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8 मई, 2021|9:17|IST

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बड़े काम का है बीटा-कैरोटीन

बड़े काम का है बीटा-कैरोटीन

आज हम अपने दैनिक आहार में लाल, नारंगी, पीले या हरे रंग की तरह-तरह की फल-सब्जियां जरूर शामिल करते हैं। इनमें मौजूद कई तरह के विटामिन्स, मिनरल्स हमारे आहार को पौष्टिक ही नहीं बनाते, हमारे स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हैं। इनके अलावा इन रंग-बिरंगे फल-सब्जियों में अहम हैं 24 तरह के कैरोटीनॉइड्स या प्रोविटामिन्स, जिन्हें विटामिन ए का उत्पादक और पौधों के रंगों का मूल स्त्रोत माना जाता है।

आंखों की बीमारियों और कैंसर जैसे रोगों के उपचार में ये कैरोटीनॉइड्स फायदेमंद हैं। लेकिन इसके लिए खान-पान में ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि इन कैरोटीनॉइड्स की कमी से ही नहीं, अधिकता होने से भी कई प्रकार की परेशानियां होने लगती हैं।

बीटा कैरोटीन
हमारे लिए उपयोगी कैरोटीनॉड्स में बीटा-कैरोटीन बेहद जरूरी है। बीटा-कैरोटीन पौधों और फलों (विशेषकर गाजर) में पाया जाने वाला एक लाल, नारंगी और पीला पिग्मेंट या रंग है। देखा जाए तो गहरे लाल, नारंगी और पीले रंग वाले फल और सब्जियों से हमें बीटा-कैरोटीन प्राप्त होता है। जैसे गाजर, पालक, टमाटर, सलाद पत्ता, शकरकंदी, ब्रोकली, सीताफल, खरबूजा, पपीता, आम, मटर, गोभी, लाल-पीली शिमला मिर्च, खुबानी आदि।

इनमें मौजूद फाइटोकैमिकल्स (पौधों से प्राप्त रासायनिक पदार्थ) श्लेष्मा संश्लेषक झिल्ली (म्यूकोस मैम्बरैन) का गठन करके खाद्य पदाथरे में रंग उत्पादित करता है। यह खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से मौजूद वसा में घुलनशील सक्रिय यौगिक है। वैसे तो बीटा-कैरोटीन अपने आप में कोई पोषक तत्व नहीं है, लेकिन यह रेटिनॉल में बदल कर हमारे शरीर में विटामिन ए की आपूर्ति करता है, जो कई प्रकार के आंखों के रोग, कैंसर, हृदय संबंधी असाध्य रोगों के निवारण में सक्षम है।

स्त्रोत और खुराक
वैज्ञानिकों ने भी संतुलित मात्रा में बीटा-कैरोटीन के सेवन को शरीर की जरूरत के हिसाब से ही विटामिन ए की आपूर्ति का सुरक्षित स्त्रोत माना है। इसकी कमी से जहां नेत्र रोग, कैंसर, हृदय संबंधी बीमारियों की आशंका रहती है, वही इसकी अधिकता भी सिगरेट पीने वाले व्यक्तियों के लिए खतरनाक साबित होती है। वैज्ञानिकों ने एक स्वस्थ व्यक्ति को रोजाना 3-6 मिलीग्राम बीटा-कैरोटीन के सेवन की सिफारिश की है, जिसकी आपूर्ति के लिए सप्लीमेंट्स लेने के बजाय लाल, नारंगी और पीले फल-सब्जियों को आहार में शामिल करना चाहिए। दिन भर में 5 बार फल-सब्जियां लेनी चाहिए।

है बहुत फायदेमंद
बीटा-कैरोटीन एक एंटी-ऑक्सीडेंट और इम्यून सिस्टम बूस्टर के रूप में काम करता है। अनुसंधानों से यह साबित हो चुका है कि बीटा-कैरोटीन हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले मुक्त कणों (फ्री रेडिकल्स) से हमारी रक्षा करता है और हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। पर्याप्त मात्रा में इसके सेवन से कोरोनरी धमनी रोग, उच्च रक्तचाप और हार्ट अटैक का जोखिम कम हो सकता है।

विटामिन ए का उत्पादक होने के कारण बीटा-कैरोटीन त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। त्वचा में सूखापन, सोरायसिस और विटिलगो जैसी बीमारियों के उपचार मे सहायक है। यह सनबर्न के खतरे को कम करने में भी मदद करता है। विटामिन सी और ई युक्त खाद्य पदार्थों के साथ मिलकर कैंसर की रोकथाम में अहम भूमिका निभाता है। उम्र बढ़ने के साथ नेत्र स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सावधानियां
डॉक्टर की सलाह पर ही बीटा-कैरोटीन की खुराक लेनी चाहिए। खासतौर पर सिगरेट पीने वालों को बीटा-कैरोटीन की अधिक खुराक लेने से बचना चाहिए।

अधिक है नुकसानदेह
अनुसंधानों से साबित हो गया है कि जरूरत से ज्यादा बीटा-कैरोटीन का सेवन नुकसानदेह साबित होता है। इससे कैरोटीनीमिया होने की आशंका रहती है, जिसमें हमारे शरीर की त्वचा पीली हो जाती है। इनके सेवन से शरीर में विटामिन ई का स्तर कम हो जाता है, जिसका असर खून की कमी के रूप में दिखता है।

(डाइट क्लीनिक की फाउंडर और वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ डॉ. शालिनी सिंघल से बातचीत के आधार पर)

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  • Web Title: beta-carotene uses and side effects