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छिछोरों को मुआवजे की संभावना

मैगी के मामले में माधुरी दीक्षित पर केस इसलिए हुआ कि माधुरी दीक्षित मैगी को पौष्टिक क्यों बता रही थीं, जबकि मैगी में तो बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाले आइटम हैं।

माधुरी दीक्षित से कोई इस मसले पर पूछताछ करे, तो पक्का वह यही कहेंगी- मुझे क्या मालूम, मैगी में क्या-क्या होता है? उनसे यह सवाल बनता है- जब आपको मालूम ही नहीं था, तो बता क्यों रही थीं? इस सवाल पर माधुरी हंस सकती हैं। इस सवाल पर हंसा ही जा सकता है।

अगर इसके बारे में पूरा ज्ञान हासिल करने लग गए, फिर कई कारोबार तो हो ही नहीं सकेंगे। न मॉडलिंग-इश्तिहारबाजी हो सकेगी, और न ही नेतागिरी। अरविंद केजरीवाल चुनाव से पहले दिल्ली में लाखों सीसीटीवी कैमरे लगाने की बात कर रहे थे। वह 20 कॉलेज और 500 स्कूल भी दिल्ली में खोलने की बात कर रहे थे। ऐसी बातें बिना समझ-ज्ञान के ही संभव हैं। वादे करने से पहले भी सोचना-समझना पड़े, तब तो माधुरी दीक्षित और अरविंद केजरीवाल के कारोबार  नहीं चल सकते।
 
खैर, अब माधुरी दीक्षित पर केस दर्ज हुआ है और अगर मैगी के सताए लोगों को मुआवजा मिल गया, तो देश के कई छिछोरों के लिए उम्मीद की नई किरण उग उठेगी। डियोड्रेंट के तमाम इश्तिहार छिछोरों में गहरी आशा का प्रसार करते हैं कि डियो लगाते ही सुंदरियां बेकाबू होकर डियो-धारी से मुहब्बत करने को टूट पड़ेंगी। पर इस देश की सुंदरियां बहुत मैच्योर्ड हैं। सुंदरियां डियो-धारी छिछोरों की आशाओं पर पानी फेर रही हैं। फिर भी छिछोरे मानते नहीं हैं, इस उम्मीद में रहते हैं कि शायद कभी असली सुंदरियां इश्तिहारों वाली सुंदरियों जैसी मूर्ख साबित होंगी।

ऐसे छिछोरे समझ लें कि अब सुंदरियां उन्हें मिलें या नहीं, पर मुआवजा जरूर मिल सकता है, उन फर्जी इश्तिहारों के खिलाफ, जो तमाम डियो कंपनियां करती रहती हैं। माधुरी दीक्षित पर केस हो लिया, अब छिछोरे डियो कंपनियों पर भी केस कर सकते हैं कि नहीं मिली कोई सुंदरी तुम्हारे डियो से। डियो-प्रेमी छिछोरो, तुम्हारी एकता का सही वक्त यही है।

 

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