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10 अप्रैल, 2020|4:47|IST

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जहां कण-कण में हैं कई सारे इतिहास

गुड़गांव को गुरुग्राम करने के हरियाणा सरकार के फैसले से प्रभावित होकर यहां मैं एक महत्वपूर्ण बात बता रहा हूं। ऐतिहासिक तथ्य यह है कि जहां हमारा दफ्तर है, यानी नोएडा, इसका नाम अतीत में नवोढ़ा, यानी नवविवाहिता था। रामायाण काल में प्रथा थी कि नवविवाहिता जब अपने ससुराल जाती थी, तो यहां पर उसे रोककर उसका स्वागत किया जाता था। जानकार बताते हैं कि यहीं कहीं रावण की ससुराल थी।

तो यह साफ है कि रावण भी शादी के बाद अपनी पत्नी को इसी रास्ते से लाया होगा। रावण की शादी के बाद जब ऐसा हुआ होगा, तो साफ है कि उसके भाइयों की शादी में भी हुआ होगा। यह इससे सिद्ध होता है कि आज भी यहां आसपास बहुत सारे वैंक्वेट हॉल हैं और शादी के सीजन में ट्रैफिक जाम हो जाता है। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अंतदृर्ष्टि से देखें, तो आज भी यहां नाचने वाले बारातियों को देखकर आपको रावण और कुंभकर्ण की बारातों में नाचने वाले राक्षसों का भ्रम हो सकता है।

जो लोग कह रहे हैं कि 'नोएडा' वास्तव में 'न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी' का संक्षिप्त रूप है, उन्हें धिक्कार है। वे देशद्रोही हैं और भारत के वास्तविक इतिहास को छिपाना चाहते हैं। यहां आसपास की हर चीज रामायाणकालीन होने की गवाही देती है। इसकी सड़कों में जो गड्ढे हैं, वे इतने गहरे हैं कि निश्चय ही रामायणकालीन हैं। कई गड्ढों में तो कई रामायाणकालीन पुरा-वस्तुएं भी मिली हैं। सुना है कि सड़क के एक गड्ढे में एक प्राचीन इमारत के खंडहर मिले हैं। यह बहस अभी चल रही है कि ये रामायणकालीन खंडहर हैं या जीडीएकालीन? यहां सड़कों के गड्ढे भरने का तरीका भी रामायणकालीन है। यहां अगर कोई आधुनिक चीज आती भी है, तो यहां की धूल-मिट्टी में रामायाणकालीन हो जाती है।

मैंने तो नोएडा, यानी नवोढ़ा का एक उदाहरण दिया है। ऐसी ही स्थिति देश के चप्पे-चप्पे में है। कण-कण में इतिहास है। इसलिए जरूरी है कि भारत के चप्पे-चप्पे का नाम बदला जाए। इससे लोगों को गर्व भरा एहसास तो होगा कि वे 21वीं नहीं, इतिहास की किसी सदी में रह रहे हैं।
राजेन्द्र धोड़पकर

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  • Web Title:gurgaon gurugram haryana government decision