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पहाड़ों में भांग के दाने भी हैं खान-पान के हिस्से

कपकोट के तमाम गांवों में भांग की खेती होती है। भांग के पेड़ को मलने से चरस निकल आती है। रेसे से रस्सी आदि बना लिए जाते हैं, जबकि दाने का प्रयोग सब्जी आदि में डलाने के लिए किया जाता है। जाड़ों की रात...

पहाड़ों में भांग के दाने भी हैं खान-पान के हिस्से
लाइव हिन्दुस्तान टीमWed, 09 Nov 2016 11:01 PM
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कपकोट के तमाम गांवों में भांग की खेती होती है। भांग के पेड़ को मलने से चरस निकल आती है। रेसे से रस्सी आदि बना लिए जाते हैं, जबकि दाने का प्रयोग सब्जी आदि में डलाने के लिए किया जाता है। जाड़ों की रात ठंडी और लंबी होने से चरस के तस्कर सक्रिय हो जाते हैं। सरकार ने भांग की खेती को प्रतिबंधित किया है। उसके बावजूद भी भांग की खेती अभी भी धड़ल्ले से उगाई जा रही है। यदि भांग से प्रतिबंधित हटाया जाता तो सरकार को बड़ी मात्रा में हर साल राजस्व भी मिलता। पहाड़ जाड़ों में काफी ठंड हो जाते हैं। भांग की तासीर को गरम माना जाता है। दानों को पीसकर उसकी चटनी बनती है। नीबू में भी भांग का नमक मिलाकर उसे खाया जाता है, जिससे नीबू का स्वाद अलग हो जाता है। सर्दी जुखाम आदि में भांग के नमक का सेवन लोग करते आए हैं। गडेरी और पिनालू की सब्जी में भांग के दानों को पीसकर और छानकर डाला जाता है, जिससे सब्जी की तासीर गरम हो जाती है। बर्फ में रहने वाले लोगों का शरीर गर्म रहता है। भांग के रेसों से रस्सी तैयार की जाती है। जिससे लोग पशुओं को बांधने का काम करते हैं। पेड़ और पत्तों को मलने से काला रंग का पदार्थ निकलता है, जिसे चरस कहा जाता है। चरस से नशा होता है और इसकी भी तासीर गरम मानी जाती है। चरस करीब एक लाख रुपये किलो तक बिक जाती है। तमाम प्रतिबंधत के बाद किसान अब भांग अपने प्रयोग के लिए ही बोते हैं, लेकिन बहुतायत होने पर उसे बेच भी रहे हैं। जिसके लिए अब तराई और महानगरों में चरस आदि की तस्करी करने वालों का रुख भी पहाड़ की ओर होने लगा है।

भांग से हटे पाबंदी

ग्वल सेना के संयोजक हेम पंत ने कहा कि भांग से पाबंदी हटनी चाहिए। सरकार को किसानों से भांग, चरस और रेसे खरीदने चाहिए। जिससे राज्य का राजस्व बढ़ेगा और काला बाजारी पर रोक लगेगी। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों में बनी शराब पहाड़ को बर्बाद कर रही है। चरस से तस्कर धन कमा रहे हैं।

एसपी, सुखबीर सिंह ने कहा कि चरस तस्करों पर पुलिस की पैनी नजर है। कपकोट से लगातार चरस के साथ तस्कर पकड़े भी जा रहे हैं। पुलिस थानों को रात्रि गश्त बढ़ाने और रात में चलने वाले गाड़ियों की तलाशी लेने के निर्देश दिए गए हैं।

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