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भारत और चीन में मानसिक दबाव बढ़ रहा

भारत और चीन में मानसिक दबाव बढ़ रहा

भारत और चीन के नागरिकों पर लगातार मानसिक दबाव बढ़ता जा रहा है। यहां तक कि दुनिया में सबसे ज्यादा मानसिक रूप से बीमार लोग इन्हीं दोनों देशों में हैं। मगर इनमें से कुछ ही लोगों को मेडिकल सहायता मिल पाती है।

हाल ही में हुए एक शोध के मुताबिक भारत के लिए साल 2025 तक स्थितियां और खराब होने वाली हैं। 'द लांसेट' में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार आने वाले दस साल में भारत में ऐसे लोगों की संख्या तेजी से बढ़ेगी। इन दोनों देशों में ही मानसिक रूप से बीमार लोगों के लिए खास इंतजाम नहीं हैं।  

चीनी लोगों में भूलने की बीमारी बढ़ी 
चीन में बूढे़ लोगों के बीच भूलने की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। यहां सिर्फ छह फीसदी लोग ही ऐसे हैं, जो तनाव की समस्या से उबर पाते हैं। यहां तक कि डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) से जूझ रहे बहुत से लोग डाॠक्टर के पास भी नहीं पहुंच पाते। ग्रामीण क्षेत्रों में तो स्थिति और भी खराब है। 

नहीं लगता बीमारी का पता 
रिपोर्ट के अनुसार इन दोनों देशों में ही लोगों को पता ही नहीं चलता कि वह मानसिक रूप से बीमार हैं। भारत में मानसिक रूप से बीमार लोगों को सही समय पर चिकित्सीय सेवा नहीं मिलती। वहीं दूसरी तरफ अमीर देशों में मानसिक रूप से बीमार 70 फीसदी लोगों को चिकित्सीय सहायता मिल जाती है। 

खर्च करने में भारत-चीन फिसड्डी
ऐसी सेवाओं पर खर्च करने के मामले में अगर देखा जाए तो भी संपन्न और इन दोनों देशों में काफी फर्क देखने को मिलता है। चीन और भारत दोनों ने ही इस तरह की समस्याओं से निपटने के लिए नीतियां तो बनाई हुई हैं लेकिन रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन नीतियों का फायदा लोगों तक पहुंचता ही नहीं है। 

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