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राष्ट्रपति द्वारा गोंद लेने के बाद भी नहीं सुधरी दौला गांव की हालत

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की ओर से दौला गांव गोद लिए जाने की घोषणा की खबर से ग्रामीणों में जो उम्मीद की किरण जगी थी। अभी तक जमीन पर नहीं उतर सकी है। जबकि इस घोषणा को हुए एक साल पूरे होने को हैं। इस गांव की दशा एवं दिशा में कुछ सुधार तो हुआ है। लेकिन आज भी गांव के लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। खासतौर पर बिजली, पानी एवं शिक्षा व्यवस्था में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला है। गांव के विकास के लिए की गई घोषणाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए हिन्दुस्तान ने गुरुवार को पड़ताल की।

16 घंटे आती है बिजली

राष्ट्रपति द्वारा गोद लिए जाने की घोषणा के साथ ही कहा गया कि गांव में अब बिजली सप्लाई 24 घंटे एवं निर्बाध होगी। लेकिन स्थानीय लोगों की मानें तो बमुश्किल से 16 घंटे बिजली आती है। इसमें भी बीच बीच में कई बार कट लगते हैं। यदि लाइन में खराबी आई तो अवधि घटकर 12 से 14 घंटे रह जाती है। अब तक गोद लिए जाने का केवल इतना असर हुआ है कि यहां एक स्वतंत्र फीडर बनाया गया है।

दूषित पानी की आपूर्ति

दौला गांव में बने 551 परिवारों को पेयजल के लिए पांच ट्यूबवेल लगे हैं। लेकिन पानी का स्तर काफी नीचे होने की वजह से पेयजल की लाइन में केवल दूषित पानी ही आता है। ग्रामीणों के मुताबिक यह पानी पीने लायक तो दूर, नहाने लायक भी नहीं होता। मीठे पानी के रूप में नहरी पानी के आपूर्ति का दावा किया गया था, लेकिन अभी तक इस दिशा में जमीन पर कोई प्रयास नहीं हुआ है।

केंद्र में नहीं पूरी दवाएं

11 माह पूर्व तक खंडहर बना दौला गांव का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोद लिए जाने के बाद गुलजार तो हो गया है। अब इसमें एक डॉक्टर एवं दो एएनएम भी बैठने लगे हैं। 24 घंटे प्रसव सुविधा भी मिलने लगी, लेकिन अभी तक इस अस्पताल में पर्याप्त दवाओं की आपूर्ति नहीं हो सकी है। ग्रामीण महिला मंजू के मुताबिक अस्पताल में दवाएं नहीं होने की वजह से रोगियों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है। अस्पताल में अभी तक आपातकालीन सुविधा भी नहीं है।

उच्च शिक्षा की नहीं व्यवस्था

ग्राम पंचायत दौला में बेटियों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना काफी मुश्किल है। इस गांव से हर साल करीब 50 बेटियां बारहवीं तक की पढ़ाई तो कर लेती हैं। लेकिन उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए उन्हें सोहना, गुरुग्राम या फरीदाबाद जाना होता है। ऐसे में ज्यादातर परिजन असुरक्षा की भावना के चलते उन्हें बाहर नहीं भेजते। छात्रा कीर्ति राघव के मुताबिक बारहवीं पास करने के बाद मुश्किल से दस फीसदी लड़कियां ही उच्च शिक्षा के लिए गांव से बाहर जा पाती हैं। वहीं दस फीसदी लड़कियां पत्राचार के माध्यम से उच्च शिक्षा प्राप्त करती हैं।

सफाई को सिर्फ दो कर्मचारी

गांव में साफ सफाई के लिए ग्राम पंचायत की ओर से दो कर्मचारियों की तैनाती की गई है। यह दोनों कर्मचारी हर महीने 15-15 दिन सफाई करते हैं। ऐसे में एक बार में एक ही कर्मचारी ड्यूटी पर होता है। इसके चलते पूरे गांव की सफाई संभव नहीं हो पाती। इसी प्रकार पंचायत समिति द्वारा लगाए गए कूड़ेदान भी अब गायब हो गए हैं। नालों की समय से सफाई न होने की वजह से नालियों एवं रास्तों के अलावा फिरनी पर जलभराव की स्थिति बनी रहती है।

खेलने को कोई मैदान नहीं

स्थानीय निवासी सुजाता के मुताबिक गांव की फिरनी पर कई लोगों ने पक्के मकान बनाकर अतिक्रमण कर लिया है। फिरनी पर गंदा पानी जमा होता है। गांव में युवाओं के खेलने के लिए कोई मैदान तक नहीं है। तालाब को खेल का मैदान बनाने के लिए सुखा तो दिया गया, लेकिन आज तक उसे विकसित करने की कवायद नहीं हुई।

सरपंच ने की सराहना

ग्राम पंचायत दौला के सरपंच बालकिशन ने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा गांव को गोद लिए जाने से गांव में विकास की लहर आ गई है। युवाओं को रोजगार के लिए प्रशिक्षत करने से लेकर ग्रामीण महिलाओं को उनके घर में ही रोजगार दिलाने के उपाय किए जा रहे हैं। गांव में चिकित्सा सुविधाओं में इजाफा हुआ है। गांव में सफाई व्यवस्था की दशा सुधारी गई है।

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  • Web Title:Not even after the President took the gum, the condition of the daula village