DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अधूरी दुनिया का मुकम्मल प्रधानमंत्री

निदा फाजली ने लिखा है- कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता। इसलिए नहीं मिलता, क्योंकि दुनिया में कोई चीज मुकम्मल नहीं है, सब कुछ अधूरा है, सबमें कमियां हैं। कमियां भी पूरी नहीं हैं, वे भी अधूरी हैं। आप किसी के बारे में यह नहीं कह सकते कि वह शत-प्रतिशत बेईमान है, बहुत बेईमान के भी दो-चार किस्से मिल जाएंगे, जिनमें उसने बेईमानी नहीं की। इसलिए अब किसी की शत-प्रतिशत निंदा भी नहीं की जा सकती। जब हम कहते हैं कि अमुक नेता पूरी तरह बेईमान है, तो हम जानते हैं कि यह मुकम्मल सच नहीं है, इसमें झूठ की मिलावट है।

इसीलिए जनता हमेशा अपने नेताओं से नाराज रहती है। यह मामला कुछ शादी जैसा है, यह इससे जाहिर है कि सबसे ज्यादा चुटकुले या तो नेताओं के बारे में सुनाए जाते हैं या पति-पत्नी को लेकर होते हैं, यानी मर्द औरतों के और औरतें मर्दों के बारे में चुटकुले सुनाती हैं। मोदी सरकार ने अभी एक साल पूरा ही किया है और लोगों ने मोदी की आलोचना शुरू कर दी। जो लोग पहले मनमोहन सिंह का मजाक उड़ाते थे, अब वे मोदी का उड़ाने लगे हैं। जो अब भी मोदी के भक्त हैं, वे इस दुनिया से अलग प्रजाति के लोग हैं। उनमें न कुछ घटाया जा सकता है, और न जोड़ा जा सकता है, वे ठोस हैं।
पर भारत का आदर्श प्रधानमंत्री कैसा होना चाहिए? शायद मनमोहन सिंह का दिमाग और नरेंद्र मोदी का शरीर जोड़ दिया जाए, तो आदर्श के आसपास पहुंच सकता है। मनमोहन सिंह सोच सकते थे, कर नहीं सकते थे, मोदी में ऊर्जा ही ऊर्जा है। एक साल में मोदी ने जो किया,सब वही है, जो मनमोहन ने सोचा था- पाकिस्तान और चीन की नीति, बांग्लादेश से सीमा समझौता, खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश, कोयला खदानों की नीलामी, बीमा और रक्षा में विदेशी निवेश, वस्तु और सेवा कर को आगे बढ़ाना। तब भाजपा इन सबके विरोध में खड़ी थी। अब मोदी कर रहे हैं और भाजपा मनमोहन सिंह की तरह चुप है। लेकिन यथार्थ में दोनों मिलकर एक प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। मुकम्मल जहां किसे मिलता है?

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:अधूरी दुनिया का मुकम्मल प्रधानमंत्री