DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

विकास का मतलब

आजकल देश में कहीं भी जाइए, विकास के शुभ चिन्ह दिखाई देते हैं। लोगों के पास पहले से अधिक पैसे हैं। रहन-सहन बेहतर हुआ है। लेकिन उसमें आंतरिक विकास नहीं दिखाई देता। लोग बातें तो करोड़ों की करते हैं, लेकिन किसी को दिल की बीमारी है, किसी के घुटनों में दर्द है, किसी का लीवर खराब है, तो किसी को नींद नहीं आती है। मैंने एक व्यक्ति से पूछा, 'आप विकास किसे कहते हैं? एक मकान के दो हो जाना, घर के अलावा एक फार्म हाउस बनवाना, सोने के अधिक से अधिक जेवर खरीदना, एक कार के साथ दो कारें और खरीदना, क्या यही विकास है? क्या इसमें आपके मन का विकास शामिल नहीं है? उधर आप दो कारें खरीदते हैं और इधर आपको दिल का दौरा पड़ता है, क्योंकि उसके लिए जो जद्दोजहद करते हैं, उसमें शरीर पर दबाव आता है और फिर वह जवाब देने लगता है। बस यही जवाब आया कि 'हमने तो कभी इस तरह सोचा ही नहीं।'

इसीलिए ओशो हमेशा ध्यान पर इतना जोर देते हैं। वह कहते हैं कि वस्तुओं के साथ व्यक्तिभी विकसित होने चाहिए। विकास एक बहुआयामी घटना है, बाहर और भीतर, दोनों तल पर। अगर अधिक धन-संपत्ति आए, तो उसके साथ आपके भीतर अधिक संतुष्टि भी पैदा हो, उदासी और अवसाद दूर हो जाएं तथा वहां प्रसन्नता छा जाए। दूसरों की तरक्की से आपको ईर्ष्या न होकर खुशी हो। क्या यह सब संभव है? पैसे कमाने के साथ उसी अनुपात में अपने लोभ-लालच को कम नहीं किया, तो आप कितना ही क्यों न कमाएं, आपको यह पर्याप्त नहीं लगेगा। आपका लोभ आपको आगे दौड़ाता रहेगा। इसलिए वस्तुओं की दौड़ में शामिल होने से पहले आप यह जान लें कि कहां पर रुकना है और तभी आप दौड़ लगाएं। नहीं तो अपने ही जाल में इस कदर फंस जाएंगे कि आपका अंत या तो जेल में होगा या फिर अस्पताल में।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:विकास का मतलब