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डोभी में किसान के आइपीएस बेटे ने यूपीएससी में एक बार फिर लहराया परचम

मैं आज जो हूं, वह माता-पिता की प्रेरणा और आशीर्वाद की वजह से है। उनकी सोच के कारण ही मैं यहां तक पहुंच पाया। हैदराबाद में आईपीएस की ट्रेनिंग कर रहे विवेक कुमार ने ये बातें यूपीएससी में दोबारा सफलता पाने के बाद हिन्दुस्तान से बातचीत में कहीं। इस बार उन्हें 278 वीं रैंक मिली है। पिछली बार उनका रैंक 619 था। गया के डोभी प्रखंड के कुसा गांव के रहने वाले किसान उमेश प्रसाद चन्द्रवंशी के पुत्र विवेक बचपन से ही पढ़ाई में तेज रहे। छठी कक्षा में ही उन्होंने मिलिट्री स्कूल बैंगलुरू की परीक्षा पास की। यहां उन्होंने दसवीं तक पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने रांची में सुरेन्द्र नाथ सैंट मैरी स्कूल से 12 वीं की पढ़ाई की।

फिर आईआईटी रूड़की में चयन हो गया। 2012 से डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन में बतौर साइंटिस्ट नौकरी की। दिल्ली में नौकरी करते हुए पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी। इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली। 2015 में परीक्षा पास की। 2016 में और बेहतर रैंक मिला। विवेक ने बताया कि परीक्षा में मैकेनिकल इंजीनियरिंग उनका वैकल्पिक विषय रहा। इंटरव्यू के दौरान उनसे पूछा गया था कि भारत अपना सबमरीन बना पाने में क्यों सक्षम नहीं है। विवेक ने इस सवाल का बेहतर जवाब दिया था। विवेक के माता पिता पटना में रहते हैं। पिता उमेश प्रसाद ने बताया कि विवेक चार भाई बहनों में सबसे छोटे हैं। उन्होंने इस सफलता के लिए बड़ी मेहनत की है। डोभी में हमारी सात आठ बीघा जमीन थी। बच्चों की पढ़ाई के लिए जमीन बेचनी पड़ी। विवेक के बड़े भाई अभिषेक कुमार गुजरात में सेक्शन इंजीनियर हैं।

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  • Web Title:Farmer's IPS son hoisted once again at UPSC