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परिवार के लिए छुट्टियों पर नई सोच जरूरी

ऐसे बहुत-से कदम हैं, जिन्हें शुरू तो काफी प्रगतिशील बताकर किया जाता है, पर फिर न जाने क्यों कुछ लोगों को लगता है कि वे प्रगति में बाधा बनने लगे हैं। यही चाइल्ड केयर लीव यानी सीसीएल के साथ हुआ है। सीसीएल की सिफारिश जब केंद्र सरकार के छठे वेतन आयोग ने की थी, तो उसे महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था। हालांकि प्रसूति अवकाश की ही तरह इसे सभी राज्यों ने एकरूपता के साथ स्वीकार नहीं किया, जिसके पीछे सोच यही थी कि इससे आर्थिक क्षति होगी। अब सातवें वेतन आयोग ने इसमें कटौती की सिफारिश की है। वेतन आयोग ने दो साल तक के पूर्ण सवैतनिक अवकाश के स्थान पर एक साल तक की अवधि के लिए पूरा सौ फीसदी वेतन देने और अगले साल के लिए 80 फीसदी तक वेतन देने का सुझाव दिया है। वेतन आयोग की रिपोर्ट के बाद यह मान लिया गया था कि और कुछ हो न हो, ये सिफारिशें तो स्वीकार हो ही जाएंगी। मगर हाल ही में केंद्रीय महिला व बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी ने सीसीएल में कटौती का विरोध करके एक उम्मीद जरूर बंधाई है।

इस कटौती के पीछे जो सोच है, उसका खंडन एसोचैम के एक सर्वे से भी होता है। इस सर्वे के अनुसार, शहरी इलाकों में उन उच्च शिक्षा प्राप्त माताओं की बड़ी तादाद है, जो दफ्तर और बच्चों के मध्य सामंजस्य न बिठा पाने की स्थिति में पेशेवर जिंदगी और करियर को छोड़ रही हैं। हमें यह समझना ही होगा कि बीते दशकों में संयुक्त परिवार टूटे हैं और एकल परिवार बढ़े हैं। एकल अभिभावकों विशेषकर एकल माताओं की संख्या में इजाफा हुआ है, जिससे बच्चों को पालना चुनौती बन चुका है। करियर और मातृत्व के बीच चुनाव के संघर्ष को अर्थशास्त्री सिल्विया एन हेवलेट ने अपनी पुस्तक क्रिएटिंग ए लाइफ : प्रोफेशनल वुमेन ऐंड द क्वेस्ट फॉर चिल्ड्रन  में बताया है। किसी संगठन में निचले या उच्च स्तर पर महिलाओं द्वारा नौकरी छोड़े जाने की घटना या उनकी संख्या में कमी आने को सामान्य तौर पर 'लीकिंग पाइपलाइन' कहा जाता है। ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

हालांकि सातवें वेतन आयोग की एक महत्वपूर्ण सिफारिश 'एकल पिता' को भी बच्चों की देखभाल के लिए सीसीएल देने की है। यह बदलते समय की आवश्यकता की स्वीकरोक्ति है। बीते दशकों में महिलाओं ने परिवार के आर्थिक उत्तरदायित्वों को साझा किया है। ऐसी परिस्थितियों में बच्चों के पालन में पिता की भूमिका बढ़ी है। लेकिन क्या यह बेहतर नहीं होगा कि यह अभिभावकों को स्वयं चुनने दिया जाए कि कौन घर पर रहकर बच्चों का दायित्व संभालेगा और कौन पेशेवर जीवन। ब्रिटेन में हुए अध्ययन के अनुसार लगातार लंबे समय तक नौकरी से दूर रहने पर महिलाएं स्वयं को पिछड़ा हुआ पाती हैं। वहां अब नई व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें माता-पिता छुट्टियां आपस में बांट सकेंगे।
(ये लेखिका के अपने विचार हैं)

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  • Web Title:new thinking needed on family holiday