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27 फरवरी, 2020|4:58|IST

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झारखंडः नक्सली संगठन के 50 करोड़ लेकर भागा है सरेंडर करने वाला बड़ा विकास

झारखंड के बड़े नक्सली देव कुमार सिंह उर्फ अरविंद जी का करीबी माना जाने वाला नक्सली कमांडर बालेश्वर उरांव उर्फ बड़ा विकास पुलिस की गिरफ्त में है। 25 लाख का इनामी बड़ा विकास ने आत्मसमर्पण कर दिया है। एमसीसीआइ से वसूली गई लेवी में से करीब 50 करोड़ रुपये उसके पास था। संगठन में इसे लेकर विवाद चल रहा था। बड़ा विकास ने इसी वजह से आत्मसमर्पण किया, ताकि उसका पैसा सुरक्षित रह सके।

विकास के आत्मसमर्पण करने की पुष्टि पुलिस नहीं कर रही है, लेकिन उसे लेकर लातेहार इलाके में छापामारी चल रही है। बड़ा विकास की उम्र करीब 45 वर्ष की है। वह 20 वर्ष पहले संगठन से जुड़ा था। एमसीसीआइ के कैडर के रूप में संगठन से जुड़ने वाला बड़ा विकास आज की तारीख में जोनल कमांडर है। नक्सली कांडों की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि पुलिस दो दिनों से उसे एकत्र करने में लगी है।

विकास के घर चाय-नाश्ता: वर्ष 2010 में लातेहार के तत्कालीन डीडीसी सुधांशु भूषण राम, मनिका के बीडीओ, कुछ नेता बड़ा विकास के डोकी गांव गये थे। बड़ा विकास का घर में ही अधिकारियों का चाय-नाश्ता हुआ था। अधिकारी जब स्कूल परिसर में ग्रामीणों को संबोधित करने वाले थे उसी समय एरिया कमांडर संदीप पासवान का दस्ता वहां पहुंच गया था। डीडीसी, बीडीओ और इंजीनियर को बंधक बना लिया गया। उनका मोबाइल फोन नक्सलियों ने छीन लिया और उपस्थित ग्रामीणों और अधिकारियों को एरिया कमांडर ने संबोधित किया था। करीब एक घंटे तक कार्यक्रम हुआ। जाते समय नक्सलियों ने सभी के फोन वापस कर दिये थे। वे अधिकारी बाद में गढ़वा और लोहरदगा के डीडीसी भी बने।

कई खुलासे किये: बड़ा विकास ने पुलिस की पूछताछ के क्रम में उसने अरविंद जी के संबंध में कई बड़ी जानकारी दी है। अरविंद एक करोड़ का इनामी है। बड़ा विकास ने आत्मसमर्पण किया है। उसपर जो इनाम है वह उसके परिवार को मिलेगा।
एक हजार फोर्स जंगल में : बड़ा विकास की सूचना पर पुलिस कार्रवाई कर रही है। पुलिस की टीम उसे लेकर बूढ़ा पहाड़, लातेहार इलाके में छापामारी कर रही है। सीआरपीएफ और जिला बल के करीब एक हजार जवान इस अभियान में लगे हैं। तीन जिले की पुलिस टीम इसमें शामिल है।

अच्छा वक्ता है विकास: बड़ा विकास अच्छा वक्ता है। वह अपने प्रभाव वाले इलाकों में कई बार ग्रामीणों को भी संबोधित किया है। हाल के दिनों में लोहरदगा, गुमला, लातेहार, चतरा और पलामू में विकास की योजना और बीड़ी पत्ता से लेवी की वसूली वही करता था।