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गैंगस्टर सुशील हत्याकांड: 48 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ खाली

गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव और दो अन्य लोगों की हजारीबाग न्यायालय में दिन-दहाड़े बम और एके47 से हमलाकर हत्या की घटना के 48 घंटे बाद भी पुलिस को कोई ठोस सफलता नहीं मिली। इस तिहरे हत्याकांड को लेकर पुलिस ने अपनी कार्रवाई पर रहस्यमय चुप्पी साध रखी है। सीआइडी, विशेष शाखा और राज्य के तेजतर्रार अधिकारियों के अलावा जमशेदपुर, रांची, रामगढ़ के एसपी और अन्य अधिकारी हत्यारों की धर-पकड़ में जुटे हैं। पूरे मामले की जांच की जिम्मेवारी एडीजी तदाशा मिश्रा को दी गई है।

जानकारी के मुताबिक, हत्याकांड के तार बिहार से जुड़ने के बाद पटना के अधिकारियों से भी संपर्क साधा गया है, क्योंकि एके 47 के वहीं से लाने की बात आयी है। इसके अलावा किशोर पांडेय के गुर्गों और परिजनों को टटोला जा रहा है। अभी तक दो दर्जन से अधिक लोग हिरासत में लिए जा चुके हैं। जिनसे हजारीबाग, रामगढ़ और जमशेदपुर की पुलिस अपने यहां पूछताछ कर रही है।

पुलिस दबिश और गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव के गैंग से खतरे की आहट से हत्याकांड के मुख्य आरोपी विकास तिवारी द्वारा आत्मसमर्पण किए जाने की सूचना भी आई। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने इसे महज अफवाह बताया। इधर, डीजीपी डीके पांडेय ने हजारीबाग पहुंचकर उच्चस्तरीय बैठक करते हुए पूरे राज्य में न्यायालय और अन्य संवेदनशील स्थलों की सुरक्षा पर नए दिशा-निर्देश दिए हैं। राज्य भर के गैंगेस्टर पर नजर रखने के साथ-साथ सुरक्षा के मानक तय किए हैं, जिस पर सभी जिलों को अमल करने को कहा गया है।

घटना की जांच का जिम्मा तदाशा मिश्रा को
डीजीपी डीके पांडेय ने कहा कि सभी न्यायालयों में अब सीसीटीवी लगेंगे। इसके लिए व्यवहार न्यायालय के इंट्री गेट को चिन्हित किया गया है। न्यायालय में घटी घटना की उच्चस्तरीय जांच होगी। इसकी जवाबदेही कोयलांचल आइजी तदाशा मिश्रा को दी गई है। उनकी रिपोर्ट आने के बाद तत्काल कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि बगैर चेकिंग अब न्यायालय परिसर में कोई भी दाखिल नहीं होगा। समय-समय पर सुरक्षा की समीक्षा की जाएगी।

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