DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

इन्हें कौन समझाए

साहब, मेरी बेटी के दिल में सुराख था। दो साल पहले मैं उसे इलाज के लिए वहां ले गया। 15 दिन रहना पड़ा। क्या डॉक्टर, क्या मरीज, क्या मरीजों को देखने वाले, सबको जब पता चलता था कि मैं कहां से आया हूं, तो वे मेरी बेटी के लिए दुआ करते और मुझे जबरदस्ती खाना व फल भी खिलाते। और साहब जब वहां के गुलोकार, शायर, लेखक और अफसर हमारे यहां आते हैं, तो सब वापस जाकर बोलते हैं कि हमने तो ऐसा मुल्क और ऐसे लोग नहीं देखे। हमें तो कुछ और बताया गया था, मगर ये तो हम जैसे ही मोहब्बत करने वाले लोग हैं। साहब, बाकी दुनिया जैसे रह रही है, वैसे हम क्यों नहीं रह सकते? अजीब लोग हैं, जिंदा भी रहना चाहते और एक-दूसरे को मारना भी चाहते हैं।

आपने कभी सुना है कि दो घर, जिनकी दीवारें मिली हुई हों, उनमें रहने वाले सुबह एक-दूसरे को गालियां दें, दोपहर में एक-दूसरे को लतीफे सुनाएं और गले मिलें, और रात को फिर एक-दूसरे को गालियां देकर सो जाएं?  मैंने अब्दुल्ला पान वाले से पूछा, तुम किसकी बता कर रहे हो? अब्दुल्ला ने हैरत भरी नजरों से देखते हुए कहा, मैं तो समझ रहा था कि आप सब समझ रहे हो, मैं इंडिया और पाकिस्तान की बात कर रहा हूं! बुरा न मानना साहब, मुझे तो आप भी इन दोनों की तरह ही लगते हो, जो सब कुछ समझते हुए भी ऐसे जाहिर करते हैं, जैसे कुछ नहीं समझ रहे हैं।
बीबीसी में वुसतुल्लाह खान

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:इन्हें कौन समझाए