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ग्रामीण सड़क निर्माण में भारी गड़बड़ी उजागर

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत झारखंड में बन रहीं ग्रामीण सड़कों में भारी अनियमितता बरती गई है। विधानसभा की विशेष समिति ने जांच में पाया कि सड़क निर्माण के नाम पर मजाक किया गया है। समिति ने पहले चरण में गुमला जिला की 133 सड़कों की जांच शुरू की।

समिति के साथ चल रही तकनीकी विंग झारखंड स्टेट रूरल रोड डेवलपमेंट अथॉरिटी के नोडल अफसर ने जब सदस्यों के सामने सड़कें खुदवाई तो कई सड़कों में सिर्फ ग्रेड-वन दिखा, ग्रेड-टू और थ्री मिला ही नहीं। 2011 से शुरू होकर योजना को 2013 तक पूरी हो जानी थी। लेकिन सरकार को सुपुर्द रिपोर्ट में 133 सड़कों में सिर्फ 24 सड़क ही पूरी बताई गई हैं। शेष सड़कों की कार्य उपलब्धि शून्य से लेकर 40 फीसदी तक ही हो पाई है। ये 109 सड़कें कब पूरी होंगी यह कोई बताने की स्थिति में नहीं है।

विधानसभा के बजट सत्र में राज्य की ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता का मामला गूंजा तो स्पीकर दिनेश उरांव ने विशेष समिति का गठन किया। वर्ष 2011 से अब तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़कों की गुणवत्ता की जांच करनी थी। विधायक अशोक कुमार के संयोजकत्व में राधाकृष्ण किशोर और शिवशंकर उरांव की विशेष समिति ने पिछले दिन इसका स्थल निरीक्षण शुरू किया।

प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के नौवें और दसवें फेज के तहत अकेले गुमला जिले में 529 किलोमीटर लंबी 133 सड़कें बननी थीं। इनकी लागत 143 करोड़ रुपए है। गुमला में एनपीसीसी (नेशनल प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन कार्पोरेशन) मुख्य कार्य एजेंसी है। समिति के सदस्यों को जानकारी दी गई कि जिले में काम करनेवाली एजेंसी का कोई कार्यालय तक नहीं है। विशेष समिति के साथ चल रहे झारखंड स्टेट रूरल रोड डेवलपमेंट अथॉरिटी के इंजीनियरों ने सड़कों को तोड़कर देखा। इन सड़कों पर 13 पुलों का निर्माण किया जाना था। इसी एजेंसी ने 13 में से मात्र चार पुल तैयार करने की रिपोर्ट की है।

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