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सुरक्षा बलों के जवानों के लिए सबसे ज्यादा असुरक्षित बना पूर्वोत्तर

सुरक्षा बलों के जवानों के लिए सबसे ज्यादा असुरक्षित बना पूर्वोत्तर

भारत का पूर्वोत्तर हिस्सा सुरक्षा बलों के लिए बेहद असुरक्षित बन गया है। इस साल अब तक यहां उग्रवादियों के हमले में 41 जवान शहीद हो चुके हैं, जबकि 2014 में देश के इसे हिस्से में सिर्फ 23 जवानों की जान गई थी। ये आंकड़े साउथ एशिया टेरोरिज्म पोर्टल ने जारी किए हैं।

पूर्वोत्तर के उग्रवाद प्रभावित राज्यों में मणिपुर सबसे संवेदनशील राज्य है। यहां सात जून तक 20 जवानों की जान जा चुकी है। इनमें 18 सैनिक चार जून को चंदेल जिले में उग्रवादियों के हमले में शहीद हुए। जवानों के लिए नक्सली हिंसा से प्रभावित राज्य भी खतरनाक साबित हुए हैं। यहां इस साल सात जून तक 34 जवान शहीद हुए हैं। इनमें अकेले छत्तीसगढ़ में 28 जवानों की जान गई है। आतंक प्रभावित जम्मू-कश्मीर में अभी तक 18 जवानों की जान जा चुकी है।

साउथ एशिया टेरोरिज्म पोर्टल के मुताबिक 2005 से 2014 तक देशभर में आतंकी हिंसा में 3,093 जवानों की जान गई। लेकिन एक उल्लेखनीय तथ्य यह भी है कि 2005 से जवानों की मौतों की संख्या में 63 प्रतिशत की कमी आई है।

म्यांमार सरकार के दावों पर उठे सवाल
म्यांमार सीमा के भीतर नौ जून की सुबह भारतीय सेना की कार्रवाई का वहां की सरकार ने खंडन किया है। साथ ही कहा है कि म्यांमार की भूमि पर विदेशी संगठनों के लिए कोई जगह नहीं है। लेकिन म्यांमार टाइम्स की वेबसाइट में गुरुवार को छपी खबर से म्यांमार सरकार के दावों पर सवाल उठते हैं। खबर से साफ है कि म्यांमार सरकार सच नहीं बोल रही है। खबर के कुछ अंश इस तरह हैं-

1- मार्च 2001 को भारत सरकार और एनएससीएन (के) के बीच संघर्ष विराम भंग हो गया। लेकिन ततमादा (म्यांमार सशस्त्र सेना) और एनएससीएन (के) के बीच अनौपचारिक संघर्ष विराम कायम है। जिस सीमाई क्षेत्र में भारतीय सेना ने कार्रवाई की, वहां म्यांमार की सेना की उपस्थिति नहीं है।

2- 10 जून को ततमादा के एक मेजर ने कहा था कि म्यांमार की सशस्त्र सेना ने पिछले माह एनएससीएन (के) के क्षेत्र में 'डिस्कवरी मिशन' चलाया था। इसका मकसद इस गुट के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करना था, लेकिन मेजर ने इस बारे में विस्तार से और नहीं बताया।

3- एनएससीएन (के) का गठन मौजूदा नेता एसएस खापलांग और कोयंक नगा नेता खोले कोयंक ने 1988 में एनएससीएन के विभाजन के बाद किया था।

4- म्यांमार टाइम्स को दिए इंटरव्यू में एसएस खापलांग ने कहा था कि उनका संगठन पूर्वोत्तर के बागी गुटों से सहयोग बढ़ाने में जुटा हुआ है।

5- 17 अप्रैल 2015 को म्यांमार के ऊपरी सियांग के टेगा क्षेत्र में एनएससीएन (के) की अगुवाई में पूर्वोत्तर के आठ बागी गुटों ने यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ वेस्टर्न साउथ ईस्ट एशिया (यूएनएलएफडब्लू) नाम का संगठन बनाया।

6- भले ही म्यांमार सरकार कह रही हो कि कार्रवाई उसकी सीमा में नहीं हुई है, लेकिन उसे काफी समय से पता है कि एनएससीएन (के) उसकी सीमा के भीतर से संचालित है।

7- म्यांमार पीस सेंटर के वरिष्ठ सलाहकार यू हला मुंग ने बुधवार को कहा कि खापलांग का गुट म्यांमार में सशस्त्र जातीय गुट के रूप में मान्यता प्राप्त है। इतना ही उसने राष्ट्रव्यापी संघर्ष विराम के लिए बातचीत भी जारी रखी है। जैसे ही मसौदे पर चर्चा पूरी होगी, उसे दस्तावेजों पर दस्तखत करने का अधिकार मिल जाएगा।

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