DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मजबूरी के नाम पर

मजबूरी वह मानसिक स्थिति है, जब व्यक्ति घटनाओं और परिस्थितियों को इच्छानुकूल नहीं पाता और खुद को लाचार पाता है। यह मानसिक अवरोध है, जो व्यक्ति के दिमाग में तभी आता है, जब वह उसे खाली छोड़ दे। यदि व्यक्ति अपने लक्ष्य व जीवन के मौलिक उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित करे, तो उसके दिमाग को 'मजबूर' महसूस करने की क्रिया के लिए स्थान मिल ही नहीं सकता। लोग अपनी गरीबी, विकलांगता, अशिक्षा आदि की मजबूरी बताते हुए यह साबित करने की कोशिश करते हैं कि उनसे ज्यादा मजबूर और परेशान कोई नहीं है। यह सच होता, तो गरीब होते हुए भी स्वामी रामतीर्थ, अमेरिका के राष्ट्रपति विल्सन, लाल बहादुर शास्त्री कभी उच्च पदों पर नहीं पहुंचते। इसी तरह, हेलेन केलर, विल्मा गोल्डीन रूडॉल्फ व स्टीफन हॉकिंग जीवन को मजबूरी मानकर जीवन भर अपने दिन गिनते रहते। वहीं अशिक्षा यदि मजबूरी का जामा पहन लेती, तो सूरदास और कबीर कभी सफल नहीं होते।

मैसाच्युसेट्स में हुए एक शोध से यह बात सामने आई है कि जो लोग मजबूरी जैसे मानसिक अवरोध से दूर रहते हैं, उनमें उत्साह व आत्मविश्वास के भाव पनपते हैं। मजबूरी की बाधा स्वस्थ व्यक्ति को भी शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर कर देती है। कुछ लोग मजबूरी जैसे मानसिक अवरोध के कारण सही समय का इंतजार करते हुए बूढ़े हो जाते हैं, पर उनके हाथ कुछ नहीं लगता। नेपोलियन हिल कहते हैं, 'सही समय जैसा कुछ नहीं होता, उसके इंतजार में मत बैठिए। आप जहां हैं, जो भी साधन आपको उपलब्ध है, उनसे शुरू तो कीजिए। जैसे-जैसे आप आगे बढ़ेंगे, बेहतर साधन उपलब्ध होते चले जाएंगे।' मजबूरी ऐसी मानसिक अवस्था है, जिसमें व्यक्ति यह निर्णय कर लेता है कि मैं कुछ नहीं कर सकता। जीवन की चुनौतियों के आगे जो जितनी जल्दी हार मानकर मजबूर हो जाता है, वह उसके मानसिक आलस्य के स्तर का परिचायक है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:मजबूरी के नाम पर