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ब्रिटेन ने छोड़ा यूरोपीय यूनियन, अब भारत झेलेगा ये 5 दिक्कतें

ब्रिटेन यूरोपीय यूनियन में रहेगा या नहीं ब्रिटेन के लोगों ने इस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है। नतीजों से साफ़ है कि अब ब्रिटेन यूरो जोन का हिस्सा नहीं रहेगा। ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन में न रहने के...

ब्रिटेन ने छोड़ा यूरोपीय यूनियन, अब भारत झेलेगा ये 5 दिक्कतें
लाइव हिन्दुस्तान टीमFri, 24 Jun 2016 11:43 AM
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ब्रिटेन यूरोपीय यूनियन में रहेगा या नहीं ब्रिटेन के लोगों ने इस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है। नतीजों से साफ़ है कि अब ब्रिटेन यूरो जोन का हिस्सा नहीं रहेगा। ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन में न रहने के चलते मुंबई शेयर बाज़ार में 900 अंकों की भारी गिरावट देखी गई है। उधर रुपया भी डॉलर के मुकाबले 78 पैसे गिरकर कारोबार कर रहा है।

मार्किट की हालत देखी जाए तो ब्रिटेन में हुए इस बदलाव का भारत पर भी ख़ासा असर पड़ सकता है। आज हम आपको बताने वाले हैं वो 5 दिक्कतें जो ब्रिटेन के इस फैसले से भारत को झेलनी होंगी:

1. पाउंड गिरेगा और रुपया भी: इसकी शुरुआत पहले ही हो चुकी है. ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से बहार होने की स्थिति में पाउंड का गिरना तय मन जा रहा है ऐसे में डॉलर के दामों में वृद्धि होना भी तय है। डॉलर के दाम बढ़ने का असर भारतीय रुपए पर भी पड़ेगा और उसकी कीमत में भारी गिरावट की आशंका है। 

2. डॉलर महंगा तो तेल भी महंगा: फिलहाल ज्यादातर कच्चे तेल की खरीदारी पेट्रो डॉलर में ही की जाती है। डॉलर का दाम बढ़ने से भारत के लिए भी कच्चे तेल का आयात महंगा हो जाएगा और इसका असर पेट्रोल-डीजल के दम बढ़ने के रूप में भी दिखाई देगा। पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से बाकी चीजें भी महंगी होना तय मन जा रहा है।

3. 800 भारतीय कंपनियों को नुकसान: यूरोपीय यूनियन से अलग होने पर ब्रिटेन और भारत के व्यापारिक संबंधो में तो सुधार आने की संभावना है लेकिन Brexit के ज़रिए कारोबार कर रहीं 800 कंपनियों के लिए ये घाटे का सौदा है। अब उन्हें महंगे डॉलर पर निर्भर होना होगा।

4. दूसरे देश भी छोड़ेंगे EU तो होगी दिक्कत: ब्रिटेन के अलग होने के बाद अब दूसरे देश भी यूरोपीय यूनियन से अलग होने के लिए कोशिशें करेंगे। ऐसे में पाउंड की हालत और ख़राब होगी और डॉलर का रसूख और बढ़ता जाएगा। इन देशों में Brexit के ज़रिये कम कर रही भारतीय कंपनियों को भी इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। 

5. भारत को ये है फायदा: ब्रिटेन के इस कदम के बाद अब भारत के साथ उसे मुक्त व्यापर करने में और आसानी होगी। भारत के अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार में ब्रिटेन 12वें स्थान पर है। जिन 25 देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापारिक संतुलन भारत पक्ष में झुका हुआ है उनमें ब्रिटेन सातवें स्थान पर है। ब्रिटेन में निवेश करने के मामले में भारत तीसरा सबसे बड़ा निवेशक है।