DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

वर्तमान के तनाव और अतीत के भूत

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापानी फौजियों ने चीन पर बहुत अत्याचार किए थे। तब जापान के फौजी चीन के संभ्रांत परिवारों की महिलाओं को जबरन उठाकर सैनिक शिविरों में ले जाते थे। जापान की सेना उस दौर में इन महिलाओं को 'कंफर्ट वूमन' कहा करती थी। चीन और जापान के रिश्तों के बीच यह दौर कभी न भूले जा सकने वाले इतिहास के काले अध्याय की तरह हमेशा मौजूद रहता है। चीन कई बार यह मांग कर चुका है कि जापान इस मामले में सार्वजनिक तौर पर माफी मांगे और मुआवजा दे। जहां तक माफी का मामला है, तो जापान यह माफी मांग भी चुका है, पर मुआवजा देने से वह इनकार कर देता है। उसका तर्क है कि इतिहास में इसका कोई सबूत नहीं है कि फौजियों ने क्या-क्या अत्याचार किए थे। यह तनातनी आज भी कायम है। माफी और मुआवजे का मुद्दा बार-बार लौट आता है।
जापान की नई समस्या यह है कि अब दक्षिण कोरिया भी कुछ ऐसी ही मांग कर रहा है। दूसरे विश्व युद्ध में जापान ने कोरिया को अपना उपनिवेश बना लिया था। वहां भी जापानी सैनिकों ने वैसे ही अत्याचार किए थे, जो उन्होंने चीन में किए थे। इतिहास का वह दौर दक्षिण कोरिया के जनमानस को भी वैसे ही चुभता है, जैसे वह चीन के जनमानस को बेधता है। एशिया के देश ही नहीं, दूसरे विश्व युद्ध में जापान द्वारा अमेरिकी सैनिकों पर किए गए अत्याचारों का मामला भी कई बार उछलता है।

पिछले दिनों जब जापान के प्रधानमंत्री शिंजो एबे अमेरिका गए, तो उन्होंने कहा था कि 20 साल पहले जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री टोमी ची मुरायामा ने सार्वजनिक तौर पर द्वितीय विश्व युद्ध में जापानी फौजियों द्वारा किए गए अत्याचारों के लिए माफी मांगी थी। वह दोबारा से मुरायामा के शब्दों को दोहराते हैं और कहते हैं कि द्वितीय विश्व युद्ध में जापान ने अमेरिकी सैनिकों के साथ जो अत्याचार किया था और अन्य एशियाई देशों के साथ जो जुल्म किया था, उसके लिए वह माफी मांग रहे हैं और यह चाहते हैं कि इस मामले को यहीं पर समाप्त कर दिया जाए। लेकिन शायद मामला खत्म कर देना इतना आसान भी नहीं है। नए तनावों के बीच पुराने घाव अक्सर ताजा हो जाते हैं और एशिया में भी इन दिनों यही हो रहा है।

खासकर 'साउथ चाइना सी' और 'ईस्ट चाइना सी' को लेकर जिस तरह से तनाव पैदा हुआ है, उसमें वे पुरानी यादें फिर सतह पर आ गई हैं। यह बात अलग है कि इस बार उनकी भूमिकाएं बदली हुई हैं। पहले जापान पर दादागिरी का आरोप लगता था, अब वह आरोप चीन पर लग रहा है और जवाब में चीन दूसरे विश्व युद्ध के अत्याचारों की याद दिलाने लगता है। यह मामला कुछ ऐसा है कि क्षेत्रीय राजनीति में जापान के साथ खड़ा होने वाला दक्षिण कोरिया भी इस मामले में जापान के खिलाफ खड़ा हो जाता है। साफ है, अतीत के भूत से पीछा छुड़ाना इतना आसान नहीं होता।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:वर्तमान के तनाव और अतीत के भूत