DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

तजाकिस्तान की सरहद पर पहुंचा आतंक

तजाकिस्तान की सरहद पर पहुंचा आतंक

इस्लामी आतंक का खतरा तजाकिस्तान पर मंडराने लगा है। इस्लाम के उदार सूफीपंथ को मानने वाले इस देश की सीमा से लगते उत्तरी अफगानिस्तान में मध्य एशियाई देशों के आतंकियों के अलावा पाकिस्तानी और अफगानी तालिबान ने इस्लामिक स्टेट से हाथ मिला लिया है। इस तरह पूर्व सोवियत संघ के छह धर्मनिरपेक्ष गणराज्यों में इस्लामी आतंक के पसरने की आशंका है। इन विभिन्न आतंकी गुटों के हजारों लड़ाकों ने उत्तरी अफगानिस्तान में एक बड़े हिस्से पर कब्जा जमा लिया है।

रूस पर निर्भर तजाकिस्तान
रूसी सैनिक लंबे समय से तजाकिस्तान में उसके संरक्षक के तौर पर तैनात हैं। दो महीने पहले 2,500 रूसी और छह पूर्व सोवियत गणराज्यों के सैनिकों ने अफगानिस्तान सीमा के नजदीक सैन्य अभ्यास किया था।

तालिबान बेहद आक्रामक
वर्ष 2001 के बाद यह पहली बार है जब तालिबान बेहद आक्रामक दिखाई दे रहा है। आतंकियों का मुख्य लक्ष्य है मध्य एशिया से सटी 1,200 मील की सीमा पर स्थित सभी अहम कस्बे और क्षेत्रों पर कब्जा जमाना।

मध्य एशिया के लड़ाके पाक में थे
मध्य एशिया के आतंकी दस साल से पाकिस्तान में पनाह लिए हुए थे। अब वे उत्तरी अफगानिस्तान में तालिबान की मदद से मध्य एशिया में घुसने की फिराक में हैं।

पांच हजार मध्य एशियाई आतंकी
ताजिक सैन्य और खुफिया अधिकारियों के मुताबिक उत्तरी अफगानिस्तान में 5000 मध्य एशियाई आतंकी हजारों अफगानी और तालिबान सदस्यों के संग जंग लड़ रहे हैं। ये आतंकी आधा दर्जन गुटों के हैं।

कुंदुज और बदख्शन में जमावड़ा
अप्रैल में अफगानी शहर कुंदुज में जो लड़ाके दो मील भीतर तक घुस आए थे, उन्हें अफगान सेना ने धकेल दिया है। अभी ये कुंदुज से 10 मील दूर हैं। अन्य मध्य एशियाई आतंकी उत्तरपूर्वी अफगानी प्रांत बदख्शन में जमे हुए हैं।

सीरिया में भी मध्य एशियाई आतंकी
मध्य एशियाई देशों की सरकारों के सामने एक और संकट है। सीरिया में उनके 1500 आतंकी इस्लामिक स्टेट के लिए लड़ रहे हैं। इनमें 300 तजाक दहशतगर्द हैं।

कर्नल भी बना खतरा
तजाकी कर्नल गुलमरोद खालिमोव इस्लामिक स्टेट से जुड़ गया है। अप्रैल में यह विशेष बल पुलिस कमांडर लापता हो गया था। मई में एक वीडियो में उसने बताया कि वह सीरिया में है और जल्द तजाकिस्तान पहुंचने वाला है।

कब्जे में रक्षा योजना

तजाक और पश्चिमी देशों के अधिकारियों की चिंता यह है कि ताजिक सरकार की रक्षा योजना, मध्य एशियाई सरकारों के लिए तैयार रूसी और चीनी मदद की योजना कर्नल खालिमोव के कब्जे में है।

सभी देशों का सहयोग जरूरी
एक ताजिक सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि हमें नहीं पता कि आतंकियों का मकसद और रणनीति क्या है? उनकी क्षमता क्या है? बस , हम तो सभी देशों विशेषकर क्षेत्रीय देशों का सहयोग इस खतरे से निपटने के लिए चाहते हैं।

अमेरिका ने खर्चे 2.7 अरब अमेरिकी डॉलर
- 2014 अगस्त में अमेरिका ने आईएस के खिलाफ मुहिम छेड़ी थी। यह मुहिम मुख्यत हवाई हमलों पर टिकी हुई है।
- 2.7 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च कर दिए हैं अब तक अमेरिका ने आईएस को रोकने के लिए
- 09 मिलियन अमेरिकी डॉलर पहुंच गया है सीरिया और इराक में अमेरिका का प्रतिदिन का खर्च
- 1.8 अरब डॉलर से ज्यादा या यूं कहें कुछ खर्च का दो-तिहाई हिस्सा तो अमेरिका वायुसेना पर खर्च हो चुका है।
-  438 मिलियन डॉलर का खर्च नौसेना पर आया है। इसमें लड़ाकू विमान और अन्य पोत सहयोग पर व्यय भी शामिल है।
- 274 अमेरिकी डॉलर रकम सेना पर खर्च हुई है। 16 मिलियन डॉलर सैन्य वेतन पर खर्च हुए हैं
- 646 मिलियन डॉलर युद्ध सामग्री पर व्यय हुई है जबकि 21 मिलियन डॉलर की राशि खुफिया और निगरानी अभियानों पर खर्च हुई है।
- अमेरिका ने अफगानिस्तान, पाकिस्तान और इराक में पहले चले 10 साल के युद्ध में महंगी कीमत चुकाई है।
                                                        

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:तजाकिस्तान की सरहद पर पहुंचा आतंक