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चिलचिलाती धूप में निकलें तैयारी के साथ

चिलचिलाती धूप में निकलें तैयारी के साथ

गर्मी की धूप त्वचा के लिए बेहद खतरनाक साबित होती है। इस धूप में मौजूद यूवीए, यूवीबी और यूवीसी किरणें त्वचा को बेजान और झुर्रियों वाला बनाने के साथ-साथ उसे जला भी सकती हैं। सनबर्न की यह समस्या आजकल काफी बढ़ रही है, जिससे बचाव के उपाय बता रही हैं ममता अग्रवाल

शारीरिक स्वास्थ्य के लिए सूर्य की किरणें बेहद महत्वपूर्ण हैं, वहीं अधिक देर तक इनके शरीर पर पड़ने से नुकसान भी हो सकते हैं। सनबर्न, सूर्य के हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन के अत्यधिक संपर्क में आने के कारण त्वचा पर होने वाली प्रतिक्रिया है। इनके लगातार संपर्क में आने से त्वचा रूखी, बेजान, झुर्रियों वाली तो हो ही जाती है, अगर बार-बार सनबर्न हो तो भविष्य में यह त्वचा की गंभीर बीमारी का कारण भी बन सकता है। त्वचा को सन डैमेज से बचा कर काफी हद तक ऐसी गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है।

सूर्य से तीन प्रकार की अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन निकलती है- यूवीए, यूवीबी और यूवीसी। 290 से 320 एनएम की अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन, जिसे मिड यूवी या सनबर्न स्पेक्ट्रम कहा जाता है, त्वचा में सनबर्न के लिए जिम्मेदार है। जब त्वचा अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन के इस स्पेक्ट्रम के अत्यधिक संपर्क में आती है तो सनबर्न होता है। इसका प्रभाव त्वचा में लाली, सूजन और दर्द के रूप में दिखाई देता है। गंभीर रूप से सनबर्न होने की स्थिति में त्वचा में छाले पड़ जाते हैं और वह छिल जाती है। यह सेकेंड डिग्री बर्न रिएक्शन है। ज्यादातर सनबर्न अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन के संपर्क में आने के तीन से पांच घंटे बाद होता है और 12 से 24 घंटे बाद यह सबसे गंभीर रूप में होता है।

रिस्क फैक्टर श्रेणी
कुछ खास कारण और खास स्थितियां सनबर्न के खतरे को बढ़ा देती हैं। जब त्वचा सूर्य की किरणों के संपर्क में आती है तो मेलानिन नाम का पिगमेंट बनता है। यह हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन को सोख कर त्वचा को इसके दुष्प्रभावों से बचाता है, जिस कारण त्वचा का रंग गहरा हो जाता है। जिन लोगों में यह पिगमेंट कम होता है, उनकी त्वचा सनबर्न से ज्यादा प्रभावित होती है। ऊंचे इलाकों, सूर्य की किरणों को परावर्तित करने की क्षमता वाली चीजों जैसे पानी, बर्फ, रेत और कंक्रीट आदि के पास काम करने वालों या 10 बजे से चार बजे की तेज धूप में फील्ड वर्क करने वाले लोगों को सनबर्न की समस्या ज्यादा प्रभावित करती है।

कैसे करें बचाव
सनबर्न से बचाव का सबसे अच्छा तरीका 10 से चार बजे की धूप से स्वयं को बचाना है, लेकिन यदि यह संभव नहीं तो इससे बचने के अन्य उपायों पर ध्यान देना चाहिए। जब भी धूप में बाहर निकलें, खुद को पूरी तरह कवर करके ही निकलें। इसके लिए छाता, चौड़ी किनारी वाली हैट, कॉटन ग्लव्स, स्कार्फ आदि का प्रयोग करें। पूरी बांह के ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनें।

