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रेलवे की ठेकेदारी में सबसे पहले हुई आनंद राव की हत्या

लौहनगरी में रेलवे की ठेकेदारी के लिए पहले हत्याएं होती रही हैं। इसकी शुरुआत आनंद राव की हत्या से हुई थी। रेलवे इलाके में पहले दो बड़े गिरोह हुआ करते थे। एक गिरोह आनंद राव का था तो दूसरा गिरोह प्रभाकर राव का।

आनंद राव का जुड़ाव हिदायत खान से गिरोह से होने के चलते प्रभाकर राव ने गरमनाला गिरोह से नाता जोड़ लिया था। पूर्व विधायक विजय सिंह सोय की भी हत्या रेलवे की ठेकेदारी को लेकर हुई थी और इस हत्या में रांची के डॉन अनिल शर्मा का नाम आया था।

आनंद राव की ऐसे हुई थी हत्या
सूत्रों के अनुसार हिदायत खान की हत्या के लिए गरमनाला गिरोह के दशरथ सिंह ने गोरखपुर के बड़े गैंगस्टर गामा से संपर्क किया गया। इसके लिए मारुति वैन और हथियार भी दिए गए थे। गामा ने हिदायत खान की हत्या से इनकार कर दिया। दशरथ सिंह ने उस सुपारी को आनंद राव की हत्या में परिवर्तित किया।

आनंद राव की दुश्मनी गरमनाला गिरोह के प्रभाकर राव से थी। उस समय रेलवे का ठेका काफी अहम था और गरमनाला गिरोह उसमें अपना वर्चस्व कायम करना चाहता था। 02 फरवरी 1989 को आनंद राव की हत्या कर दी गई। उस मामले में शहाबुद्दीन सहित कई लोगों का नाम आया। उसके बाद रेलवे ठेकदारी को लेकर बदले का दौर चला। ठेका पर कब्जा करने के लिए हत्याएं होती रहीं।

प्रभाकर राव की हत्या कर लिया बदला
प्रभाकर राव लोको कॉलोनी स्थित अपने घर में था। सुबह जैसे ही वह नहाकर पूजा करने के लिए निकला, उसकी हत्या कर दी गई। इसमें कुमार राव और उसके साथियों का नाम आया था। कुमार राव पहले प्रभाकर के ही साथ था। शफीक की हत्या में उसका नाम उसके दुश्मनों ने कुमार राव का इस्तेमाल कर लिया।

शफीक की हत्या
शफीक की हत्या लोको क्लब के समीप की गई थी। जिस समय उसकी हत्या की गई, वह कैरेम बोर्ड खेल रहा था। शफीक की हत्या प्रभाकर राव के उसके गिरोह के लोगों ने की थी।

सरताज को मारा
सरताज की हत्या सुबह पांच बजे लोको से खासमहल स्थित अपने घर लौटने के दौरान की गई थी। सरताज की हत्या में जोगा राव और उसके गिरोह के लोगों का नाम आया था।

सखीचंद की गयी जान
सखीचंद कैरेज कॉलोनी में एक सैलून में बैठकर दाढ़ी बनावा रहा था तभी उसे गोली मार दी गई। उसकी हत्या में प्रभाकर राव का नाम आया था।

वाईटी राव को मार डाला
वाईटी राव की हत्या लोको कॉलोनी में की गई थी। उसकी हत्या भी गैंगवार का ही परिणाम था।

कुमार राव की गयी जान
जिस कुमार राव का नाम प्रभाकर राव की हत्या में आया था, उसकी भी हत्या राजेश कच्छप गिरोह ने फुटबॉल मैच के दौरान कैरेज कॉलोनी में कर दी।

फिर बढ़ी ठेकेदारी को लेकर वर्चस्व की लड़ाई
एक समय था जब रेलवे का ठेका हालिस करने के लिए शहर में कई गैंगवार हुए या फिर इस विवाद में नए गिरोहों का जन्म हुआ। स्वर्णरेखा परियोजना, रेलवे का ठेका, सड़क का काम आदि क्षेत्रों में पहले वर्चस्व पर ही काम होता था। माफिया ठेकेदार दूसरे को टेंडर डालने नहीं देते थे। इसे लेकर ही ज्यादा खून-खराबा होता था। लेकिन, 90 के दशक के बाद इसमें बेहद कमी आई। ठेकेदारी को लेकर दर्जनों हत्याओं के होने के बाद ठेकेदारी के लिए होने वाले गैंगवार पर विराम लग गया। उसके बाद टेंडर आपस में ही मैनेज होने लगे। लेकिन फिर एक बार ठेकेदारी के लिए प्रतिद्वंदिता सामने आने लगी है।

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  • Web Title:रेलवे की ठेकेदारी में सबसे पहले हुई आनंद राव की हत्या