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मनपसंद काम

वह अपने बेटे को अपनी ही तरह शिक्षक बनाना चाहते हैं, जबकि उनके बेटे की शिक्षक बनने में कोई रुचि नहीं है। एक वही नहीं, हममें से कई अक्सर अपने बच्चों पर अपनी मर्जी का जीवन थोपना चाहते हैं। इस मामले में स्मिथ सिडनी की बात दिलचस्प है, ‘यदि गोल-मटोल व्यक्ति को वर्गाकार छिद्र में, वर्गाकार व्यक्ति को गोल छिद्र में, त्रिभुजाकार व्यक्ति को आयताकार छिद्र में और आयातकार व्यक्ति को तिकोने छिद्र में किसी प्रकार ठोक-पीटकर फिट किया जाए, तो सारा प्रयत्न व्यर्थ सिद्ध होगा।’

गैलीलियो के माता-पिता यदि उन पर अपनी इच्छा लादते, तो गैलीलियो विज्ञान के अद्भुत कार्य कैसे कर पाते? यदि टर्नर के पिता अपने पुत्र को अपनी तरह नाई बना देते, तो संसार को विश्वविख्यात चित्रकार कहां से मिल पाता? यदि जॉन जैक के पिता अपने बेटे को कसाई बना डालते, तो जैक अनेक फर्मों के मालिक और गरम वस्त्रों के प्रसिद्ध व्यापारी कैसे बन पाते? स्वेट मार्डेन के अनुसार, ‘यह प्रकृति का नियम है कि व्यक्ति जिस काम में सबसे अधिक रुचि रखता है, उसे उसी में विशिष्टता प्राप्त होती है। कोई भी व्यक्ति तब तक आदर्श या पूर्ण रूप में सफल नहीं हो सकता और न ही कोई विशेष महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त कर सकता है, जब तक कि अपनी रुचि के अनुसार कार्य करके वह अपना विशेष स्थान नहीं बना लेता।’

जिसकी जिस कार्य में रुचि हो, उसे वही कार्य करने चाहिए। अभिरुचि के अनुसार कार्य करना ज्यादा आसान होता है। ऐसे काम को लोग पूरे मन से करते हैं, और मन से किया गया काम सबसे अच्छा माना जाता है। और अंत में आपकी रुचि ही आपका भविष्य तय करती है। दार्शनिक बुलवर के शब्दों में- ‘संसार में यह असंभव बात है कि कोई व्यक्ति अपनी रुचि के विरुद्ध आयु भर संघर्ष करने पर भी जीत सके।’ यदि जीत निश्चित चाहिए, तो अपनी रुचि पहचानें और उसी राह पर आगे बढ़ना शुरू करें।

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