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धीरज का हिसाब-किताब

काम बस होने-होने को था कि उन्होंने छोड़ दिया। जहां उन्हें 100 नंबर मिलने थे, मिला शून्य। ऐसा अक्सर होता है, हमारा धीरज तब जवाब दे देता है, जब उसकी हमें सबसे अधिक जरूरत होती है। धीरज की कमी का सबसे बड़ा सोता है हड़बड़ी। कहते भी हैं कि गड़बड़ी की शुरुआत हड़बड़ी से होती है। आप जैसे ही धीरज का दामन छोड़ते हैं, यह तय कर बैठते हैं कि आपको सफलता की उतनी चाह नहीं। हेनरी एच अनार्ल्ड ने इस संबंध में एक खूबसूरत बात कही है। वह कहते हैं कि कोई भी मुर्गी अंडे से चूजा पाने के लिए उसे तोड़ती नहीं है, बल्कि उसे सेती है। हेनरी द्वितीय विश्व युद्ध के समय अमेरिकी एयर फोर्स के चीफ रहे। वह अपनी सफलता में 25 प्रतिशत हाथ प्रयत्न का और 75 प्रतिशत हाथ धीरज का मानते थे। जो लोग यह समझते हैं कि धीरज का मतलब है 'स्लो' होना, जो आज के समय में सफलता की गारंटी नहीं हो सकती, उन्हें दुनिया के सबसे बड़े धनिकों में शुमार रहे वॉरेन बफेट की बातों पर गौर करना चाहिए।

वह कहते हैं कि जो-जो आपको अपने से जितना आगे दिख रहे हैं, वे उसी अनुपात में आपसे ज्यादा धैर्यवान हैं। वे किसी कंपनी का शेयर खरीदकर कुछ नहीं करते, बस धीरज रखते हैं। इसी ने उन्हें लखपति से करोड़पति और करोड़पति से अरबपति बनाया। परेशानी कोई भी हो, आप उससे आसानी से पार पा सकते हैं, बशर्ते आप हड़बड़ी में नहीं हों और ठहरकर चीजों पर गौर कर सकते हों। यह सच है कि धीरज के साथ किए गए कार्य सफलता की गारंटी नहीं देते, लेकिन इस बात की गारंटी जरूर देते हैं कि असफलता से पार पाने के कई आसान रास्ते हैं। ऐसा नहीं कि धीरज और भौतिक प्रगति साथ-साथ नहीं चल सकते। धीरज हर अंतहीन इच्छा को दिशा दे सकता है, मकसद दे सकता है। इसका हिसाब-किताब बिल्कुल दुरुस्त है। साथ हो, तो 100 नंबर, नहीं तो शून्य।

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