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टाटा स्टील में 21 से प्रभावी हो सकती है ईएसएस!

देश में निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी इस्पात उत्पादक कंपनियों में से एक टाटा स्टील जल्द ही मेगा ईएसएस (अर्ली सेपरेशन स्कीम) के तहत अपने मैन पावर में कटौती करने की तैयारी कर रही है। इस तरह की घोषणा के बाद से ही कर्मचारियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। संभवत: 21 जून से नई स्कीम प्रभावी हो सकती है।

टाटा स्टील में आए नए स्कीम के तहत ड्यूटी से नदारद रहने वाले व मेडिकल अनफिट व नॉन टेक्निकल कर्मचारियों को पहले मेगा ईएसएस का लाभ दिया जाएगा। इस तरह की सुगबुगाहट से ही कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। हर कर्मचारी बस यही दुआ कर रहा है कि मेगा ईएसएस सूची में उनका नाम न हो। यही वजह है कि ड्यूटी से नदारद रहने वाले कर्मचारी अब यूनियन कार्यालय तक की दौड़ लगा रहे हैं।

किसी कर्मचारी पर नहीं होगा दबाव : यूनियन
हालांकि, टाटा वर्कर्स यूनियन यह पहले ही कह चुकी है कि वे किसी भी कर्मचारियों पर मेगा ईएसएस स्कीम लेने के लिए दबाव नहीं बनने देंगे। बीते शनिवार को कंपनी प्रबंधन की ओर से मेगा ईएसएस स्कीम का प्रजेंटेशन यूनियन के टॉप थ्री को दिखाया जा चुका है।

179 कर्मचारी है निशाने पर
बिना पूर्व अनुमति के छुट्टी पर रहने व एक माह में तय दिन से कम उपस्थिति पर पिछले दिनों कंपनी प्रबंधन ने 179 कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। सूत्रों की मानें तो कंपनी प्रबंधन पहले ऐसे ही कर्मचारियों को मेगा ईएसएस का लाभ देगी जो ड्यूटी से अकारण ही नदारद रहते हैं। मेगा ईएसएस स्कीम के तहत दस वर्ष से अधिक समय तक नौकरी कर चुके कर्मचारी इसका लाभ ले सकते हैं।

हम बनाते हैं महंगी स्टील : एमडी
टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक टीवी नरेंद्रन कई फोरम पर यह मान चुके हैं कि वे अन्य कंपनियों की अपेक्षा महंगी स्टील बनाते हैं। इसका एक मुख्य वजह टाटा स्टील में अधिक कर्मचारियों का होना है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ती है। एमडी ने इस पर पोस्को और जिंदल जैसी कंपनियों का भी उदाहरण दे चुके हैं, जो कम मैनपावर में ज्यादा स्टील का उत्पादन करती हैं। इसलिए अंतराष्ट्रीय प्रतियोगी बाजार में बने रहने के लिए उन्होंने मैनपावर में कटौती करने की बात कही थी।

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