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एडजस्टासन, कनफ्यूजासन और जुगाड़ासन

योग ही दिख रहा है सब तरफ। कुछ आसन इस प्रकार हैं-
एडजस्टासन- पॉलिटिक्स में यह महत्वपूर्ण आसन है। एडजस्टासन, यानी एडजस्ट करो। यह आसन आसान नहीं। यह आसन तमाम भरी बसों, गाडि़यों, मेट्रो और बिहार आदि प्रदेशों में देखा जा सकता है। एडजस्ट कीजिए। मेट्रो, बस आदि गाडि़यां दो की सीट पर तीन सवारियां ठूंस लेती हैं। ऐसा करने में कुछ सवारियों को सब्र का घूंट पीना पड़ता है। घूंट जहर का हो सकता है, जब लालूजी एडजस्टासन करते हैं नीतीश कुमारजी के साथ। मुश्किल है यह आसन। इस आसन में शामिल बंदों की बार-बार इच्छा होती है कि उसे छोड़कर बाकी सब हट जाएं, तो बेहतर। एडजस्टासन में समस्याएं कितनी होती हैं, यह लालूजी और नीतीशजी बता सकते हैं। महाराष्ट्र के शिवसेना-भाजपा नेता बता सकते हैं। पलटासन- यह आम तौर पर चुनाव से पहले का आसन है। वैसे उसके बाद भी किया ही जाता है। इधर का बंदा पलटकर उधर से निकल लेता है। आमतौर पर एडजस्टासन के साथ यह आसन किया जाता है। जैसे देखें, लालूजी नीतीशजी को कोसा करते थे, कुछ समय पहले तक। नीतीशजी लालूजी को आदतन कानून तोड़ने वाला बताया करते थे। अब दोनों ने एडजस्टासन से पहले पलटासन मारा और ये एक-दूसरे के गले में हाथ डालते दिखते हैं। पलटासन आम आदमी भी करता है, मगर नेताओं के लिए कंपल्सरी है।

कनफ्यूजासन- यह आसन आम आदमी रोज करता है। कौन किस काम के लिए जिम्मेदार है, यह कनफ्यूजन रहता है। कनफ्यूजन में बंदा बैठा रहे, ऐसी स्थिति को कनफ्यूजनासन कहते हैं। दिल्ली में रहजन किसी की जेब काट जाते हैं, जिसकी जेब कटी होती है, वह कनफ्यूजन में बैठा रह जाता है कि इसकी शिकायत दिल्ली सरकार के एंटी करप्शन ब्यूरो से करूं या फिर इसकी सुनवाई केंद्र सरकार का एंटी करप्शन ब्यूरो करेगा। कनफ्यूजन है। यूपी में जो रहजनी करके गया है, वह आम गुंडा है या दारोगा, यह कनफ्यूजन बना रहता है। आम आदमी की जिंदगी इस कनफ्यूजासन में ही निकल लेती है।

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  • Web Title:एडजस्टासन, कनफ्यूजासन और जुगाड़ासन