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3 जून, 2020|11:58|IST

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हंसी की ताकत

परीक्षा परिणामों के इस मौसम में बच्चों के साथ-साथ माता-पिता भी तनाव के दौर से गुजर रहे हैं। कई घरों में बच्चों के दाखिले और भविष्य की योजना को लेकर बहुत तनाव का माहौल है। लोग हंसना-मुस्कराना ही भूल जाते हैं। हंसी की इस गैर-हाजिरी पर याद आता है मैरीलैंड बॉल्टीमोर यूनिवर्सिटी के न्यूरो बायोलॉजिस्ट रॉबर्ट बॉबिने का 'लाफिंग थेरेपी' पर महत्वपूर्ण शोध। उनके मुताबिक, अगर बचपन से ही खिलखिलाने और ठहाके लगाने की आदत डाल ली जाए, तो आगे चलकर आप अनिद्रा, अवसाद जैसी बीमारियों से आसानी से अपना बचाव कर सकते हैं। बॉबिने मानते हैं कि कुछ लोग खुशमिजाज नहीं होते। कुछ अपनी हंसी पर पाबंदी लगा लेते हैं। इस तरह, जीवन बोझिल हो जाता है। आप किसी से खुलकर न मिल पाते हैं और न दिल की बातें ही कर पाते हैं। ऐसे लोगों को खुद पर हंसने की कोशिश करनी चाहिए। इससे आपको गिरकर उठने की शक्ति मिलती है। आप हल्का महसूस करते हैं। हंसी जीवन का आनंद है। यह जीवन का सौंदर्य और शृंगार है, जो इसे धारण नहीं करता, उसके व्यक्तित्व में चमक नहीं होती है। खिलखिलाकर हंसना, हास्य-व्यंग्य और विनोदपूर्ण मुस्कराहट, गुस्सैल इंसान को भी हंसा देता है। हंसी एक अचूक दवा है, जिसे प्रकृति ने मुफ्त में उपहार स्वरूप दिया है। इसलिए, काम के बीच भी फुरसत के कुछ पल निकालकर अपने साथियों के साथ हंसी-मजाक करिए। हंसने का कोई भी अवसर न गंवाएं, जमकर ठहाके लगाइए। काम करना आसान हो जाएगा और दिमाग भी हल्का रहेगा। हंसी के संदर्भ में महात्मा गांधी का कहना है कि हंसी मन की गांठें बड़ी सरलता से खोल देती है। मेरे मन की ही नहीं, आपके मन की भी। जबकि, जॉर्ज बनार्ड शॉ मानते थे कि हंसी के ठहाकों पर यौवन के फूल खिलते हैं। हंसना इंसान के जीवन का सकारात्मक पक्ष है। दुनिया  में मुस्कराने की भाषा सब जानते और समझते हैं।

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