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6 मई, 2021|7:04|IST

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ग्लूकोमा: सुंदर आंखों पर न लगा दे ग्रहण

ग्लूकोमा: सुंदर आंखों पर न लगा दे ग्रहण

ग्लूकोमा यानी काला मोतिया आंखों की गंभीर बीमारी है, जो कई बार आंखों की रोशनी भी छीन लेती है। अपनी आंखों को सेहतमंद कैसे रखें, बता रही हैं अमृता प्रकाश

कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल पर काम करते हुए हमारी आंखों पर बहुत दबाव पड़ता है, पर हम इसे गंभीरता से नहीं लेते। आंखों से संबंधित परेशानियों की अनदेखी और लापरवाही धीरे-धीरे ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी का रूप ले लेती है, जिससे आंखों की रोशनी चली जाती है।

क्या है ग्लूकोमा
ग्लूकोमा आंखों पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव की वजह से होता है। यह ऐसी बीमारी है, जिसमें आंख के अंदर के पानी का दबाव धीरे-धीरे बढ़ जाता है। इससे देखने में परेशानी होने लगती है या दिखना भी बंद हो सकता है। समय से जांच और इलाज कराने से अंधेपन से बचा जा सकता है।

क्यों होता है यह
आंखों के लेंस के आगे की जगह को इंटीरियर चेम्बर कहते हैं। इसमें स्थित पानी को एकुअस ह्यूमर कहते हैं। एकुअस ह्यूमर लेंस और कोर्निया को ऑक्सीजन और खाना पहुंचाता है। अगर किसी कारण से एकुअस ह्यूमर का बहाव जाम हो जाता है तो आंखों का दबाव बढ़ जाता है, जो ऑप्टिक नर्व पर दबाव डालता है। अलग-अलग लोगों में यह दबाव विभिन्न स्तर तक असर डालता है, यानी किसी को कम प्रेशर पर भी अधिक असर होता है और कोई अधिक प्रेशर में भी बिना परेशानी के रह सकता है। ऑप्टिक नर्व पर दबाव पड़ने से देखने में दिक्कत होती है या फिर अंधापन भी हो सकता है।

किसे कहते हैं ऑप्टिक नर्व
ऑप्टिक नर्व एक तरह की नस होती है, जो आंख को दिमाग से जोड़ती है। यह लाखों नसों को जोड़ कर बनी होती है। सही तरह से देखने के लिए ऑप्टिक नर्व का स्वस्थ रहना आवश्यक होता है।

अन्य कारण
कुछ लोगों में बगैर प्रेशर बढ़े भी ग्लूकोमा हो सकता है। इसे नॉर्मल टेंशन ग्लूकोमा कहते हैं। यह बहुत कम लोगों में होता है।

किसको हो सकता है
40 से अधिक उम्र के लोगों को हो सकता है यह रोग।
जिनके परिवार में किसी को पहले से ग्लूकोमा हो।

क्या करना चाहिए
जिनको यह बीमारी होने की आशंका हो, वे समय से आंखों की जांच कराएं।
अगर ग्लूकोमा के चिह्न् प्रकट होने लगे हैं तो डॉक्टर से परामर्श के बाद दवा लें।

कैसे होती है जांच
आंखों का इलाज विशेषज्ञ से करवाना चाहिए। इसमें आंखों में दवा देकर पुतली को बड़ा किया जाता है। फिर आंख के सामने और पीछे के चेंबर को देखा जाता है। जांच से आगे के चेंबर का प्रेशर नापा जाता है। यह भी देखा जाता है कि क्या कोर्निया पतला हो गया है, ऑप्टिक नर्व पर कोई प्रेशर का असर हुआ है या नहीं?

यूं करें देखभाल
ग्लूकोमा को रोकने का कोई प्रमाणित तरीका नहीं है। यदि आंख में बढ़ते दबाव का पता चल जाए और आरंभ में ही इसका उपचार किया जाए तो इससे दृष्टि की हानि को कम किया जा सकता है और अंधेपन से बचा जा सकता है।

40 वर्ष की आयु के बाद कम से कम पांच वर्ष में एक बार अपनी आंखों की जांच कराएं और ग्लूकोमा के लिए परीक्षण कराएं। यदि आपकी आंखों पर दबाव बढ़ने लगे तो आपको और भी जल्दी-जल्दी आंखों का परीक्षण कराना चाहिए।

आंखों पर दबाव न पड़ने दें।
तनाव का सामना करने के तरीके तलाशें।
नियमित रूप से आंखों का व्यायाम करें।
कैफीन का सीमित प्रयोग करें।
अधिक से अधिक फलों और सब्जियों को अपने आहार में शामिल करें।
चोट से बचने या खेलकूद के दौरान अपनी आंखों की सुरक्षा के लिए जरूरी उपकरण जरूर पहनें।
मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कोलेस्टरॉल और हृदय रोग को नियंत्रित रखें।
ग्लूकोमा के उपचार के लिए प्रचारित की जाने वाले हर्बल दवाओं का प्रयोग न करें।

इलाज से नहीं बढ़ेगी बीमारी
साकेत सिटी हॉस्पिटल की डॉं. प्रतिभा शरण बताती हैं कि ग्लूकोमा का इलाज नहीं किया जा सकता और इससे हुए नुकसान को ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन उपचार से आंखों पर दबाव कम किया जा सकता है। उपचार से भविष्य में दृष्टि हानि की आशंका को भी कम किया जा सकता है। ग्लूकोमा के आरंभिक उपचार के लिए आंखों में दवा डालना सबसे सामान्य उपचार है। अन्य उपचारों में लेजर उपचार या शल्यक्रिया कराना भी शामिल हो सकता है। वैसे ग्लूकोमा का इलाज जीवनभर कराना होता है और नियमित रूप से डॉंक्टर के संपर्क में रहना होता है।

क्या हैं लक्षण
हो सकता है कि दृष्टिहीनता होने तक ग्लूकोमा का कोई लक्षण प्रकट न हो, परंतु अन्य लक्षणों द्वारा पता लगाया जा सकता है जैसे :
धुंधला नजर आना
प्रकाश के इर्द-गिर्द प्रभामंडल दिखना
पार्श्व दृष्टि खो देना 
सीमित वृत्तीय दृष्टि
लाल आंखें 
आंखों में बहुत तेज दर्द होना
उल्टी आना

क्या आप जानते हैं
मोतियाबिंद को रोकने के लिए कोई निश्चित उपाय नहीं है। लगातार निगरानी और नियमित जांच से प्रारंभिक अवस्था में ही बीमारी का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
मोतियाबिंद से अपने जीवन को सीमित न होने दें। इसके इलाज के बाद आप पहले की तरह जीवन जी सकते हैं।
अपनी दवाएं बिल्कुल समय पर लें। सही ड्रॉप, सही समय पर और सही तरीके से आंखों में डालें।
रोजाना दवा लेने के लिए जागने, खाने और सोने के आसपास के समय का निर्धारण करें।
खाली पेट सुबह अत्यधिक पानी पीना बंद कर दें। इससे आंखों पर दवाब बढ़ जाता है, जिससे परेशानी बढ़ सकती है।

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