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अमेरिकी जेल में हुआ आतंकवादी संगठन आईएस का जन्म

अमेरिकी जेल में हुआ आतंकवादी संगठन आईएस का जन्म

इराक के बुक्का कैंप ने दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन आईएस के जन्म की बुनियाद रखी। 'द न्यूयॉर्क पोस्ट' में बुक्का कैंप के पूर्व गार्ड मिचेल ग्रे के हवाले से छपी एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

ग्रे के मुताबिक 2003 में इराक में सद्दाम हुसैन के पतन के बाद अमेरिकी सेना ने अबु बक्र अल बगदादी समेत कई खूंखार कट्टरपंथियों को हिरासत में लिया था। इन्हें उम कसर में बनी अमेरिकी जेल 'बुक्का कैंप' में रखा गया था। जेल में एक ही छत के नीचे रहते हुए बगदादी न सिर्फ अन्य खूंखार कट्टरपंथियों से संपर्क बढ़ा सका, बल्कि अमेरिका के खिलाफ आतंकी हमलों की साजिश रचने और लड़ाकों की भर्ती करने में भी कामयाब रहा। 2009 में जेल से बाहर निकलने के बाद ही उसने आईएस की स्थापना की।

ग्रे के मुताबिक बुक्का कैंप में कैदियों के बीच टकराव रोकने के लिए अमेरिकी सेना ने जेल को दो हिस्सों में बांट दिया था। एक हिस्सा सुन्नी और दूसरा में शिया कैदियों के लिए। दोनों ही हिस्सों में एक हजार कैदियों की क्षमता वाले अलग-अलग कंपाउंड बनाए गए थे। हर कंपाउंड में कुछ बेहद खूंखार आतंकियों को कम घातक संदिग्धों के साथ रखा गया। हालांकि कैदियों में टकराव रोकने की अमेरिका की यह रणनीति उसी पर भारी पड़ी। बगदादी जैसे आतंकी इसकी आड़ में एकजुट हो सके। उन्होंने बुक्का कैंप को लड़ाकों की भर्ती और प्रशिक्षण का केंद्र तो बना ही दिया, साथ ही खुलेआम अमेरिका विरोधी साजिशें भी रचने लगे।

इनकार बर्दाश्त नहीं
अमेरिका समेत अन्य पश्चिमी देशों के खिलाफ जेहाद में शामिल होने से इनकार करने वाले युवकों को कठोर शारीरिक यातनाएं दी जाती थीं। इनमें आंखों की पुतली निकालना, जुबान काटना, बाल-नाखून उखाड़ना, सिर में छेद करना और यौन अंगों पर चोट देना शामिल है।

गार्ड की कमी का फायदा
बुक्का कैंप की निगरानी में सीमित गार्ड तैनात किए गए थे। हर कंपाउंड की पल-पल पहरेदारी करना उनके बस की बात नहीं थी। इसके अलावा वे अरबी भाषा से भी अनजान थे। आतंकी हमलों की साजिश रचने और लड़ाकों को प्रशिक्षित करने के लिए इसी बात का फायदा उठाते थे।

आतंक की पाठशाला
आतंकियों को जेल में बंद कैदियों को पढ़ाने-लिखाने की छूट मिली हुई थी। इससे वे न सिर्फ गुट में बैठकर बातें कर पाते थे, बल्कि साथियों को बम बनाने, उसमें विस्फोट करने, हथियारों के इस्तेमाल और आत्मघाती हमलावर बनने की ट्रेनिंग भी आसानी से दे पाते थे।

कपड़ों पर लिखते थे नंबर
आईएस कमांडर अबु अहमद ने एक ऑडियो टेप में बताया था कि बुक्का कैंप कैसे आतंकी साजिशों का अड्डा बना। कैदी कैसे एक-दूसरे का फोन नंबर और पता लेकर पायजामे की इलास्टिक पर लिख लेते थे। बाहर निकलकर सब साथ मिलकर अमेरिका के खिलाफ जेहाद में जुट जाते थे।

कैदियों के चेहरे पर अमेरिकियों के लिए जैसी नफरत दिखती थी, वैसी कहीं और नजर नहीं आई। वे हमें ऐसे घूरते थे, मानो अगले ही सेकेंड हमारा सिर कलम करके शरीर में बह रहा सारा खून पी जाएंगे।
- मिचेल ग्रे, पूर्व गार्ड, बुक्का कैंप

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