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फिल्म रिव्यू: मिस लवली

फिल्म रिव्यू: मिस लवली

आशिम अहलूवालिया की फिल्म ‘मिस लवली’ आपको अस्सी-नब्बे के दशक में ले जाती है। आज लगभग पूरी फिल्म इंडस्ट्री पर कॉरपोरेट का कब्जा है। घर-बार बेच कर अपने दम पर फिल्म बनाने वाले निर्माता अब न के बराबर हैं, लेकिन उस जमाने में एक निर्माता और फिल्म वितरक ही सब कुछ होता था।

‘मिस लवली’ दिखाती है कि अस्सी के दशक में सी-ग्रेड फिल्मों की आड़ में अश्लील फिल्मों का चलन नब्बे के दशक तक कैसे ब्लू फिल्मों की शक्ल में तब्दील हो गया। ये फिल्म दिखाती है कि कैसे अश्लील फिल्मों की तारिका पर जब बढ़ती उम्र की गाज गिरती है तो वह अंधियारों में सिमट जाती है। और भी कई बातें इस फिल्म के जरिये उजागर होती हैं।

नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने यह फिल्म उस दौर में साइन की थी, जब उन्हें आज जैसी पहचान नहीं मिली थी। ये फिल्म देख कर पता चलता है कि इस दौरान उनके अभिनय में कितना और कैसा अंतर आया है। उन्हें अनिल जॉजर्, निहारिका सिंह जैसे कलाकारों का अच्छा साथ मिला है।

विषय वस्तु के लिहाज से फिल्म कई हिस्सों में बांधे रखती है, लेकिन ‘मिस लवली’ पर डॉक्यूमेंट्री प्रभाव हावी दिखता है, जो इसे न तो मुकम्मल रूप से कला फिल्म की श्रेणी की तरफ ले जाता है और न ही पेशेवर फिल्म की श्रेणी के आसपास फटकने देता है। करीब दो घंटे की यह फिल्म बेहद सुस्त है। इसकी वजह है इसकी पटकथा और संपादन में कंजूसी।

फिल्म की कहानी दो भाइयों मिकी दुग्गल (अनिल जॉर्ज) और सोनू दुग्गल (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) पर केंद्रित है। मिकी अश्लील हॉरर फिल्में बनाता है, जिसे वह एक फिल्म निर्माता पीके (रागेश अस्थाना) को बेचता है। ये फिल्में एक फिल्म वितरक हीरा (मनोज बक्शी) रिलीज करता है। सोनू इन फिल्मों की रीलों में अलग से अश्लील दृश्य जोड़ने का काम करता है और अश्लील रीलें भी सप्लाई करता है।

इसके अलावा सोनू अश्लील दृश्यों की शूटिंग के लिए नई-नई तारिकाओं का भी इंतजाम करता है। एक दिन सोनू की जिंदगी में एक नई हीरोइन पिंकी (निहारिका सिंह) आती है। वह पिंकी को लेकर एक रोमांटिक फिल्म प्लान करता है। उधर, मिकी की जिंदगी में भी एक नई तारिका आती है नाडिया (मेनका लालवानी), जिसकी वजह से वह अपनी पुरानी हीरोइन पूनम (जीना भाटिया) को नजरअंदाज करना शुरू कर देता है।

एक दिन नाडिया का खून हो जाता है और अवैध रूप से चल रही इस फिल्म इंडस्ट्री पर पुलिस की गाज गिरती है। अवैध रूप से चल रहे अश्लील फिल्मों के कारोबार, उसके आसपास पनपते किरदार और इस बीच दो भाइयों की कहानी को आशिम ने दिलचस्प अंदाज में दिखाया है। अतीत के लुक को प्रभावी ढंग से दिखाने के लिए उन्होंने अस्सी के दशक के पॉप कल्चर के साथ पुराने स्टूडियोज, कामकाज के ढंग, धुंधली रोशनी, ड्रेस डिजाइन आदि पर भी अच्छा फोकस किया है।

‘मिस लवली’ की मेकिंग की कई बातें उनके फेवर में जाती हैं, पर एक रोचक विषय होने के बावजूद फिल्म में रोचक तथ्यों का अभाव नजर आता है।

ये भी सत्य है कि आशिम इस फिल्म को पहले डॉक्यूमेंट्री का रूप देना चाहते थे, लेकिन जब उनके साथ कुछ विदेशी बैनर जुड़े तो फिल्म की रूपरेखा बदली और उस पर मसाला फिल्म बनाने की तैयारी ने जोर पकड़ा। नतीजतन यह हुआ कि फिल्म कागजी स्तर पर तो मसाला बनी, लेकिन परदे पर उसका असर नहीं दिखा। ‘मिस लवली’ फिल्म समारोहों के मिजाज की फिल्म है। ऐसी फिल्मों के चाहने वाले एक खास वर्ग के लोग हो सकते हैं। हालांकि इस विषय में हर तरह की मास अपील है, पर निर्देशक को फिल्म उसी अंदाज में बनानी भी चाहिए थी।

सितारे: नवाजुद्दीन सिद्दीकी, निहारिका सिंह, अनिल जॉर्ज, मेनका लालवानी, जीना भाटिया, रागेश अस्थाना, मनोज बक्शी, जहीर खान
निर्देशक: आशिम अहलूवालिया 
निर्माता: शुमोना गोयल
बैनर: फ्यूचर ईस्ट, फोर्टिस्सोमो फिल्म्स
लेखक-पटकथा: उत्तम सिरुर, आशिम अहलूवालिया
संगीत: एडो बॉउमैन
कॉस्ट्यूम डिजाइनर: तबाशीर जुत्शी
कोरियोग्राफर: कमल नाथ मिश्र

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