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इजरायल के लिए छोड़ा फलस्तीन का साथ

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ऐलान किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल जाएंगे। अभी तारीखें तय नहीं हैं, पर यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली इजरायल यात्रा होगी। इजरायल के साथ भारत ने अभी तक जो रणनीतिक रिश्ता कायम कर रखा है, उस पर मोहर लग जाएगी। कुछ टिप्पणीकारों के शब्दों में- भारत-इजरायल रिश्ते 'परदे के पीछे से निकलकर खुले में आ जाएंगे।' एनडीए के पिछले शासनकाल में उप प्रधानमंत्री, लालकृष्ण आडवाणी ने इजरायल का दौरा किया था और तब सुरक्षा व सैन्य गठजोड़ पर कई समझौते हुए थे।

नरेंद्र मोदी की सरकार के बनने के बाद से इजरायल के साथ घनिष्ठता बढ़ी है। इजरायली रक्षा मंत्री मोशे येलान ने इसी फरवरी में भारत का दौरा किया था।  किसी इजरायली रक्षा मंत्री की वह पहली सरकारी भारत यात्रा थी। इस दौरान उन्होंने कहा था, 'दोनों देशों ने परदे के पीछे से सहयोग के रास्ते निकाले हैं।' इन रिश्तों को बढ़ाने का इशारा भी किया था। इजरायल आज भारत के लिए हथियारों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है।

मार्च में हुए चुनाव के बाद इजरायल में बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार दोबारा चुनी गई है। इस सरकार में दक्षिणपंथी व अतिवादी यहूदी पार्टियों का बोलबाला है। यह सरकार फलस्तीनी नेतृत्व के साथ राजनीतिक समाधान की हर संभावना को बंद करने में लगी हुई है और इसी पृष्ठभूमि में मोदी की इजरायल यात्रा हो रही होगी। नई इजरायली सरकार के मंत्रिमंडल में ग्रेटर इजरायल के पैरोकारों का बोलबाला है, जो पश्चिमी तट को इजरायल में मिलाना चाहते हैं। ये लोग कब्जाए गए फलस्तीनी इलाकों को हथियाने के तरीके के लिए पश्चिमी तट पर यहूदी बस्तियां बसाने के पक्ष में हैं। जाहिर है, हम इजरायल की एक नस्लवादी और प्रतिक्रियावादी सरकार को समर्थन देने जा रहे हैं। हालांकि, नाम के वास्ते  फलस्तीनी लोगों का समर्थन करने की भारत की पुरानी नीति को बरकरार रखा जा रहा है, लेकिन वास्तव में सरकार अब इस रुख को कमजोर करने की दिशा में कदम उठा रही है।

भारत-इजरायल संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की मोदी सरकार की पहल, मोदी सरकार की समग्र विदेश नीति की दिशा के अनुरूप है, जो भारत को अमेरिका की भू-राजनीतिक रणनीति के साथ पूरी तरह से बांधना चाहती है। एशिया व प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के दो घनिष्ठ सहयोगियों, जापान व ऑस्ट्रेलिया की नरेंद्र मोदी की यात्राओं के दौरान, कई सुरक्षा व सैन्य समझौतों पर दस्तखत हुए। अमेरिका के नजरिये से इजरायल एक और अति-महत्वपूर्ण सहयोगी है, जिसके साथ भारत का गठबंधन होना चाहिए। मोदी की इजरायल यात्रा अमेरिका के नेतृत्व में गढ़े जा रहे इस रणनीतिक गठबंधन को पुख्ता करने की दिशा में एक और कदम साबित होगी। इस यात्रा से आजाद फलस्तीन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता भी छूटती लगेगी।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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