश का पेंटेंट हासिल किया जिसका पेटेंट नंबर 18653 था।
   
आज हम जिस टूथब्रश का इस्तेमाल करते हैं, उसका बड़े पैमाने पर उत्पादन 1938 में शुरू हुआ। दंत चिकित्सकों का कहना है कि आज बड़े पैमाने पर टूथब्रश का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन ज्यादातर लोग इसका सही तरह इस्तेमाल करना नहीं जानते।

दंत रोग विशेषज्ञ नवीन भाटिया के अनुसार दांतों को स्वच्छ रखने के लिए सही ढंग से ब्रश करना चाहिए और इसकी अधिकतम अवधि तीन मिनट तक ही होनी चाहिए। डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादा देर तक दांतों को घिसने से इनके रक्षा कवच इनैमल और मसूड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।
   
भाटिया के अनुसार सुबह के समय और रात को सोने से पहले दांतों की ब्रश से सफाई करनी चाहिए। ब्रश प्रत्येक दांत तक पहुंचना चाहिए ताकि कहीं भी भोजन का कोई भी अंश फंसा न रह जाए।
   
उन्होंने कहा कि दांतों में भोजन के अंश फंसे रह जाने से दुर्गंध पैदा होती है और इससे इंसान की मुस्कान भी खुशनुमा नहीं रह पाती। कई बार यह हीन भावना का कारण बन जाता है।
   
दंत रोग विशेषज्ञ मीनाक्षी का कहना है कि दांतों का रंग कई तरह का होता है इसलिए रंग देखकर ही दांतों के स्वास्थ्य के बारे में अनुमान नहीं लगा लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि दांतों के कीड़े से बचने के लिए ज़रूरी है कि ब्रश नियमित तौर पर और सही ढंग से दिन में दो बार किया जाए।
   
मीनाक्षी के अनुसार आजकल बच्चों के दांतों की सफाई पर भी ध्यान देने की ज़रूरत है क्योंकि चॉकलेट जैसे पदार्थों के दांतों पर जमे रहने से दांतों में कीड़ा लग सकता है। उन्होंने कहा कि दांतों का ब्रश न तो ज्यादा सख्त होना चाहिए और न ही अत्यधिक मुलायम। दांतों की चमक बरकरार रखने के लिए बढ़िया गुणवत्ता वाले ब्रश का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

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