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नेतागिरी के चक्कर में चार दिन से सड़ रही लाश

टाटा स्टील परिसर में एक ठेका कंपनी के मजदूर कौशिक बारी (22) की मौत तमाशा बनकर रह गई है। उसकी मौत को पांच दिन हो चुके हैं, लेकिन न तो उसके परिजनों को मुआवजा मिला और न ही उसके शव की अंत्येष्टि हुई। शव एमजीएम कॉलेज के पोस्टर्माटम हाउस में पड़ा सड़ रहा है।
कौशिक बारी की मौत 29 मई को टाटा स्टील परिसर के अंदर हुई थी।

प्रत्यक्षदर्शियों के बयान पर बिष्टूपुर पुलिस ने मौत का कारण लिखा, ‘मजदूर आम के पेड़ पर आम तोड़ने के लिए चढ़ा था। डाली टूटने से वह नीचे गिरा, जिससे उसकी मौत हो गई।’ पहले तो मजदूर के परिजनों ने मौत के कारणों पर संदेह जताते हुए बिष्टूपुर थाने और पोस्टमार्टम हाउस में हंगामा किया। उसके बाद मजदूर नेताओं ने मुआवजे की मांग पर राजनीति शुरू कर दी। इन सब के बीच शव अब तक का पोस्टमार्टम भी नहीं हो पाया है।
ठेका कंपनी ने दिए थे 30 हजार रुपये

हालांकि, घटना के दिन एसजेवी प्राइवेट लिमिटेड (हास्को) के ठेकेदार ने दाह-संस्कार के लिए मजदूर के परिजनों को 30 हजार रुपये दिए थे। साथ ही कहा था कि और मुआवजा देंगे, लेकिन इस बीच इस मुद्दे पर नेतागिरी शुरू हो गई। यही कारण है कि ठेका कंपनी के मालिक सामने नहीं आ रहे हैं। वहीं परिजनों का कहना है कि पहले उनके बच्चे के शव की अंत्येष्टि होनी चाहिए। इसके बाद जो भी उन्हें मुआवजा दिलाना चाहता है, दिलाए।

रमेश हांसदा ने दी प्रदर्शन की चेतावनी
मजदूर की मौत पर मुआवजे की मांग करने वालों में भाजपा नेता रमेश हांसदा का नाम सबसे आगे है। सोमवार सुबह वे बिष्टूपुर थाने पहुंचे और थानेदार जितेंद्र कुमार को चेतावनी दी कि अगर मुआवजा नहीं मिलता है तो मंगलवार को वे टाटा स्टील कंपनी के मुख्य गेट पर शव रखकर प्रदर्शन करेंगे। साथ ही ठेका कंपनी के मालिक पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराएंगे।

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