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तुर्की: एर्दोगन ने बहुमत खोया, बड़ी ताकत बने 'कुर्दों के ओबामा'

तुर्की: एर्दोगन ने बहुमत खोया, बड़ी ताकत बने 'कुर्दों के ओबामा'

तुर्की में संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति रिसेप तईप एर्दोगन की इस्लामिक रूझान वाली सत्तारूढ़ जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (एकेपी) ने बहुमत खो दिया है। जबकि पहली बार कुर्द समर्थक पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (एचडीपी) को चुनाव में उल्लेखनीय जीत मिली है। सोमवार को एचडीपी की जीत की घोषणा के बाद उसके समर्थक सड़कों पर निकल आए और उन्होंने खुशियां मनानी शुरू कर दी।

550 सीटों वाली संसद में बहुमत के लिए 276 सीटों की जरूरत होती है। लेकिन एकेपी को केवल 258 सीटें मिलीं। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार एकेपी को 41 प्रतिशत वोट मिले। साल 2002 से सत्ता में बनी रही एकेपी के लिए यह पहला मौका है जब बहुमत उसके हाथ से निकल गया है। जबकि एचडीपी को 13 प्रतिशत वोट के साथ 79 सीटें मिली हैं। तुर्की की संसद में सीट हासिल करने के लिए चुनाव में न्यूनतम 10 प्रतिशत वोट पाना जरूरी होता है। उसके वोटों का प्रतिशत बढ़ने के साथ ही सोमवार तड़के कुर्दों ने खुशियां मनानी शुरू कर दी।

विपक्षी रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी (सीएचपी) को 25 फीसदी और नेशनल मूवमेंट पार्टी (एमएचपी) को क्रमश: 16.5 फीसदी वोट मिले हैं। मौजूदा स्थिति में गठबंधन सरकार या अल्पमत सरकार बनने या मध्यावधि चुनाव की संभावना बढ़ गई है। फिलहाल चुनावी नतीजों ने कुर्दों की आवाज को उभारकर तुर्की की सियासत में बड़े बदलाव के संकेत दे दिए हैं। 


बड़ी ताकत बनकर उभरे कुर्दों के ओबामा
तुर्की के आम चुनाव में कुर्द समर्थक एचडीपी के नेता सेलाहातिन डेमिर्तास बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं। डेमिर्तास को देश में 'कुर्दों के ओबामा' के नाम से जाना जाता है। तीन साल पहले बनी इस पार्टी के नेता डेमिर्तास अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की तरह ही अपने जादुई भाषण और व्यक्तित्व के लिए मशहूर हैं। वीणा जैसे वाद्ययंत्र बजाकर लोगों का दिल जीतने वाले डेमिर्तास ने अपनी छवि एक पारिवारिक पुरुष की बनाई है। उनकी पत्नी बासाक शिक्षिका हैं। उनकी दो बेटियां हैं। आजाद खयाल राजनेता डेमिर्तास के मुताबिक 15 साल की उम्र में एक कुर्द नेता की हत्या के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। उस वक्त उन्होंने जाना कि कुर्द होने के क्या मतलब हैं। तुर्की में कुर्द आबादी 20 फीसदी है।

महिलाओं और समलैंगिकों को भी टिकट
- 50 फीसदी टिकट महिलाओं को दिया था एचडीपी ने इस चुनाव में
- 10 फीसदी टिकट एलजीबीटी समुदाय के लोगों को दिया गया
- 01 पुरुष चेयरमैन के साथ एक महिला चेयरपर्सन भी है एचडीपी में
 
आतंक से निपटने में मददगार
- दुनिया के लिए बड़ा खतरा बने आईएस के कब्जे वाले क्षेत्र सीरिया व इराक से लगी है तुर्की की सीमा
- एशिया में नाटो का अहम सहयोगी देश है तुर्की, एकमात्र मुस्लिम बहुल धर्मनिरपेक्ष देश है यह

क्यों हारे एर्दोगन
- ज्यादा शक्ति हासिल करने के लिए किसी तानाशाह की तरह करने लगे थे बर्ताव
- सरकार के विरोधियों को दबाया, तुर्की को कहा जाना लगा था पत्रकारों की जेल
- इनके शासनकाल में भ्रष्टाचार और विरोधियों के दमन के कई मामले सामने आए

राष्ट्रपति शासन प्रणाली लाने की कोशिश नाकाम
दस साल तक प्रधानमंत्री रहे एर्दोगन ने राष्ट्रपति का चुनाव जीतने के बाद एकेपी का गठन किया और अपने करीबी अहमत दावोतुग्लु को प्रधानमंत्री बनवा दिया। इसके बाद वह बहुमत हासिल करके प्रधानमंत्री की कार्यकारी शक्तियां राष्ट्रपति के हाथों में पहुंचना चाहते थे। अभी इस देश में राष्ट्रपति के पास नाममात्र की शक्तियां हैं।
 

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