सनस्क्रीन का प्रयोग
सनबर्न से त्वचा को बचाने में सनस्क्रीन का प्रयोग बेहद फायदेमंद है। इसके लिए सही सनस्क्रीन का चुनाव करना जरूरी है। सनस्क्रीन खरीदते समय पैक पर लिखे एसपीएफ यानी सन प्रोटेक्शन फैक्टर पर अवश्य ध्यान दें। हाई एसपीएफ वाली सनस्क्रीन त्वचा को अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन से होने वाले दुष्प्रभावों से ज्यादा बचाती है। सनस्क्रीन जितने अधिक एसपीएफ वाली होगी, वह त्वचा को सनबर्न से बचाने में उतनी ही मददगार होगी।

यदि आपकी त्वचा सामान्य है तो एसपीएफ 30 वाली सनस्क्रीन और यदि त्वचा हल्की रंगत की है तो एसपीएफ 40 वाली सनस्क्रीन का प्रयोग करें।
घर से बाहर निकलने से 20-30 मिनट पहले सनस्क्रीन लगा लें।

आंखों का भी करें बचाव
शरीर के अन्य हिस्सों की तरह हमारी आंखों पर भी अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन का गहरा दुष्प्रभाव पड़ता है, इसलिए इनका भी बचाव बेहद जरूरी है। आंखों को खतरनाक किरणों से बचाने के लिए सनग्लासेज का प्रयोग जरूरी है, क्योंकि यह न केवल आंखों को, बल्कि उसके आसपास की त्वचा को भी हानिकारक किरणों से बचाते हैं। सनग्लासेज के प्रयोग में भी सावधानी बरतें और अच्छी गुणवत्ता वाले सनग्लासेज का ही प्रयोग करें।

फोटो डर्मेटाइटिस
यह समस्या त्वचा के असामान्य रूप से सूर्य की किरणों के संपर्क में आने से उत्पन्न होती है। इसके लक्षण हर व्यक्ति की त्वचा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में इसके लक्षण खुजली, छालों या सूजन के रूप में दिखाई देते हैं। ऐसी स्थिति में सही मात्रा में मेडिकेटेड क्रीम का इस्तेमाल बेहद प्रभावकारी होता है, इसलिए तेज धूप के दिनों में खासतौर पर त्वचा के खुले हुए हिस्सों को अच्छी तरह ढक कर रखें।

इन बातों का रखें ध्यान
प्रभावित स्थान पर विटामिन ई युक्त कोई क्रीम लगाएं।
जिन लोगों की त्वचा तैलीय है, उन्हें और अधिक सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि ऐसी त्वचा में पिंपल्स और रैशेज होने का खतरा होता है।
समुद्र तट या स्विमिंग पूल के पानी से बाहर आने के बाद तुरंत सनस्क्रीन अवश्य लगाएं।
यूवी किरणों से आंखों की पूरी तरह सुरक्षा करने में सक्षम सनग्लासेज का प्रयोग करें।

घर पर करें प्राथमिक उपचार
सनबर्न का प्राथमिक उपचार घर से ही शुरु कर सकते हैं। इसके लिए ठंडे पानी से नहाना या दिन में बार-बार सनबर्न से प्रभावित स्थान पर ठंडी, गीली पट्टियां लगाना जलन और दर्द को कम करने में काफी सहायक होता है। कैलेमाइन लोशन और एलोवेरा युक्त मॉइश्चराइजिंग क्रीम दिन में दो से तीन बार लगाने पर भी त्वचा को सनबर्न से हुए नुकसान से काफी राहत मिलती है। हल्के दर्द की स्थिति में दर्द निवारक दवा भी ले सकते हैं।
(मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट(डिपार्टमेंट ऑफ डर्मेटोलॉजी) डॉं संजीव ग्रोवर, मूलचंद मेडसिटी के कंसल्टेंट (डर्मेटोलॉजिस्ट) डॉं. गुलशन पानेसर और मूलचंद सेंटर फॉर कॉस्मेटिक सर्जरी के कंसल्टेंट डॉं सजल हलदर से बातचीत पर आधारित)

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