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कश्मीर पर नए तेवर से बंधी उम्मीद

भारत सरकार ने औपचारिक तौर पर पाक अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बालटिस्तान में होने वाले विधानसभा चुनाव का आक्रामक विरोध करके एक नई शुरुआत की है। पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर पर अपनी आक्रामकता प्रदर्शित करने में सारी हदें पार करता रहा है, जबकि हमारे यहां पाक अधिकृत कश्मीर पर हिचक रही है। पाकिस्तान को उसकी ही भाषा में जवाब देने के लिए आतंकवाद तो हम नहीं अपना सकते, पर कूटनीतिक मोर्चे पर आक्रामक जरूर हो सकते हैं।
 
साफ है कि मोदी सरकार ने अपनी कश्मीर नीति में परिवर्तन का संकेत दिया है। वैसे पाकिस्तान का वहां विधानसभा का चुनाव कराने का कदम उसे अपने देश का एक राज्य बनाने की रणनीति भर है। पाकिस्तान इस पार के जम्मू-कश्मीर के बारे में आवाज उठाता है। यहां के लोग 1967 से ही लगातार राष्ट्रीय चुनाव में मतदान करते रहे हैं, बीच के एक कालखंड को छोड़ स्थानीय चुनाव भी लगातार हो रहे हैं। पाकिस्तान ने पिछले 67 साल में गिलगित-बालटिस्तान के लोगों को चुनाव का अधिकार नहीं दिया। वे पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में रहते हैं, पर उनके पास कोई नागरिक या सांविधानिक अधिकार नहीं है। स्थानीय लोगों को शासन में भागीदार बनाने के तर्क पर विधानसभा का गठन करने में भी उसे 62 साल का समय लग गया। और जो व्यवस्था बनी, उसमें पाकिस्तान के अधिकारियों का ही वर्चस्व है। आठ जून को उसी 35 सदस्यों वाली विधानसभा का चुनाव होना है, जिसकी कोई हैसियत नहीं। पाकिस्तानी सीनेट की स्थायी समिति भी मानती है कि इस्लामाबाद की इजाजत के बिना यह सरकार एक चपरासी भी नियुक्त नहीं कर सकती।

एक समय अपने पर्यटन तथा अन्य प्राकृतिक देनों से खुशहाल गिलगित-बालटिस्तान आज अत्यंत गरीब क्षेत्र बन गया है। इस क्षेत्र में आर्थिक सुधार की दिशा में काम नहीं हो सका। लद्दाख, कश्मीर और वाखान की तरफ खुलने वाले व्यापारिक रास्ते बंद हैं, जिसके चलते इस क्षेत्र के लोगों में पाकिस्तान का विरोध बढ़ा है और आजादी के विचार को बल मिला है। हालांकि पूर्ण आजादी की बजाय ये भारत और पाकिस्तान, दोनों से अभी यह मांग कर रहे हैं कि उनकी अलग पहचान स्वीकार करके उन्हें शासन का अधिकार दिया जाए। अप्रैल में गिलगित-बाल्टिस्तान में प्रशासनिक सुधार और स्थानीय लोगों को सत्ता की मांग करने वाले संगठन इंस्टीट्यूट ऑफ गिलगित-बालटिस्तान स्टडीज के प्रमुख सिंगे सेरिंग भारत आए थे। वह गिलगित-बालटिस्तान के पहले निवासी हैं, जिन्हें अधिकृत तौर पर भारत आने की अनुमति दी गई। वह जम्मू-कश्मीर समेत भारत के कई हिस्सों में गए, और बताया कि कैसे बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिकों को गिलगित-बालटिस्तान में बसाया जा रहा है। वहां 14 प्रतिशत आबादी वृद्धि दर इसका प्रमाण है। भारत ने पाकिस्तान को उसकी भाषा में जवाब देने की शुरुआत कर दी है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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