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विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष: हरी-भरी रहे धरा...

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष: हरी-भरी रहे धरा...

विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) पर विशेष
कल विश्व पर्यावरण दिवस है। इस दिन पूरे विश्व में पृथ्वी पर हरियाली के संरक्षण के मुद्दों पर विचार किया जाता है। इसीलिए आज हम तुम्हें पृथ्वी पर बढ़ते बोझ, उसे हरा-भरा रखने के तरीके और रीसाइकलिंग के बारे में बता रहे हैं...

हमारी धरती पर पिछले कुछ सालों में भूकंप, बाढ़, सूनामी जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। प्रकृति की इन आपदाओं में जान-माल का खूब नुकसान होता है। दरअसल, हमारी धरती के ईको-सिस्टम में आए बदलावों और तेजी से बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग के कारण ही ये सब हो रहा है। वैज्ञानिकों ने इन आपदाओं के लिए हमारे प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध इस्तेमाल को जिम्मेदार ठहराया है। उनकी मानें तो आज हमारी धरती अपने भार से कहीं अधिक भार वहन कर रही है। अगर यही हाल रहा तो 2030 तक हमें रहने के लिए दूसरे प्लेनेट की जरूरत होगी।

कब शुरू हुआ
इस दिन की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) ने 16 जून 1972 को स्टॉकहोम में की थी। 5 जून 1973 को पहली बार विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया, जिसमें हुए संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर विचार किया गया। 1974 के बाद से विश्व पर्यावरण दिवस का सम्मेलन अलग-अलग देशों में आयोजित किया जाने लगा। भारत में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 19 नवंबर 1986 में लागू किया गया। यूएनईपी हर साल पर्यावरण संरक्षण के अभियान को प्रभावशाली बनाने के लिए विशेष विषय (थीम) और नारा चुनता है। मेजबान देश(होस्ट कंट्री) में विभिन्न देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेते हैं और पर्यावरण के मुद्दों पर बातचीत और काम होता है।

क्या करते हैं इस दिन
5 जून को पूरी दुनिया में पर्यावरण से जुड़ी अनेक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। पर्यावरण सुरक्षा के उपायों को लागू करने के लिए हर उम्र के लोगों को प्रोत्साहित किया जाता है। पेड़-पौधे लगाना, साफ-सफाई अभियान, रीसाइकलिंग, सौर ऊर्जा, बायो गैस, बायो खाद, सीएनजी वाले वाहनों का इस्तेमाल, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग  जैसी तकनीक अपनाने पर बल दिया जाता है। सड़क रैलियों, नुक्कड़ नाटकों या बैनरों से ही नहीं, एसएमएस, फेसबुक, ट्विटर, ईमेल के जरिये लोगों को जागरूक किया जाता है। बच्चों के लिए पेंटिंग, वाद-विवाद, निबंध-लेखन जैसी राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। और जो इनमें शामिल नहीं हो पाते, वो घर बैठे ही यूएनईपी की साइट पर जाकर या खुद से यह प्रॉमिस करते हैं कि भविष्य में वे कम से कम अपने घर और आसपास के पर्यावरण को स्वस्थ बनाने का प्रयास करेंगे।

इटली में होगा सम्मेलन
इस साल संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) और संयुक्त राष्ट्र महासभा के सहयोग से इटली में एक सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। ‘सेवन बिलियन ड्रीम्स। वन प्लेनेट। कंज्यूम विद केयर’ इस साल की थीम है। दुनियाभर के लोगों को प्राकृतिक संसाधनों के रख-रखाव और इस्तेमाल की दर को कंट्रोल करने के लिए जागरूक किया जाएगा, ताकि वे स्वस्थ पर्यावरण के साथ पृथ्वी के विकास के सपने को साकार कर सकें।

ये करना है तुम्हें
अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखो। सड़क पर कूड़ा मत फेंको और न ही कूड़े में आग लगाओ। कूड़ा रीसाइकल के लिए भेजो। क्या तुम्हें पता है, आज बड़े-बड़े प्लांट्स कूड़े से बिजली और फर्टिलाइजर बना रहे हैं।
प्लास्टिक, पेपर, ई-कचरे के लिए बने अलग-अलग कूड़ेदान में कूड़ा डालो ताकि वह आसानी से रीसाइकल के लिए जा सके।
पापा से कहो कि वे निजी वाहन की बजाय कार-पूलिंग, गाडियों, बस या ट्रेन का उपयोग करें।
कम दूरी के लिए साइकिल चलाना पर्यावरण और सेहत के लिहाज से बेहतर है।
पानी बचाने के लिए पापा से कहो कि वो घर में लो-फ्लशिंग सिस्टम लगवाएं, जिससे शौचालय में पानी कम खर्च हो। शॉवर से नहाने की बजाय बाल्टी से नहाओ।
ब्रश करते समय पानी का नल बंद रखो। हाथ धोने में भी पानी धीरे चलाओ।
गमलों में लगे पौधों को बॉल्टी-मग्गे से पानी दो।
नल में कोई भी लीकेज हो तो उसे प्लंबर अंकल से तुरंत ठीक करवाओ, ताकि पानी टपकने से बरबाद न हो।
नदी, तालाब जैसे जल स्त्रोतों के पास कूड़ा मत डालो। यह कूड़ा नदी में जाकर पानी को गंदा करता है।
घर की छत पर या बाहर आंगन में टब रखकर बारिश का पानी जमा कर सकते हो, जिसे फिल्टर करके इस्तेमाल करो।

दिल्ली को बचाओ!
जानकार कहते हैं कि दिल्ली में प्रदूषण का स्तर काफी तेजी से बढ़ रहा है। सबसे अधिक प्रदूषण हवा में है। सड़क पर उड़ती धूल, उद्योग, वाहनों का धुआं इतना अधिक है कि अब सुबह के समय ताजी हवा में भी प्रदूषण पाया गया है। यहां बड़ी संख्या में निकलने वाले कूड़े को रीसाइकिल करना भी काफी मुश्किल भरा काम है। इसके अलावा ध्वनि और जल प्रदूषण भी चरम पर है। यहां की बदतर आबोहवा के कारण ही दिल्ली को 2014 के एशियन गेम्स के होस्ट बनने की दौड़ से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था।

इन्हें बनाओ आदत...
पढ़ने की टेबल खिड़की के सामने रखो ताकि दिन में नेचुरल लाइट से पढ़ सको। 
जब भी कमरे से बाहर जाओ तो पंखा और लाइट बंद कर दो।
ब्रश करते वक्त, खाना खाने के बाद या वॉश बेसिन-सिंक का नल बिना काम के खुला मत छोड़ कर रखो।
अपने दोस्तों को पेपर वाले बधाई-कार्ड की जगह ईमेल कार्ड भेजो।
जब तुम बाजार जाते हो तो अपने साथ कपड़े की एक थैली जरूर ले जाओ। प्लास्टिक बैग की खपत पर रोक लगेगी।
पौधे लगाओ, क्योंकि ये पौधे ही हमारे पर्यावरण को बचा सकते हैं।

छात्रों ने ठाना है कि...
हिमालय में बसे क्षेत्रों में निकल रही गंदगी को रीसाइकल करने के लिए वहां के छात्र सामने आए हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के 9 स्कूलों के बच्चों ने मिलकर यह ठाना है कि वे इस गंदगी का प्रयोग कर विभिन्न तरह के मॉडल बनाएंगे। यह पूरा प्रयास ग्रीन हिल्स अल्मोड़ा नामक
संगठन ने आरंभ किया, जिसमें 1300 मेंबर हैं। यह संगठन छात्रों की मदद करता है।    

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