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डिजिटल इंडिया और महंगा इंटरनेट

पिछले दिनों 1.1 लाख करोड़ रुपये की 2जी -3जी स्पेक्ट्रम नीलामी से सरकार का खजाना तो भर गया, लेकिन इसकी कीमत आम आदमी को अपनी जेब से चुकानी पड़ रही है। हाल में देश की सभी बड़ी दूरसंचार कंपनियों ने इंटरनेट पैक की दरें 40 से 100 फीसदी तक बढ़ा दी हैं। पिछले एक साल में कई बार इंटरनेट डेटा पैक की दरें बढ़ाई हैं, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ा है। स्पेक्ट्रम नीलामी के बाद उद्योग संगठनों ने यह संकेत दिए थे कि डाटा इस्तेमाल की दरों में बढ़ोतरी होगी, क्योंकि ऑपरेटरों को सरकार को करीब 1,09,874 करोड़ रुपये का भुगतान करना है। ये भुगतान अब आम आदमी, खासकर युवा वर्ग अपनी जेब से कर रहा है। और यह सब तब हो रहा है, जब दुनिया भर में मुफ्त वाई-फाई सेवा के लिए कोशिशें जारी हैं।

जब सरकार देश में डिजिटल इंडिया का सपना देख रही है, तब इंटरनेट के उपभोक्ताओं के लगातार बढ़ने से ये कीमतें कम होनी चाहिए थीं। क्या इन बढ़ी हुई कीमतों के साथ डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के तहत इंटरनेट को गांव-गांव पहुंचाया जाएगा? अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ यानी आईटीयू की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इंटरनेट 60 से ज्यादा देशों से महंगा है। आईटीयू के अनुसार किफायती ब्रॉडबैंड देने वाले देशों की सूची में भारत 93वें स्थान पर है, जबकि मोबाइल इंटरनेट के मामले में 67वें स्थान पर। एशियाई देशों से ही तुलना करें, तो भारत में इंटरनेट मॉरीशस, माल्टा व पड़ोसी श्रीलंका से भी महंगा है, जबकि महत्वाकांक्षी डिजिटल इंडिया प्रोग्राम की सफलता सुनिश्चित करने के लिए इंटरनेट दरों का कम होना जरूरी है।

सूचना प्रौद्योगिकी की दुनिया में भारत को एक ताकत के रूप में देखा जाता है, लेकिन भारत में चीजें उतनी तेज गति से आगे नहीं बढ़ रहीं, जितनी बढ़नी चाहिए। एक तरफ देश में इंटरनेट इस्तेमाल करने की दर बहुत ज्यादा है, वहीं दूसरी तरफ औसत इंटरनेट स्पीड बहुत कम है। टेलीकॉम कंपनियां जितनी स्पीड का दावा करती हैं, उससे काफी कम स्पीड उपभोक्ता को मिलती है। कहने को देश में इंटरनेट कनेक्शन की स्पीड 24 एमबीपीएस तक पहुंच गई है, लेकिन इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों को ये सेवाएं उसी रफ्तार से नहीं मिलतीं।

हाई स्पीड इंटरनेट और बेहतर सेवा के लिए 3-जी जैसी तकनीक देश के हर हिस्से में अब भी मौजूद नहीं है। इंटरनेट की उपयोगिता सिर्फ लोगों को तकनीकी आधार पर जोड़ने या सूचनाएं देने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने हमारे जीवन को ज्यादा सुविधाजनक और बेहतर बनाने में भी योगदान दिया है। अनगिनत सेवाओं व सुविधाओं को आम आदमी तक पहुंचाया है। अब इसे आगे बढ़ाते हुए सरकार बहुत से प्रशासनिक कामकाज की लागत घटा सकती है। हम स्मार्ट सिटी बसाने जा रहे हैं, अगर ये बने, तो ये सबसे महंगी इंटरनेट सेवा मुहैया करने वाले स्मार्ट सिटी होंगे।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

 

 

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