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सूचना तकनीक क्षेत्र में झारखंडी कंपनियों की ऊंची छलांग

झारखंड की आइटी कंपनियों को 100 करोड़ के सॉफ्टवेयर निर्यात के ऑर्डर मिले हैं। यह आंकड़ा चालू वित्तीय वर्ष के पहले दो महीनों के हैं। इन कंपनियों की ओर से पहली तिमाही की अनुमानित कारोबारी रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। यह रिपोर्ट सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया के रांची केंद्र को दी गई है। 2014-15 के पूरे वित्तीय वर्ष में प्रदेश से केवल 10 करोड़ के सॉफ्टवेयर निर्यात हुए। इस हिसाब से प्रदेश को बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है।

झारखंड की आइटी कंपनियों को निर्यात के ज्यादातर ऑर्डर अमेरिका और खाड़ी देशों से मिल रहे हैं। इनमें संयुक्त राज्य अमेरिका और बहरीन प्रमुख हैं। यहां के सॉफ्टवेयर उत्पादों की सस्ती कीमत विदेशी खरीदारों को आकर्षित कर रही है। अधिकतर डिमांड जीआईएस(ज्योग्राफिक इनफॉर्मेशन सिस्टम) सॉफ्टवेयर, फायर प्रोटेक्शन सिस्टम डिजाइन सॉफ्टेवयर और सेमीकंडक्टर डिजाइन सॉफ्टवेयर की है।

टाटा मोटर्स की सब्सिडियरी सॉफ्टवेयर कंपनी टाटा टेक्नोलॉजी झारखंड से ऑटोमोबाइल डिजाइन वाले सॉफ्टवेयर का निर्यात करती है। कोरिया की देवू मोटर्स समेत दुनिया की कई बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियां इनकी ग्राहक हैं। निर्यात वाले ज्यदातार सॉफ्टवेयर उत्पाद मल्टीनेशनल और नेशनल कंपनियों की झारखंड स्थित शाखाएं तैयार कर रही हैं।

ये हैं प्रदेश के प्रमुख सॉफ्टवेयर निर्यातक
लुईस फाइनांस एंड लीजिंग
मुख्यालय: बेंगलुरु
रांची केंद्र: नामकुम
उत्पाद: फाइनांशियल और जीआईएस सॉफ्टवेयर

टाटा टेक्नोलॉजी
टाटा मोटर्स की सब्सिडियरी
झारखंड केंद्र: जमशेदपुर
उत्पाद: ऑटोमोबाइल और सैप डिजाइन सॉफ्टवेयर

नाथ कॉरपोरेशन
मुख्यालय: संयुक्त राज्य अमेरिका
रांची केंद्र : अशोक नगर
उत्पाद: सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट

ह्वाइट टाइगर
मुख्यालय: लॉस एजेंलिस
रांची केंद्र: सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क, नामकुम
उत्पाद:फायर प्रोटेक्शन सिस्टम डिजाइन सॉफ्टवेयर

आरएसजी सॉफ्टवेयर
मुख्यालय: मुंबई
रांची केंद्र: सॉफ्टवेयर टेक्वोलॉजी पार्क, नामकुम
उत्पाद: सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट

एक्सपर्ट व्यू
झारखंड से सॉफ्टवेयर के निर्यात में हो रही वृद्धि का सबसे बड़ा कारण यहां के उत्पादों में लगने वाले कुशल और कम लागत वाले मानव संसाधन हैं। इस कारण यहां के सॉफ्टवेयर प्रॉडक्ट दूसरे देशों और भारत के आईटी हब माने जाने वाले शहरों बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे और नोएडा की तुलना में काफी सस्ते पड़े हैं।

दूसरा, विदेशों में नए सॉफ्टवेयर डेवलपर को तैयार करने में काफी खर्च आता है। कंपनियां ट्रेनिंग पर होने वाला यह खर्च नहीं उठाना चाहती है। इसके अलावा एक बड़ा फैक्टर टाइम जोन  डिफरेंस का है। अमेरिका और यूरोपीय देशों का प्रबंधन शाम में दफ्तर छोड़ते वक्त किसी सॉफ्टवेयर में आई तकनीकी खामी या समस्या के बारे में ऑर्डर प्लेस करता है। उस समय यहां सुबह होती है। जब प्रबंधन के लोग अगले दिन दफ्तर आते हैं, तो उन्हें यहां से सॉफ्टवेयर की समस्याएं दूर कर भेजी जा चुकी होती हैं।
तहसीन कमर, डायरेक्टर, ह्वाइट टाइगर

क्या है फायदा
झारखंड के नौजवानों को अंतर्राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर बाजार की जरूरतों को समझने और उनसे जुड़ने में मदद मिल सकती है
बढ़ता सॉफ्टवेयर निर्यात प्रदेश में आईटी कंपनियों के विकास की नई संभावना को जन्म दे सकता है
स्थानीय स्तर पर ट्रेनिंग और इंटर्नशिप के नए अवसर मिलेंगे। इससे झारखंड में पढ़कर बड़ी कंपनियों में जॉब का मौका मिलेगा

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