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-यह है विवाद

लोनी। सन 2009 में भूमि का अधिग्रहण होने के बाद नवंबर 2016 तक प्रभावित किसानों एवं आवास विकास परिषद के बीच कोई विवाद नहीं था। एक दिसम्बर 2016 से किसानों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन शुरू किया था। किसानों का आरोप था कि आवास विकास ने धारा 17 लगाकर उनकी कीमती एवं उपजाऊ भूमि का धोखे से कौड़ियों के भाव जबरन अधिग्रहण कर लिया है। उन्होंने परिषद के सामने 50 प्रतिशत विकसित भूमि वापस करने तथा बाकी भूमि का मुआवजा विक्रय दर का 60 प्रतिशत देने की मांग रखी। अपनी इन मांगों को लेकर दो दिसम्बर से किसानों ने मंडोला गांव के होलिका दहन स्थल पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया था। 28 मार्च 2017 से करीब डेढ़ दर्जन किसानों ने 13 दिनों तक आमरण अनशन भी किया था। तत्कालीन डीएम निधि केसरवानी, एसएसपी दीपक कुमार एवं आवास विकास के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर किसानों से वार्ता की, जिसमें किसानों ने अपना मांग पत्र बदलते हुए भूमि के वर्तमान सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा, दस प्रतिशत विकसित भूमि निशुल्क वापस देने आदि की मांगें रखी थीं। जबकि सरकारी भूमि पर बने डिग्री कॉलेज की भूमि को निशुल्क कॉलेज के नाम कर शिक्षा विभाग से मान्यता दिलाने, इंटर कॉलेज की अधिग्रहित भूमि को छोड़ने, नवादा में भरे गंदे पानी एवं नाले की समस्या का निस्तारण कराने, गांव का श्मशान घाट एवं होलिका दहन स्थल विकसित कराने की मांगे भी रखी थी। डीएम ने अपने स्तर की मांगे पूरा करने एवं अन्य के लिए शासन स्तर पर वार्ता कराने का आश्वासन देकर किसानों का चार माह से चला आ रहा धरना एवं आमरण अनशन समाप्त करा दिया था। डीएम ने मामला तय हो जाने तक आवास विकास योजना में चल रहे सभी निर्माण कार्य भी बंद रखने का आश्वासन दिया था। निधि केसरवानी के ट्रांसफर के बाद जनपद की वर्तमान डीएम मिनिस्ती एस ने 18 मई को किसानों के प्रतिनिधि मंडल को वार्ता के लिए कलेक्ट्रेट सभागार में बुलाया था। आंदोलन कर रहे किसानों का एक गुट उस समय वार्ता के लिए नही पहुंचा, लेकिन दूसरा गुट वार्ता के लिए पहुंच गया। डीएम ने वार्ता के लिए पहुंचे किसानों को स्पष्ट कर दिया कि मुआवजा बढ़ाने का अधिकार उनके पास नहीं है। इसके लिए उन्हें कोर्ट जाना होगा। जबकि अन्य मांगों को विचार कर पूरा करने का आश्वासन दिया। दूसरे दिन से ही डीएम के आदेश पर आवास विकास में बंद पड़े निर्माण कार्य शुरू करा दिए गए थे। कुछ दिन बाद किसानों के दूसरे गुट ने भी गाजियाबाद पहुंचकर डीएम से वार्ता की थी। डीएम ने मुआवजे को छोड़कर उनकी अन्य मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया, लेकिन वह संतुष्ट नही थे। तभी से इस गुट के किसान नाराज थे और शुक्रवार को मंडोला विहार में चल रहे निर्माण कार्य बंद कराने पहुंच गए।मुकदमा दर्ज होने से भी नाराज थे किसानकुछ दिन पूर्व प्रशासन ने किसानों के एक गुट का नेतृत्व कर भट्टा पारसौल के मनवीर तेवतिया के जनपद में आने पर प्रतिबंध लगा दिया था एवं करीब तीस-40 लोगों के विरुद्ध किसानों को भड़काने के आरोप में ट्रॉनिका सिटी थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया था, जिनमें से पांच लोग नामजद भी हैं। इसके अलावा मंडोला ग्राम प्रधान सरिता के अधिकार भी सीज कर दिए थे। इस कार्रवाई से भी किसानों का एक गुट नाराज है।

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