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इंटर में एडमिशन नहीं ले पा रहे सीबीएसई के विद्यार्थी

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन (सीबीएसई) दसवीं का रिजल्ट बोर्ड द्वारा जारी किया जा चुका है। विद्यार्थियों को यह पता भी है कि वे पास हो गए हैं। उनके पास बोर्ड की वेबसाइट से डाउनलोड किया हुआ ग्रेडिंग प्रमाणपत्र भी है, लेकिन वे किसी भी कॉलेज में ग्यारहवीं में नामांकन नहीं ले पा रहे हैं। इसका कारण यह है कि कॉलेज द्वारा इंटरनेट से डाउनलोड किए गए प्रमाणपत्र को मान्यता नहीं दी जा रही है।

सीजीपीए से कुल अंक पता करने में हो रही दिक्कत
सभी कॉलेजों द्वारा इंटरमीडिएट में एडमिशन के लिए कट ऑफ माक्र्स की घोषणा कर दी गई है। कई कॉलेजों में तो डायरेक्ट एडमिशन की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। ऐसे में सीबीएसई दसवीं के विद्यार्थियों को एडमिशन में दिक्कत हो रही है। सीबीएसई द्वारा अब तक मूल प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया है। इस कारण सीजीपीए से यह पता लगाना भी मुश्किल हो रहा है कि आखिर विद्यार्थी को कितने प्रतिशत और कुल कितने अंक मिले हैं?

को-ऑपरेटिव में 30 सीटें रिजर्व
को-ऑपरेटिव कॉलेज ने इस दिशा में बेहतर पहल करते हुए सीबीएसई दसवीं के विद्यर्थियों के लिए तीस सीटें आरक्षित कर दी हैं। उन्होंने कहा कि कॉलेज में एडमिशन चल रहा है, लेकिन सामान्य के लिए बीस व एससी, एसटी, ओबीसी के लिए दस सीटें रिजर्व रहेंगी, ताकि असली प्रमाणपत्र आने पर बच्चों का नामांकन लिया जा सके।

सीबीएसई दसवीं के बारे में
-शहर के लगभग तीन हजार ने दी थी परीक्षा
-शहर में 8-9 स्कूलों में ही होती है सीबीएसई में बारहवीं की पढ़ाई, जहां हो चुके हैं एडमिशन

एडमिशन में होने वाली परेशानी
-जुलाई के पहले सप्ताह तक अंक पत्र आने की है उम्मीद
-कॉलेज ग्रेड से नहीं तय कर पा रहे कुल अंक और प्रतिशत
-कई कॉलेजों में इटंर में डायरेक्ट एडमिशन की समय सीमा हुई खत्म
-जैक और आईसीएसई दसवीं के विद्यार्थी ले रहे एडमिशन

यह तो बोर्ड की गलती है। इंटरनेट कॉपी से पता करना मुश्किल होता है। अगर हम एडमिशन में देरी करते हैं तो सत्र लेट होगा। कॉलेज में इंटर में डायरेक्ट एडमिशन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब जमा फॉर्म के आधार पर खाली सीटों पर एडमिशन होगा।
-डॉ. उषा शुक्ला, प्राचार्य, ग्रेजुएट कॉलेज

असली प्रमाणपत्र न रहने पर परेशानी तो होती ही है। बच्चे एडमिशन के लिए आ रहे हैं और हमने उनसे कह दिया है कि अगर इंटरनेट कॉपी को स्कूल की प्राचार्य सत्यापित कर दें तो हम नामांकन ले लेंगे। वैसे इन बच्चों के लिए तीस सीटें रिजर्व रखी गई हैं।
-डॉ. एसएस रजी, प्राचार्य, को-ऑपरेटिव कॉलेज

अगर विद्यार्थी दूसरे स्टेट में पढ़ाई के लिए जा रहे हों तो बोर्ड को माक्र्स के लिए आवेदन दे सकते हैं। कुछ-कुछ राज्यों में इस तरह की परेशानी है, लेकिन झारखंड-बिहार में आमतौर पर इस तरह की परेशानी नहीं होती है।
-नमिता अग्रवाल, प्राचार्य, जमशेदपुर पब्लिक स्कूल

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